ममता बनर्जी के मांस पर प्रतिबंध के दावों को हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया भ्रामक
सारांश
Key Takeaways
- हिमंता बिस्वा सरमा का बयान ममता बनर्जी के दावों का खंडन करता है।
- भाजपा शासित राज्यों में मांस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
- सरमा ने कहा कि ममता का असली डर गो मांस को लेकर है।
- ममता बनर्जी द्वारा फैलाए गए भ्रम को उजागर किया गया है।
कोलकाता, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका असली डर यह है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्य में गो मांस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी लगातार यह दावा कर रही हैं कि भाजपा के आने से 'मछली-मांस' पर रोक लग जाएगी, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि 'ममता बनर्जी चिकन, मटन या मछली के लिए चिंतित नहीं हैं, उनका असली भय गो मांस को लेकर है।'
उन्होंने आगे कहा, "मैं ममता बनर्जी को बताना चाहता हूं कि सच में पश्चिम बंगाल में गो मांस पर रोक लग सकती है। इसलिए लोगों को समझना चाहिए कि वह जिस 'मांस' की बात कर रही हैं, वह सामान्य मांस नहीं, बल्कि गो मांस है।"
सीएम सरमा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां लोग मांसाहार करते हैं और किसी प्रकार की पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा की सरकार है, फिर भी लोग मांस खाते हैं। इसी प्रकार बिहार में भी भाजपा की सरकार है और वहां भी लोग मांसाहार करते हैं। ऐसे में यह कहना कि भाजपा आने पर लोग मांस नहीं खा सकेंगे, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही हैं और लोगों को गुमराह कर रही हैं। सीएम सरमा ने कहा कि बार-बार 'मांस बंद होने' का जिक्र कर एक भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तव में उनका इशारा गो मांस की ओर है।
सीएम सरमा ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को एक तरह से 'धंधा' बना लिया गया है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।