क्या मुंबई में कारोबारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर बेचा गया फ्लैट?

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क्या मुंबई में कारोबारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर बेचा गया फ्लैट?

सारांश

मुंबई में एक गंभीर रियल एस्टेट घोटाले का खुलासा हुआ है। गिरगांव निवासी व्यवसायी अल्पेश जैन के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए फ्लैट की बिक्री की गई। इस धोखाधड़ी में शामिल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जानें इस मामले के सभी पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • मुंबई में एक बड़ा रियल एस्टेट घोटाला हुआ।
  • अल्पेश जैन के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए गए।
  • आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
  • धोखाधड़ी के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल हुआ।
  • दस्तावेजों की जांच में फर्जी हस्ताक्षर पाए गए।

मुंबई, 12 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई में एक गंभीर रियल एस्टेट घोटाला का खुलासा हुआ है, जिसमें गिरगांव के स्टील ट्रेडिंग व्यवसायी अल्पेश नरपतचंद जैन (44) के नाम पर अज्ञात लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके उनके फ्लैट की बिक्री कर दी। इस मामले में आठ व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ठगों ने उसी फ्लैट को बैंक में गिरवी रखकर 11.35 करोड़ रुपए का कर्ज भी ले लिया था। मामले की शिकायत के बाद बांद्रा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, अल्पेश जैन 2016 से गिरगांव में अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं। मई 2023 में उन्होंने बांद्रा पश्चिम स्थित ‘आयकॉनीक टॉवर’ में 6.25 करोड़ रुपए में एक फ्लैट खरीदा था और वे सोसायटी के सचिव भी हैं। सोसायटी द्वारा सभी फ्लैट्स के दस्तावेजों की जांच के दौरान यह पता चला कि उनके फ्लैट का एक फर्जी विक्रय दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर 13 दिसंबर 2024 को पंजीकृत किया गया है।

फर्जी दस्तावेज में ठगों ने खुद को अल्पेश जैन बताते हुए फ्लैट संदीप बाबूलाल गडा को बेच दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि इस धोखाधड़ी के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया गया, जिसे 11 दिसंबर 2024 को सह उपनिबंधक कार्यालय में दर्ज कराया गया था। इसमें राहुल कुमार माहेरिया को पावर ऑफ अटॉर्नी धारक दर्शाया गया था। रजिस्ट्रेशन की तारीख पर असली अल्पेश जैन विदेश (इंडोनेशिया) में थे, जिससे साबित होता है कि पूरी प्रक्रिया जाली कागजों से की गई।

संदीप गडा, जो एमएस वन एक्सट्रूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं, ने यह फ्लैट उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, नवी मुंबई में गिरवी रखकर 11.35 करोड़ रुपए का कर्ज प्राप्त किया। इस ऋण में नैना संदीप गडा और जयनाम चेतन चावडा व्यक्तिगत जमानतदार बताए गए हैं।

दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अल्पेश जैन का नाम, पैन और आधार नंबर सही हैं, लेकिन फोटो और हस्ताक्षर फर्जी हैं। ठगों ने असली दस्तावेजों की हूबहू नकली प्रतियां बनाकर यह ठगी की।

पीड़ित जैन ने फर्जी अल्पेश जैन, राहुल कुमार माहेरिया, संदीप गडा, नैना गडा और जयनाम चावडा समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाती है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में सुरक्षा के उपायों की आवश्यकता है। समाज को इस प्रकार के धोखाधड़ी से सतर्क रहना चाहिए।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

फर्जी दस्तावेज कैसे बनते हैं?
फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए अपराधी असली दस्तावेजों की नकल करते हैं और उनका गलत इस्तेमाल करते हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या प्रक्रिया होती है?
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच शुरू करती है और सबूत इकट्ठा करती है।
रियल एस्टेट में धोखाधड़ी से कैसे बचें?
रियल एस्टेट में निवेश करने से पहले सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह से जांच करें और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
कितने लोग इस मामले में शामिल हैं?
इस मामले में कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
क्या अल्पेश जैन को नुकसान हुआ है?
जी हां, अल्पेश जैन को इस धोखाधड़ी के कारण आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का नुकसान हुआ है।
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