सेंसेक्स 238 अंक उछला, 76,741 पर बंद; निफ्टी 24,000 के करीब, निवेशकों को ₹5 लाख करोड़ का फायदा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 9 जुलाई को पिछले सत्र की तीखी गिरावट से पलटकर 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 भी 80.75 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 23,962.80 पर बंद हुआ — 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से मामूली नीचे। इस एकल सत्र में निवेशकों की संपत्ति में ₹5 लाख करोड़ से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
कारोबारी सत्र का ब्यौरा
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,503.60 से 76,576.14 पर खुला और इंट्राडे कारोबार में 823.04 अंक यानी 1.07 प्रतिशत की उछाल के साथ 77,326.65 के दिन के उच्चतम स्तर को छुआ। निफ्टी50 ने भी 23,928.95 से शुरुआत की और दिन में 24,134.70 तक पहुँचा — इंट्राडे में 252.65 अंक यानी 1.05 प्रतिशत की बढ़त।
बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही। BSE पर कुल 2,793 शेयरों में तेजी, 1,263 शेयरों में गिरावट और 167 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। व्यापक बाजारों में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.38 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.80 प्रतिशत चढ़ा।
सेक्टर प्रदर्शन: रियल्टी सबसे आगे, IT पिछड़ा
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी रियल्टी 3.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा। इसके बाद निफ्टी मीडिया (2 प्रतिशत), निफ्टी PSU बैंक (1.6 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.6 प्रतिशत) का स्थान रहा।
दूसरी ओर, निफ्टी IT में 0.47 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई — वैश्विक तकनीकी क्षेत्र पर दबाव और वाहन बिक्री की चिंताओं के बीच।
टॉप गेनर और लूज़र
निफ्टी50 में सन फार्मा 2.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बड़ा लाभार्थी रहा। भारती एयरटेल (2.4 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (2.3 प्रतिशत), इंडिगो (2 प्रतिशत), इटरनल (2 प्रतिशत), ग्रासिम और कोटक महिंद्रा बैंक (दोनों 1.9 प्रतिशत) भी अच्छी बढ़त में रहे।
हालाँकि, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज 5.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। मारुति सुजुकी (-1.7 प्रतिशत), ONGC (-1.4 प्रतिशत), इंफोसिस (-1.3 प्रतिशत), NTPC (-1.2 प्रतिशत) और हिंडाल्को (-1 प्रतिशत) भी दबाव में रहे।
IMF रिपोर्ट और रुपये की स्थिति
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सत्र की रिकवरी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताज़ा रिपोर्ट से भी बल मिला। IMF ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। हालाँकि IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान मामूली रूप से 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत किया, वहीं वित्त वर्ष 2028 के लिए इसे 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया। IMF ने यह भी कहा कि हाल के आर्थिक आंकड़े अपेक्षा से बेहतर रहे हैं और हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं।
मुद्रा बाजार में, भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 17 पैसे मजबूत होकर ₹85.38 पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह ₹85.55 पर था। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹471.2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹476.4 लाख करोड़ हो गया।
आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है और अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर चिंताएँ कायम हैं। गौरतलब है कि निफ्टी का 24,000 का स्तर तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है — इसे पार करने पर अगली रैली की दिशा तय होगी। IMF के मध्यम अवधि के सकारात्मक अनुमान और घरेलू माँग की मजबूती को देखते हुए विश्लेषकों की नजर अगले सत्र के वैश्विक संकेतों पर टिकी है।