हैदराबाद में डिजिटल अरेस्ट से ₹29 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार; फरार आरोपी क्रिप्टो से धोता था रकम
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹29,17,668 की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी बताकर पीड़ित को 6.8 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फँसाने की धमकी दी थी।
मुख्य घटनाक्रम
3 मार्च 2025 को पीड़ित के पास अज्ञात नंबरों से फोन आए। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय जाँच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार विवरण और फिंगरप्रिंट का उपयोग एक बड़े वित्तीय अपराध में किया गया है। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज भी पीड़ित को भेजे।
इसके बाद ठगों ने पीड़ित और उनकी बेटी को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर किसी से भी मामला साझा न करने की चेतावनी दी और गिरफ्तारी की धमकी दी। जाँच व सत्यापन के नाम पर रकम वापसी का आश्वासन देकर दोनों को कुल ₹29,17,668 ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद निवासी मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और व्हाट्सऐप के ज़रिए बेंगलुरु निवासी फरार आरोपी सचिन के संपर्क में आए।
योजना के तहत अशफाक ने नजीब से बैंक खातों का विवरण जुटाकर सचिन को सौंपा। ठगी की रकम इन्हीं खातों में स्थानांतरित की गई। इसके बाद अशफाक और नजीब ने चेक के ज़रिए रकम निकाली और कैश डिपॉजिट मशीनों (CDM) के माध्यम से नकदी को अलग-अलग खातों में जमा कराया, ताकि धन के स्रोत तक पहुँचना कठिन हो जाए।
क्रिप्टोकरेंसी से धोया पैसा
पुलिस के अनुसार फरार आरोपी सचिन ने ठगी की रकम का उपयोग USDT (यूएसडीटी) क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में किया और बाद में उसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये प्राप्त किए। यह तरीका साइबर ठगों द्वारा तेज़ी से अपनाया जा रहा है, जिसमें क्रिप्टो लेनदेन की विकेंद्रीकृत प्रकृति का फायदा उठाकर जाँच एजेंसियों को धन के स्रोत तक पहुँचने से रोका जाता है।
कानूनी कार्रवाई
हैदराबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु ने रविवार को जारी बयान में बताया कि पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 111(2)(बी), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया है। तीसरा आरोपी सचिन अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
क्या होगा आगे
यह मामला देश भर में बढ़ती डिजिटल अरेस्ट घटनाओं की कड़ी में एक और चिंताजनक उदाहरण है। गौरतलब है कि साइबर अपराधी अब सरकारी एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी भी कॉल की तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें और बिना सत्यापन के किसी को भी पैसे ट्रांसफर न करें।