क्या महाराष्ट्र में निर्विरोध 67 पार्षदों के चुनाव पर विवाद है?
सारांश
Key Takeaways
- महाराष्ट्र में 67 पार्षद बिना विरोध चुने गए हैं।
- मनसे ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।
- राजनीतिक दबाव के चलते विपक्षी उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया।
- बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की जांच की मांग की गई है।
- निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
मुंबई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में चल रहे नगर निगम चुनावों में 67 पार्षदों के निर्विरोध चुनने का मुद्दा इस समय काफी चर्चा का विषय बन गया है। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि क्या ये चुनाव वास्तव में निष्पक्ष तरीके से हुए हैं या किसी राजनीतिक दबाव और डराने-धमकाने के चलते विपक्षी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
इस मामले में मनसे के नेता अविनाश जाधव और कांग्रेस पार्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कई जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों को डराने, धमकाने और पैसे बांटने जैसी हरकतों के जरिए अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया।
मनसे का कहना है कि इस तरह चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
कल्याण-डोंबिवली, पिंपरी-चिंचवाड़, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने गए। विपक्ष का आरोप है कि कई जगहों पर दबाव के कारण विपक्षी उम्मीदवारों को नाम वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा। चुनाव आयोग से कोई ठोस राहत न मिलने पर मनसे ने आखिरकार हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया।
याचिका में इलेक्शन कमीशन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं और यह दावा किया गया है कि आयोग पर राज्य सरकार का दबाव है। मनसे ने कोर्ट से मांग की है कि इस मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की जाए और जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन 67 उम्मीदवारों के रिजल्ट घोषित न किए जाएं। साथ ही, पिटीशन में जल्द सुनवाई की भी मांग की गई है ताकि चुनाव में हुई कथित अनियमितताओं का तुरंत निपटारा किया जा सके।