राजस्थान का अद्भुत करणी माता मंदिर: जहां चूहों का प्राशाद है सबसे पवित्र

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राजस्थान का अद्भुत करणी माता मंदिर: जहां चूहों का प्राशाद है सबसे पवित्र

सारांश

बीकानेर के करणी माता मंदिर में चूहों का जूठा प्रसाद सबसे पवित्र माना जाता है। यहां का अनोखा अनुभव और श्रद्धा भक्तों को आकर्षित करती है। जानिए इस मंदिर की खासियत और मान्यताएं।

Key Takeaways

  • करणी माता मंदिर चूहों का जूठा प्रसाद पवित्र मानता है।
  • यह स्थान बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर है।
  • यहां लगभग 25 हजार चूहे रहते हैं।
  • सफेद चूहा शुभ प्रतीक माना जाता है।
  • मंदिर का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने किया था।

बीकानेर, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान अपनी शानदार संस्कृति, किलों और मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है जो अपनी अद्वितीय परंपरा के चलते लोगों को चौंका देता है। यह है बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित करणी माता मंदिर, जिसे स्थानीय लोग 'चूहों वाला मंदिर' के नाम से जानते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां हजारों चूहे स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और इन्हीं चूहों का जूठा प्रसाद सबसे पवित्र माना जाता है।

मंदिर में प्रवेश करते ही आपको एक अनोखी दुनिया का अनुभव होता है। यहां करीब 25 हजार से अधिक चूहे रहते हैं, जिन्हें लोग प्यार से 'काबा' कहते हैं। ये चूहे मंदिर के फर्श, दीवारों और हर कोने में आराम से चलते हैं। कई बार ये भक्तों के पैरों से भी गुजर जाते हैं। मान्यता है कि यदि कोई चूहा आपके पैर के ऊपर से गुजरे, तो यह एक शुभ संकेत माना जाता है।

इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु चूहों को दूध, मिठाई और अनाज खिलाते हैं। खास बात यह है कि जब चूहे इन चीजों का सेवन करते हैं, तो वही बचा हुआ भोजन भक्त प्रसाद के रूप में ले जाते हैं। लोगों का मानना है कि इस प्रसाद का सेवन करने से देवी की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस मंदिर की कथा भी बेहद दिलचस्प है। मान्यता के अनुसार, करणी माता को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि एक बार उनके सौतेले बेटे लक्ष्मण की पानी में डूबकर मृत्यु हो गई। तब करणी माता ने यमराज से प्रार्थना की कि उनके बेटे को पुनर्जीवित किया जाए। यमराज ने पहले मना किया, लेकिन करणी माता की भक्ति और इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर उन्होंने लक्ष्मण समेत सभी नर बच्चों को चूहे के रूप में पुनर्जन्म दे दिया। तभी से यह माना जाता है कि यहां रहने वाले चूहे करणी माता के वंशज हैं।

मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता है कि यदि आपको सफेद चूहा दिखाई दे, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि सफेद चूहे स्वयं करणी माता और उनके बेटों का प्रतीक हैं। इसलिए भक्त इन्हें देखने की कोशिश करते हैं।

इस भव्य मंदिर का निर्माण बीकानेर के राजा महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं सदी की शुरुआत में करवाया था। यह मंदिर संगमरमर से बना है और इसके दरवाजे चांदी के हैं, जिन पर देवी से जुड़ी कहानियों की खूबसूरत नक्काशी की गई है।

Point of View

बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा भी हैं। यहां चूहों का जूठा प्रसाद भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

करणी माता मंदिर कहां स्थित है?
करणी माता मंदिर बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित है।
इस मंदिर में कितने चूहे हैं?
इस मंदिर में लगभग 25 हजार से अधिक चूहे रहते हैं।
क्या चूहों का जूठा प्रसाद पवित्र माना जाता है?
जी हां, इस मंदिर में चूहों का जूठा प्रसाद सबसे पवित्र माना जाता है।
सफेद चूहा क्यों शुभ माना जाता है?
सफेद चूहा करणी माता और उनके बेटों का प्रतीक होता है, इसलिए इसे शुभ माना जाता है।
इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
इस मंदिर का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं सदी की शुरुआत में करवाया था।
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