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महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में असफल, भाजपा ने लगाया विपक्ष पर 'महिला विरोधी' का आरोप

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महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में असफल, भाजपा ने लगाया विपक्ष पर 'महिला विरोधी' का आरोप

सारांश

लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका, जिसके बाद भाजपा ने विपक्ष पर महिला विरोधी आरोप लगाए। केंद्रीय मंत्री चौहान ने इसे बहनों की आशाओं पर कुठाराघात बताया। जानिए पूरा घटनाक्रम और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का गिरना महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रयासों के लिए बड़ा झटका है।
भाजपा ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे काला दिन बताया।
राजीव चंद्रशेखर ने इसे ऐतिहासिक विश्वासघात कहा।
यह घटना राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाती है।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका। इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। विधेयक के गिरने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने विपक्ष पर तीखा हमला किया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, "17 अप्रैल देश की बहनों और लोकतंत्र के लिए काला दिन है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने एक बार फिर देश की बहनों को धोखा दिया, बेटियों को ठग लिया। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने विपक्ष की हर आशंका को निर्मूल साबित कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि किसी राज्य के साथ कोई अन्याय और नुकसान नहीं होगा। लेकिन महिला विरोधी विपक्ष ने इसे नहीं माना।"

उन्होंने कहा कि आज केवल एक विधेयक नहीं गिरा, बल्कि आज बहनों की आशाओं पर कुठाराघात हुआ। महिला विरोधी कांग्रेस और इंडी ब्लॉक ने बहनों के सशक्तीकरण के प्रयास को कुचल दिया। बहनों के सपनों को तोड़ दिया गया और उनकी संभावनाओं को समाप्त किया गया।

उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस और इंडी ब्लॉक की सोच है - 'नारी तू केवल अबला है'। आजादी के अमृतकाल में, जब विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की अपार क्षमता का उपयोग होना चाहिए था, तब विपक्ष ने उसी शक्ति को मसलकर समाप्त करने का पाप किया है। इस विधेयक को गिराकर कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने अपने ताबूत में अंतिम कील ठोकी है। अब बहनें सड़कों पर निकलेंगी और कांग्रेस की भविष्य की संभावनाओं को कुचलकर समाप्त कर देंगी।"

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पोस्ट में लिखा, "कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने अपना असली रंग दिखा दिया है। कांग्रेस महिला सशक्तिकरण का विरोध करती है।"

गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा, "भारत के लिए एक काला दिन। महिला आरक्षण बिल को राहुल गांधी और उनके कांग्रेस गुट ने हरा दिया, जिससे महिला सशक्तिकरण पर उनका पाखंड सबके सामने आ गया। उन्होंने 'नारी शक्ति' को वह सम्मान और प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया, जिसकी वह हकदार हैं और इस तरह लाखों भारतीय महिलाओं का अपमान किया।"

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर बोलने के बजाय, राहुल गांधी इधर-उधर की बेतुकी कहानियों में भटक गए, ठीक वैसे ही जैसे कोई छात्र परीक्षा की कॉपी में कुछ भी लिख देता है, क्योंकि उसके पास असल में कोई जवाब नहीं होता। जब देश को स्पष्ट सोच की उम्मीद थी, तो उन्होंने सिर्फ भ्रम पैदा किया।

शेखावत ने आगे कहा, "पूरा भारत यह सब देख रहा है। देश की महिलाएं भी यह सब देख रही हैं। राहुल गांधी की इस बचकानी राजनीति की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और हो सकता है कि कांग्रेस महिलाओं का भरोसा फिर कभी न जीत पाए।"

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने लिखा, "महिलाओं का अपमान, इंडी गठबंधन की पहचान। कांग्रेस और उसके साथी दलों ने सालों तक नारी सशक्तिकरण को केवल नारे और भाषण तक सीमित रखा। जब महिलाओं को सच में अधिकार देने का समय आया, तो वही लोग विरोध में खड़े हो गए, यही इनकी राजनीति की सच्चाई है। यह विरोध केवल एक कानून का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के हक और सम्मान के खिलाफ है।"

केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, "कांग्रेस, सीपीएम और उनके इंडी सहयोगियों ने हमारे देश की महिलाओं के साथ एक ऐतिहासिक विश्वासघात किया है। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ वोट करके, उन्होंने हमारी बात साबित कर दी है: परिसीमन को लेकर उनका डर फैलाना, महिलाओं को विधायिकाओं में उनका 33% राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से रोकने का बस एक घटिया बहाना था। केरल और भारत की महिलाएं यह सब देख रही हैं, और वे इस बेहद असुरक्षित, महिला-विरोधी गठबंधन को कभी माफ नहीं करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दिखाया है कि महिलाएं सशक्तिकरण की दिशा में किस तरह की बाधाओं का सामना कर रही हैं। विपक्ष की भूमिका और भाजपा की प्रतिक्रिया पर विचार करना महत्वपूर्ण है। यह मुद्दा केवल एक विधेयक से अधिक है; यह देश की महिलाओं की स्थिति और अधिकारों से जुड़ा है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक एक प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में 33% प्रतिनिधित्व देना है।
इस विधेयक का गिरना क्यों महत्वपूर्ण है?
इस विधेयक का गिरना महिलाओं की सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा झटका है और इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा का विपक्ष पर आरोप क्या है?
भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं और उन्हें 'महिला विरोधी' कहा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का क्या कहना है?
शिवराज सिंह चौहान ने इसे देश की बहनों के लिए एक काला दिन बताया और विपक्ष को धोखेबाज कहा।
क्या कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन किया है?
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन किया है।
राष्ट्र प्रेस
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