मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के फर्जी हस्ताक्षर से 4 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले दो ठगों की गिरफ्तारी

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मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के फर्जी हस्ताक्षर से 4 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले दो ठगों की गिरफ्तारी

सारांश

मुंबई पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के हस्ताक्षर वाले फर्जी पत्र से 4 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले दो ठगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला वंचित बच्चों के लिए काम करने वाले एक एनजीओ से जुड़ा है। जानें पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी के नाम से फर्जी पत्र का उपयोग।
  • चार लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप।
  • गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच की।
  • शिकायतकर्ता एक एनजीओ की संचालिका हैं।
  • आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज।

मुंबई, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाले एक फर्जी पत्र के माध्यम से 4 लाख रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में तौसीफ हुसैन इस्माइल पटेल (44) और सिद्धिनाथ दीनानाथ पांडे उर्फ ​​सुनील (43) शामिल हैं। दोनों आरोपी गोरेगांव (पश्चिम) के निवासी हैं।

शिकायत के अनुसार, पीड़िता एक गैर सरकारी संगठन “मेगा श्रेया” की संचालिका हैं, जो 2020 से वंचित बच्चों, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों के लिए सामाजिक कार्य कर रही है।

शिकायतकर्ता की मुलाकात तौसीफ पटेल और उसके सहयोगी फरनाज वाडिया से 2022 में एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई थी। दोनों ने खुद को पत्रकार बताया और व्हाट्सएप पर संपर्क में रहे। 18 मार्च को पटेल ने एक वॉयस नोट भेजा, जिसमें कहा गया कि पैसे के बदले प्रधानमंत्री कार्यालय से जन्मदिन की बधाई का पत्र भेजा जाएगा। शिकायतकर्ता ने इसे फर्जी मानकर खारिज कर दिया, लेकिन आरोपियों ने पत्र को असली बताते हुए 4 लाख रुपये की मांग की।

इसके बाद, 28 मार्च को फरनाज वाडिया ने प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाला एक पत्र की डिजिटल प्रति भेजी, जो शिकायतकर्ता को संबोधित थी और उसके सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करती थी।

शिकायतकर्ता ने पत्र को पहले सोशल मीडिया पर साझा किया, लेकिन सहकर्मियों के संदेह के बाद इसे हटा लिया। आरोपी ने अपनी मांगों को बढ़ाते हुए शिकायतकर्ता के नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई।

शिकायतकर्ता ने आरोपियों को वर्ली के एक कैफे में बुलाया, जहां उन्होंने दावा किया कि उनके पास प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क हैं और एक असली पत्र के बदले में 4 लाख रुपये की मांग दोहराई।

लगातार दबाव और धमकियों के कारण शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया। कार्रवाई करते हुए, एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने वर्ली सी फेस पर एक होटल में जाल बिछाया, जहां आरोपियों को पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

पुलिस ने आरोपियों से एक फर्जी जन्मदिन का बधाई पत्र, नकली नोटों का एक बंडल, दो असली 500 रुपये के नोट और अपराध में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद किए।

इसके बाद आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आईटी अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में एफआईआर वर्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी और बाद में जांच के लिए एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच की और वर्ली इलाके में जाल बिछाया, जहां आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया।

पुलिस को अन्य आरोपियों की संलिप्तता का संदेह है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के जाली हस्ताक्षर और लेटरहेड के स्रोत, फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए डिजिटल उपकरणों की भी जांच की जा रही है।

Point of View

बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता की कमी को भी दर्शाता है। जब एक एनजीओ जो वंचित बच्चों के उत्थान के लिए काम कर रहा है, ऐसे ठगी का शिकार होता है, तो यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि समस्त समाज के लिए चिंता का विषय है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या आरोपियों ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का गलत इस्तेमाल किया है?
हाँ, आरोपियों ने प्रधानमंत्री मोदी के हस्ताक्षर वाले फर्जी पत्र का इस्तेमाल किया है।
आरोपी कौन हैं?
आरोपी तौसीफ हुसैन इस्माइल पटेल और सिद्धिनाथ दीनानाथ पांडे हैं।
क्या शिकायतकर्ता एक एनजीओ चलाती हैं?
जी हाँ, शिकायतकर्ता एक एनजीओ 'मेगा श्रेया' की संचालिका हैं।
किस तारीख को आरोपियों को गिरफ्तार किया गया?
आरोपियों को 6 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया।
क्या पुलिस ने आरोपियों से कुछ बरामद किया?
हाँ, पुलिस ने आरोपियों से फर्जी पत्र, नकली नोट और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
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