मासूम शर्मा का करनाल में पाखंड पर वार: 'डेरों की आड़ में भोले लोगों को ठगने की दुकानें चल रहीं'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणवी लोकगायक मासूम शर्मा ने 23 सितंबर 2026 को करनाल में आयोजित आर्य समाज सम्मेलन में शिरकत करते हुए धार्मिक पाखंड और फर्जी बाबाओं के खिलाफ तीखी आवाज़ उठाई। आर्य सभा केंद्र, करनाल में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया और उन्होंने समाज, खासकर युवाओं, से पाखंडवाद-विरोधी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
मुख्य बयान और आरोप
मासूम शर्मा ने कहा कि भोले-भाले लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं और नए-नए डेरों के नाम पर 'दुकानें' खोली जा रही हैं। उनके अनुसार लोगों से यह कहा जाता है कि किसी व्यक्ति को ईश्वर का दर्जा दे दें और अपने माता-पिता तक को पीछे छोड़ दें। उन्होंने इस प्रवृत्ति को समाज के लिए गंभीर खतरा बताया।
उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर पाखंडियों के होर्डिंग और पोस्टर लगाए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। शर्मा के अनुसार ये होर्डिंग-बोर्ड करदाताओं की कमाई से लगाए जाते हैं, और उन्होंने प्रशासन से इस पर संज्ञान लेने की माँग की।
आर्य समाज की विरासत और वर्तमान भूमिका
शर्मा ने कहा कि आर्य समाज और ऋषि दयानंद सरस्वती ने अपनी स्थापना के समय से ही पाखंड और कुप्रथाओं का विरोध करते हुए समाज को जागरूक करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान आज भी ज़रूरी है और सभी युवाओं की ज़िम्मेदारी है कि वे इस मुहिम में अपना योगदान दें।
गौरतलब है कि आर्य समाज दशकों से सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाता रहा है। यह कार्यक्रम उसी परंपरा की कड़ी में आयोजित किया गया था, जिसमें मासूम शर्मा जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्व को मंच दिया गया।
युवाओं से सीधी अपील
मासूम शर्मा ने युवाओं से आग्रह किया कि वे किताबें बाँटें और जहाँ भी पाखंड दिखे, वहाँ मुखर होकर विरोध करें। उन्होंने कहा कि पाखंडवाद के विरुद्ध केवल विरोध नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान भी तेज़ होना चाहिए और समाज को एकजुट होकर इस लड़ाई में उतरना चाहिए।
राजनीति में आने पर स्पष्ट इनकार
कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल पर मासूम शर्मा ने साफ कहा कि फिलहाल राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजसेवा राजनीति में रहकर भी हो सकती है और बाहर रहकर भी, लेकिन राजनीति में आने के बाद अपने विचारों को उस खुलेपन के साथ नहीं रखा जा सकता, जो एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में संभव होता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई कलाकारों के राजनीतिक झुकाव पर चर्चा होती रहती है।
आगे की राह
कार्यक्रम में यह तय किया गया कि पाखंड-विरोधी अभियान को और अधिक संगठित रूप दिया जाएगा। प्रशासन से होर्डिंग हटाने की माँग को लेकर भी एक बैठक हुई है। मासूम शर्मा की यह अपील हरियाणा के युवाओं में कितनी पैठ बनाती है, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।