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हैदराबाद में डिजिटल अरेस्ट से ₹29 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार; फरार आरोपी क्रिप्टो से धोता था रकम

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हैदराबाद में डिजिटल अरेस्ट से ₹29 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार; फरार आरोपी क्रिप्टो से धोता था रकम

सारांश

हैदराबाद में साइबर ठगों ने एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति को फर्जी सीबीआई-ईडी अधिकारी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और ₹29 लाख से अधिक ऐंठ लिए। ठगी की रकम को USDT क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए धोया गया — यह तरीका भारत में साइबर अपराध का नया और खतरनाक चेहरा है।

मुख्य बातें

हैदराबाद पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹29,17,668 की ठगी में मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन को गिरफ्तार किया।
पीड़ित 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को 3 मार्च 2025 को फर्जी सीबीआई, ईडी और दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर फोन किए गए।
आरोपियों ने पीड़ित पर ₹6.8 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजे।
फरार आरोपी सचिन (बेंगलुरु) ने ठगी की रकम USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर मनी लॉन्ड्रिंग की।
मामला IT अधिनियम धारा 66(सी), 66(डी) और बीएनएस की छह धाराओं के तहत दर्ज; तीसरा आरोपी अभी फरार।

हैदराबाद पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹29,17,668 की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी बताकर पीड़ित को 6.8 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फँसाने की धमकी दी थी।

मुख्य घटनाक्रम

3 मार्च 2025 को पीड़ित के पास अज्ञात नंबरों से फोन आए। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय जाँच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार विवरण और फिंगरप्रिंट का उपयोग एक बड़े वित्तीय अपराध में किया गया है। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज भी पीड़ित को भेजे।

इसके बाद ठगों ने पीड़ित और उनकी बेटी को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर किसी से भी मामला साझा न करने की चेतावनी दी और गिरफ्तारी की धमकी दी। जाँच व सत्यापन के नाम पर रकम वापसी का आश्वासन देकर दोनों को कुल ₹29,17,668 ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद निवासी मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और व्हाट्सऐप के ज़रिए बेंगलुरु निवासी फरार आरोपी सचिन के संपर्क में आए।

योजना के तहत अशफाक ने नजीब से बैंक खातों का विवरण जुटाकर सचिन को सौंपा। ठगी की रकम इन्हीं खातों में स्थानांतरित की गई। इसके बाद अशफाक और नजीब ने चेक के ज़रिए रकम निकाली और कैश डिपॉजिट मशीनों (CDM) के माध्यम से नकदी को अलग-अलग खातों में जमा कराया, ताकि धन के स्रोत तक पहुँचना कठिन हो जाए।

क्रिप्टोकरेंसी से धोया पैसा

पुलिस के अनुसार फरार आरोपी सचिन ने ठगी की रकम का उपयोग USDT (यूएसडीटी) क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में किया और बाद में उसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये प्राप्त किए। यह तरीका साइबर ठगों द्वारा तेज़ी से अपनाया जा रहा है, जिसमें क्रिप्टो लेनदेन की विकेंद्रीकृत प्रकृति का फायदा उठाकर जाँच एजेंसियों को धन के स्रोत तक पहुँचने से रोका जाता है।

कानूनी कार्रवाई

हैदराबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु ने रविवार को जारी बयान में बताया कि पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 111(2)(बी), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया है। तीसरा आरोपी सचिन अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

क्या होगा आगे

यह मामला देश भर में बढ़ती डिजिटल अरेस्ट घटनाओं की कड़ी में एक और चिंताजनक उदाहरण है। गौरतलब है कि साइबर अपराधी अब सरकारी एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी भी कॉल की तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें और बिना सत्यापन के किसी को भी पैसे ट्रांसफर न करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जागरूकता अभियान जमीनी स्तर पर पर्याप्त नहीं पहुँच पाए हैं — विशेषकर उन सेवानिवृत्त नागरिकों तक जो डिजिटल प्रक्रियाओं से कम परिचित हैं।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी फर्जी पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बनकर पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तारी' की धमकी देते हैं और रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। पीड़ित को किसी से बात न करने की हिदायत दी जाती है ताकि वह सत्यापन न कर सके।
हैदराबाद डिजिटल अरेस्ट मामले में कितनी रकम की ठगी हुई?
पीड़ित 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी बेटी से कुल ₹29,17,668 की ठगी हुई। यह रकम 3 मार्च 2025 को हुई कॉल के बाद जाँच व सत्यापन के नाम पर ट्रांसफर करवाई गई।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन्होंने क्या किया?
गिरफ्तार आरोपी हैदराबाद के मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन हैं। इन्होंने ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराए, चेक से रकम निकाली और CDM के ज़रिए अलग-अलग खातों में जमा कराई।
ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी से कैसे जोड़ा गया?
फरार आरोपी सचिन ने ठगी की रकम को USDT (एक स्थिर क्रिप्टोकरेंसी) में बदला और फिर उसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये प्राप्त किए। यह तरीका धन के स्रोत की जाँच को जटिल बनाता है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिए क्या करें?
कोई भी वास्तविक सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल गिरफ्तारी' नहीं करती। ऐसा कोई भी कॉल आने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें और बिना परिवार या पुलिस को बताए कोई भी रकम ट्रांसफर न करें।
राष्ट्र प्रेस
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