17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महिला आरक्षण बिल पर लिबिया लोबो सरदेसाई की तीखी प्रतिक्रिया: 27 साल का इंतजार और तीन साल की और देरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महिला आरक्षण बिल पर लिबिया लोबो सरदेसाई की तीखी प्रतिक्रिया: 27 साल का इंतजार और तीन साल की और देरी

सारांश

पद्मश्री से सम्मानित लिबिया लोबो सरदेसाई ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बिल सकारात्मक है लेकिन इसे लागू करने में हो रही देरी बेहद असंतोषजनक है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल पर लिबिया लोबो सरदेसाई की चिंता 27 वर्षों में अब भी लागू नहीं हुआ यह बिल महिलाओं की जनसंख्या 50% होने पर भी 33% आरक्षण बिल को चुनावी हथकंडा बताया गया महिलाओं को तुरंत राजनीतिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पद्मश्री सम्मानित 102 वर्षीय गोवा की स्वतंत्रता सेनानी लिबिया लोबो सरदेसाई ने बुधवार को महिला आरक्षण बिल पर अपनी विचार साझा की। उन्होंने कहा कि यह बिल सकारात्मक है, लेकिन अत्यधिक असंतोषजनक और चुनावी रणनीति के रूप में दिखाई देता है।

लिबिया लोबो सरदेसाई ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यह एक अच्छा बिल है और इसकी आवश्यकता है, लेकिन 27 वर्ष बीत चुके हैं और अब भी यह लागू नहीं हो पाया है। अब इसमें तीन और साल लगेंगे। यह आज या कल लागू नहीं होने वाला है।"

उन्होंने आगे कहा, "देश में महिलाओं की जनसंख्या 50 प्रतिशत है, फिर भी उन्हें केवल 33 प्रतिशत आरक्षण पर रोक दिया गया है। आज की महिलाएं काफी सक्षम हो चुकी हैं। वे देश का नेतृत्व कर सकती हैं, लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिया जा रहा। यह बहुत गलत है। इस बिल को तुरंत पारित किया जाना चाहिए था, लेकिन वे इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की बात कर रहे हैं। इतनी देरी क्यों? उन्हें तो पहले से पता है कि महिलाओं की जनसंख्या आधी है।"

बिल को चुनावी स्टंट बताते हुए उन्होंने कहा, "यह महिलाओं के कल्याण के लिए नहीं लाया जा रहा है। यह सिर्फ महिलाओं को लुभाने का चुनावी हथकंडा है। ऐसा लगता है कि इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?"

उन्होंने पूछा कि जब बिल संसद में पेश होगा, तब महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व कब मिलेगा?

उन्होंने कहा, "महिलाओं को प्रतिनिधित्व तो मिलेगा, लेकिन तीन साल बाद। हमने इतना लंबा इंतजार कर लिया है, अब और इंतजार नहीं कर सकते। परिसीमन और जनगणना की शर्त क्यों सिर्फ महिलाओं पर लगाई जा रही है? यह नियम सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधित्व पर क्यों लागू नहीं होता?"

लिबिया लोबो सरदेसाई ने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा, "जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब भाजपा ने इसका विरोध किया था। अब भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस की आलोचना कर रही है। दोनों पार्टियां इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं। अब भाजपा इसे केवल एक चुनावी स्टंट के रूप में इस्तेमाल कर रही है।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को तुरंत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने अपील की कि बिल में और देरी न की जाए और इसे शीघ्र लागू किया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है।
लिबिया लोबो सरदेसाई कौन हैं?
लिबिया लोबो सरदेसाई एक 102 वर्षीय गोवा की स्वतंत्रता सेनानी हैं, जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
महिला आरक्षण बिल में इतनी देरी क्यों हो रही है?
बिल को जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की बात की जा रही है, जिससे इसे लागू करने में देरी हो रही है।
क्या महिलाओं को वास्तव में इस बिल से लाभ होगा?
यदि बिल लागू होता है, तो महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।
राजनीतिक दल इस बिल को लेकर क्या सोचते हैं?
राजनीतिक दलों के बीच इस बिल को लेकर मतभेद हैं, और इसे चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले