महिला आरक्षण बिल: महिलाओं को मिलेगा उनका हक, एनडीए का दावा
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
- सरकार इस बिल को शीघ्र लागू करने के लिए सक्रिय है।
- विपक्ष की अनुपस्थिति ने चर्चा को प्रभावित किया है।
- महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में वृद्धि की जाएगी।
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
नई दिल्ली, ३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल पर चर्चा एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में गर्माहट ला रही है। केंद्र सरकार इस बिल को शीघ्र लागू करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसी बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं।
दिल्ली में भाजपा सांसद योगेंद्र चांदोलिया ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ प्रतिबद्धता है। इस वादे को पूरा करने के लिए भाजपा संसद के वर्तमान सत्र में भी प्रयास कर रही है, लेकिन विपक्ष के सहयोग न मिलने के कारण चर्चा अब १६, १७ और १८ अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं को उनका हक अवश्य मिलेगा और केंद्र सरकार अपने वादे को पूरा करेगी।
पटना में जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि १६ से १८ अप्रैल तक का यह विशेष सत्र केवल महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए समर्पित होगा। केंद्र सरकार चाहती है कि महिलाओं को आरक्षण का लाभ बिना किसी देरी के मिले। उन्होंने यह भी बताया कि इस बिल को संसद में लाकर २०२९ के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य है।
इसी मुद्दे पर भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ३० सालों तक महिला आरक्षण बिल को पास नहीं कर पाई, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे मात्र दो दिनों में मंजूरी दे दी। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
संजय सरावगी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हर विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं की मज़बूत उपस्थिति हो और वे कानून बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।