हैदराबाद: 72 वर्षीय महिला से ₹22 लाख की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी, पुलिस ने जारी की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद में नामपल्ली निवासी एक 72 वर्षीय महिला से साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ₹22 लाख की धोखाधड़ी की। जालसाजों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी के झूठे आरोपों से डराया और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर रकम ऐंठी। इस घटना के बाद हैदराबाद पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को नागरिकों के लिए एक व्यापक सार्वजनिक चेतावनी जारी की।
कैसे हुई ठगी
पीड़िता को एक वीडियो कॉल आई जिसमें कॉल करने वाले ने स्वयं को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि महिला के नाम पर पंजीकृत एक पार्सल में अवैध ड्रग्स पाई गई हैं और उनसे जुड़ा एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच में संलिप्त है।
इसके बाद ठग ने एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट प्रस्तुत किया और गिरफ्तारी की धमकी दी। 'जमानत राशि' और 'सुरक्षा जमा' के बहाने पीड़िता को कई बार में अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए विवश किया गया, जिससे उन्हें कुल ₹22 लाख का नुकसान उठाना पड़ा।
डिजिटल अरेस्ट घोटाला — तरीका और हथकंडे
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु ने बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि साइबर अपराधी फोन कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस या वीडियो कॉल के ज़रिये पीड़ितों से संपर्क करते हैं। वे पुलिस, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), सीमा शुल्क या दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) जैसी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं।
ठग नकली पहचान पत्र, जाली नोटिस, आधिकारिक दिखने वाले लेटरहेड और मनगढ़ंत केस दस्तावेज़ों का उपयोग करते हैं। वीडियो कॉल की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वर्दी और नकली पुलिस स्टेशन जैसे बैकग्राउंड का सहारा लिया जाता है। पीड़ित पर मादक पदार्थों की तस्करी, धन शोधन, आतंकवाद वित्तपोषण या पहचान की चोरी जैसे गंभीर झूठे आरोप लगाए जाते हैं।
पुलिस के जागरूकता प्रयास और असर
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, हैदराबाद सिटी ने स्थानीय थानों के समन्वय से घर-घर जाकर अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं। श्रीनिवासुलु के अनुसार इन प्रयासों से डिजिटल अरेस्ट के दर्ज मामलों की संख्या में कमी आई है, फिर भी कुछ मामले अब भी सामने आ रहे हैं।
गौरतलब है कि यह घटना अकेली नहीं है — देशभर में डिजिटल अरेस्ट घोटालों में बुजुर्गों और सेवानिवृत्त नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, जो तकनीकी जटिलताओं से कम परिचित होते हैं।
नागरिकों के लिए ज़रूरी सावधानियाँ
पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी वास्तविक सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल या फोन पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही 'जुर्माना' या 'जमानत राशि' ऑनलाइन जमा करने को कहती है। ऐसी कोई भी कॉल आने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परिजनों को घर के बुजुर्ग सदस्यों को इस तरह के घोटालों के बारे में जागरूक करना चाहिए, क्योंकि ठग मनोवैज्ञानिक दबाव और भय का सहारा लेकर पीड़ित को त्वरित निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं।