क्या इटावा की मंत्रवती शाक्य ने गांव में ‘लखपति दीदी’ की सफलता की कहानी लिखी?
सारांश
Key Takeaways
- ग्रामीण महिलाएं नवाचार और मेहनत से सफल हो सकती हैं।
- स्वयं सहायता समूहों का गठन आय के नए द्वार खोलता है।
- प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
- सरकारी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक होती हैं।
- कृषि में विविधता लाना आय में स्थिरता प्रदान करता है।
लखनऊ, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के इटावा के भतोरा गांव की निवासिनी मंत्रवती शाक्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण महिलाएं भी नवाचार, मेहनत और सही मार्गदर्शन के माध्यम से सफल उद्यमी बन सकती हैं। सीमित संसाधनों की चुनौतियों को पार करते हुए, मंत्रवती ने स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट और रागी की उन्नत खेती से प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रुपए की स्थायी आय प्राप्त की है।
योगी सरकार की रूरल डेवलपमेंट की विशेष योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को जोड़कर आजीविका संवर्धन का जो अभियान चलाया जा रहा है, उसमें मंत्रवती एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभरी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ने के बाद, उन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़कर लाभकारी और बाजार की मांग वाली फसलों को अपनाया।
आठवीं कक्षा तक शिक्षित मंत्रवती ने कोरोना काल जैसे कठिन समय में भविष्य की स्थायी नींव रखी। वर्तमान में, वह एक बीघा में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं, जिसकी फसल अक्टूबर से मार्च तक तैयार होती है। इसके अतिरिक्त, वह तीन बीघा में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रही हैं, जिसमें एक बार का निवेश करीब 20 वर्षों तक आय का स्रोत बनता है।
रागी जैसी मोटे अनाज की खेती ने भी उनकी आय में स्थिरता प्रदान की है, जो पाँच से छह माह में तैयार होती है। मंत्रवती की उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है; वह जिले के विभिन्न ब्लॉकों की 50 से अधिक महिलाओं को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनका मानना है कि 12 से 15 महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाकर संगठित प्रयास किए जाएं तो आय के नए द्वार खुलते हैं। ब्लॉक स्तर पर तैनात एनआरएलएम की समूह सखियां महिलाओं को खाता खुलवाने, योजनाओं से जोड़ने और आवश्यक प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। इसके लिए केवल आधार कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो की आवश्यकता होती है।
मंत्रवती शाक्य को उनकी उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो बार सम्मानित कर चुके हैं। अब यह उनके लिए गर्व का क्षण है कि आगामी गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में वह विशेष अतिथि के रूप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में 30 लाख स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य है, जिसे आने वाले वर्षों में बढ़ाकर एक करोड़ ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन को मिशन के रूप में अपनाते हुए ऐसी महिलाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है जो स्वयं आत्मनिर्भर बनें और अन्य महिलाओं को भी सशक्त करें। इसके तहत तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और उत्पाद निर्माण से लेकर पैकेजिंग तक की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।