14 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र साइबर की सफलता: डिजिटल अरेस्ट ठगी में फंसी 2 बुजुर्ग महिलाओं को बचाया, ₹3 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

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महाराष्ट्र साइबर की सफलता: डिजिटल अरेस्ट ठगी में फंसी 2 बुजुर्ग महिलाओं को बचाया, ₹3 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

सारांश

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने एक 'लेयर-1 म्यूल अकाउंट' की लाइव ट्रेसिंग से न केवल छत्रपति संभाजीनगर की 74 वर्षीया पीड़िता का मामला उजागर किया, बल्कि उसी सुराग से दिल्ली की दूसरी महिला को और नुकसान से बचा लिया — दो राज्यों के बीच साइबर समन्वय की एक मिसाल।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 14 अक्टूबर 2026 को डिजिटल अरेस्ट घोटाले में दो बुजुर्ग महिलाओं को बचाया।
छत्रपति संभाजीनगर की 74 वर्षीया महिला से ठगों ने ₹3 करोड़ हड़पे; उसी गिरोह ने नई दिल्ली की महिला से ₹27 लाख ठगे।
जांच में एक 'लेयर-1 म्यूल अकाउंट' मिला, जिससे ₹89 लाख गुजरे; यूको बैंक का ₹14 लाख का आरटीजीएस क्रेडिट दूसरा बड़ा सुराग बना।
महाराष्ट्र साइबर ने दिल्ली पुलिस से समन्वय कर दिल्ली की महिला को और अधिक नुकसान से बचाया।
विभाग ने स्पष्ट किया: कोई सरकारी एजेंसी फोन पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती; संदिग्ध कॉल पर 1930 हेल्पलाइन से संपर्क करें।

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 14 अक्टूबर 2026 को डिजिटल अरेस्ट घोटाले के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो बुजुर्ग महिलाओं को भारी वित्तीय नुकसान से बचाया। छत्रपति संभाजीनगर की एक 74 वर्षीय महिला से जालसाजों ने ₹3 करोड़ की ठगी की, जबकि समानांतर जांच में नई दिल्ली की एक अन्य बुजुर्ग महिला को ₹27 लाख गंवाने के बाद समय रहते बचा लिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

छत्रपति संभाजीनगर में ठगों ने 74 वर्षीया बुजुर्ग महिला को निशाना बनाया। जालसाजों ने स्वयं को पुलिस और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला को 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का भय दिखाया। भय और दबाव में आकर पीड़िता ने ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹3 करोड़ स्थानांतरित कर दिए।

घटना की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी टीम छत्रपति संभाजीनगर पुलिस के साथ मौके पर पहुँची और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू की।

तकनीकी जांच और अहम सुराग

जांच दल ने लेनदेन के रास्तों का लाइव विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में एक 'लेयर-1 म्यूल अकाउंट' की पहचान हुई, जो धोखाधड़ी के धन को आगे स्थानांतरित करने में उपयोग हो रहा था। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से लगभग ₹89 लाख इसी खाते से होकर गुजरे थे।

उसी खाते में यूको बैंक के माध्यम से ₹14 लाख का एक नया आरटीजीएस क्रेडिट भी प्राप्त हुआ था, जो जांचकर्ताओं के लिए दूसरा बड़ा सुराग बना। इसी लेनदेन ने महाराष्ट्र साइबर को संदेह दिलाया कि उसी गिरोह द्वारा किसी और व्यक्ति को भी उसी समय ठगा जा रहा है।

दिल्ली कनेक्शन और त्वरित हस्तक्षेप

साइबर टीम ने तत्काल बैकवर्ड ट्रेसिंग शुरू की और यूको बैंक को नोटिस भेजकर केवाईसी विवरण माँगे। केवाईसी रिकॉर्ड से खुलासा हुआ कि पैसे भेजने वाली महिला नई दिल्ली की निवासी है।

आगे की जांच में पुष्टि हुई कि दिल्ली की यह महिला भी उसी डिजिटल अरेस्ट गिरोह के जाल में थी और अब तक ₹27 लाख ट्रांसफर कर चुकी थी। वह और अधिक धनराशि भेजने की तैयारी में थी। महाराष्ट्र साइबर ने बिना देरी किए दिल्ली पुलिस से संपर्क साधा और समन्वय से महिला की पहचान कर उसे आगे की ठगी से बचा लिया।

आम जनता पर असर और सरकार की अपील

यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट घोटालों में तेज़ी आई है और बुजुर्ग नागरिक विशेष रूप से इनके निशाने पर हैं। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस या सीबीआई फोन पर किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसा कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

गौरतलब है कि यह केस दो राज्यों की साइबर एजेंसियों के बीच समन्वय का एक उल्लेखनीय उदाहरण है, जिसने संभावित रूप से एक बड़े वित्तीय नुकसान को रोका।

क्या होगा आगे

जांच एजेंसियाँ अब उस गिरोह की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में कार्रवाई कर रही हैं जो इन खातों के ज़रिए ठगी का संचालन कर रहा था। म्यूल खातों और लेनदेन की श्रृंखला की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और समय पर हस्तक्षेप से ऐसे मामलों में पीड़ितों को बचाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बहु-स्तरीय और अंतरराज्यीय हैं — महज़ अवसरवादी नहीं। असली सवाल यह है कि म्यूल खाताधारकों की जवाबदेही कहाँ है और बैंकिंग तंत्र इन खातों को कितनी जल्दी फ्लैग करता है — क्योंकि तकनीकी कुशलता के बावजूद, ₹3 करोड़ पहले ही जा चुके थे।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट ठगी क्या होती है?
डिजिटल अरेस्ट ठगी में जालसाज पुलिस, सीबीआई या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो या फोन कॉल के ज़रिए पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का डर दिखाते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। सरकारी एजेंसियाँ इस तरह किसी को गिरफ्तार नहीं करतीं।
महाराष्ट्र साइबर ने दिल्ली की महिला की पहचान कैसे की?
यूको बैंक के एक म्यूल खाते में ₹14 लाख के आरटीजीएस क्रेडिट का सुराग मिलने के बाद साइबर टीम ने बैंक को नोटिस भेजकर केवाईसी विवरण माँगे, जिससे नई दिल्ली की महिला की पहचान हुई। इसके बाद महाराष्ट्र साइबर ने दिल्ली पुलिस से संपर्क कर उसे बचाया।
छत्रपति संभाजीनगर की महिला से कितना पैसा ठगा गया?
छत्रपति संभाजीनगर की 74 वर्षीया महिला से ठगों ने करीब ₹3 करोड़ विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इनमें से ₹89 लाख एक लेयर-1 म्यूल अकाउंट से होकर गुजरे।
डिजिटल अरेस्ट की शिकायत कहाँ करें?
यदि आपको कोई संदिग्ध 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल आए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।
म्यूल अकाउंट क्या होता है और यह ठगी में कैसे काम करता है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। इस मामले में लेयर-1 म्यूल अकाउंट से ₹89 लाख गुजरे, जो जांचकर्ताओं को गिरोह तक पहुँचाने में सहायक बना।
राष्ट्र प्रेस
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