बस्तर में PM मोदी का बड़ा बयान: 'दिमागी नक्सलियों ने राजनीतिक दलों और संगठनों में की घुसपैठ'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ संवाद के दौरान कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सली भले ही समाप्त हो चुके हों, लेकिन अब एक नई और अदृश्य चुनौती सामने खड़ी है। उन्होंने कहा कि 'दिमागी नक्सलियों' ने देश के कई राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों में घुसपैठ कर ली है, और वे आज भी लोगों को संविधान तथा लोकतंत्र के विरुद्ध भड़काने का काम कर रहे हैं।
नई चुनौती: 'दिमागी नक्सलवाद'
मोदी ने स्पष्ट किया कि अब देश की प्राथमिकता ऐसे तत्वों की पहचान करना, उन्हें उजागर करना और देश को सुरक्षित रखना है। उनके अनुसार, 'दिमागी नक्सली' वे लोग हैं जो विचारधारा के स्तर पर जनता को भड़काकर संवैधानिक व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा और विकास नीतियों की सफलता का दावा कर रही है। आलोचकों का कहना है कि 'दिमागी नक्सली' जैसी शब्दावली राजनीतिक असहमति को कुचलने के लिए इस्तेमाल हो सकती है — हालाँकि सरकार इससे इनकार करती है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का इतिहास
प्रधानमंत्री ने बताया कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित देश का बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था। करोड़ों लोगों का जीवन इससे बुरी तरह प्रभावित था — कई इलाकों में शाम होते ही जनजीवन ठप हो जाता था और मतदान करने का अधिकार तक खतरे में पड़ जाता था।
उन्होंने वर्ष 2010 की दंतेवाड़ा घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस साल नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे और उसी जिले में एक अन्य हमले में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई थी।
सुरक्षाबलों के बलिदान और सरकार का दावा
मोदी ने कहा कि 2004 से 2013 के बीच हर साल नक्सलियों के हाथों शहीद होने वाले जवानों की संख्या मारे गए नक्सलियों से अधिक थी। अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गँवाई। आईईडी विस्फोटों में कई जवानों को अपने अंग तक गँवाने पड़े।
उन्होंने तत्कालीन नेतृत्व पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि जब यह धरती वीरों के रक्त से भीग रही थी, तब 'महलों में रहने वाले नामदारों' की ओर से न कोई संवेदना दिखाई दी, न आँखों से आँसू निकले। गौरतलब है कि यह टिप्पणी कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा कटाक्ष मानी जा रही है।
आँकड़ों में बदलाव: 47 साल में पहली बार
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले एक साल में 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान नक्सल हिंसा में शहीद नहीं हुआ। उन्होंने इसे देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत बताया।
विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। उनके अनुसार, इस सफलता का एक बड़ा आधार नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ देश की लड़ाई भी है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास
प्रधानमंत्री ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में 1,500 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई गईं और 9,500 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए करीब 200 एकलव्य स्कूल खोले गए तथा युवाओं के लिए 50 आईटीआई और 50 कौशल विकास केंद्र शुरू किए गए।
इसके अलावा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से हजारों दूरदराज के गाँवों तक पहली बार पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई गईं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए भी विशेष योजनाएँ बनाई गईं। आने वाले समय में सरकार का जोर इन क्षेत्रों में आर्थिक एकीकरण को और गहरा करने पर रहेगा।