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खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के दो वांटेड सदस्य मलेशिया से डिपोर्ट, पंजाब पुलिस ने IGI एयरपोर्ट पर दबोचा

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खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के दो वांटेड सदस्य मलेशिया से डिपोर्ट, पंजाब पुलिस ने IGI एयरपोर्ट पर दबोचा

सारांश

पंजाब पुलिस ने मलेशिया से KZF के दो वांटेड सदस्यों को डिपोर्ट कराकर IGI एयरपोर्ट पर दबोचा। गुरविंदर सिंह और मंजीत सिंह पर पंजाब के रेलवे फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाने वाले आतंकी मॉड्यूल को ऑफशोर खातों से फंड पहुँचाने का आरोप है।

मुख्य बातें

पंजाब पुलिस ने 19 जून 2026 को खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के दो वांटेड सदस्यों को मलेशिया से डिपोर्ट कराकर IGI एयरपोर्ट, नई दिल्ली पर गिरफ्तार किया।
आरोपियों की पहचान अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह के रूप में हुई।
दोनों पर ऑफशोर खातों के जरिए पंजाब में KZF ऑपरेटिव्स को फंड पहुँचाने का आरोप है।
यह मॉड्यूल 23 जनवरी को सिरहिंद और 27 अप्रैल को शंभू के पास डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर हमलों से जुड़ा है।
पहले की जांच में RPG लॉन्चर, RDX, IED और हैंड ग्रेनेड सहित भारी हथियार बरामद हुए थे।
दोनों आरोपियों को पटियाला अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी में भेजा गया।

पंजाब पुलिस ने 19 जून 2026 को एक बड़ी खुफिया-आधारित कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के दो वांटेड सदस्यों को मलेशिया से डिपोर्ट कराकर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया। यह सफलता केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस (RMP) के समन्वय से हासिल की गई। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की।

आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि

DGP के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह के रूप में हुई है। ये दोनों मलेशिया में सक्रिय KZF-समर्थित आतंकी मॉड्यूल के अहम सदस्य बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सहित रेलवे के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने की साजिश में शामिल था।

रेलवे पर हमलों से जुड़ा मॉड्यूल

पंजाब पुलिस पहले उस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश कर चुकी है जो 23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब जिले के सिरहिंद के निकट रेलवे फ्रेट कॉरिडोर पर हुए IED ब्लास्ट और 27 अप्रैल को पटियाला जिले के शंभू के पास उसी कॉरिडोर पर विस्फोट की कोशिश के लिए जिम्मेदार था। उस जांच में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और भारी मात्रा में हथियार व विस्फोटक बरामद किए गए थे — जिनमें RPG लॉन्चर, IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और हाई-एंड पिस्तौलें शामिल थीं।

अंतरराष्ट्रीय फंडिंग नेटवर्क का खुलासा

आगे की जांच में मलेशिया से संचालित KZF हैंडलर्स और फंडिंग ऑपरेटरों की भूमिका उजागर हुई। डिपोर्ट किए गए दोनों आरोपी ऑफशोर खातों के जरिए पंजाब में KZF ऑपरेटिव्स तक धन पहुँचाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इस फंडिंग का उद्देश्य राज्य में आतंकी हमलों को अंजाम देना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ना था।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच

DGP ने बताया कि दोनों आरोपियों को पटियाला की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। इस व्यापक नेटवर्क में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है। DGP ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस आतंकवादी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने, फंडिंग के स्रोत बंद करने और राज्य में शांति व सद्भाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

क्या होगा आगे

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब भारत और मलेशिया के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर संयुक्त प्रयास तेज हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन से KZF के विदेश में बैठे हैंडलर्स को एक स्पष्ट संदेश गया है। जांच एजेंसियाँ अब इस फंडिंग चेन के अन्य सिरों तक पहुँचने की कोशिश में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक ढाँचे की परत उघाड़ती है जिसमें विदेशी धरती से भारत के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा रहा है। रेलवे फ्रेट कॉरिडोर जैसे आर्थिक रूप से संवेदनशील लक्ष्यों पर हमले की कोशिश यह बताती है कि आतंकी रणनीति अब केवल जनहानि तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की दिशा में भी मुड़ रही है। मलेशिया के साथ सुरक्षा सहयोग का यह सफल उदाहरण उत्साहजनक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ऑफशोर फंडिंग चेन को कितनी गहराई तक तोड़ा जा सकता है — क्योंकि हैंडलर्स बदलते हैं, नेटवर्क नहीं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) क्या है?
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित एक आतंकवादी संगठन है जो खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा है। यह संगठन पंजाब में हिंसक गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क संचालित करने के आरोपों में रहा है।
मलेशिया से डिपोर्ट किए गए दोनों आरोपी कौन हैं?
डिपोर्ट किए गए आरोपियों की पहचान अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह के रूप में हुई है। दोनों पर मलेशिया से ऑफशोर खातों के जरिए पंजाब में KZF ऑपरेटिव्स को फंड पहुँचाने का आरोप है।
पंजाब के फ्रेट कॉरिडोर पर कब-कब हमले हुए?
23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब जिले के सिरहिंद के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर पर IED ब्लास्ट हुआ था। इसके बाद 27 अप्रैल को पटियाला जिले के शंभू के पास उसी कॉरिडोर पर विस्फोट की कोशिश की गई थी।
इस ऑपरेशन में कौन-सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस ऑपरेशन में पंजाब पुलिस, भारतीय केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ और रॉयल मलेशिया पुलिस (RMP) ने मिलकर काम किया। तीनों के समन्वय से दोनों आरोपियों को मलेशिया से डिपोर्ट कराया जा सका।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी?
दोनों आरोपियों को पटियाला की अदालत में पेश किया गया है और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। जांच एजेंसियाँ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान और फंडिंग के स्रोत बंद करने के लिए जांच जारी रखे हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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