मानसून सत्र से पहले एमवीए ने फडणवीस की चाय पार्टी ठुकराई, 13 मुद्दों पर महायुति को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले, 21 जून 2026 को विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित पारंपरिक हाई-टी बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की। एमवीए नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब राज्य की जनता गंभीर संकटों से जूझ रही है, तब औपचारिक चाय-पार्टी में शामिल होना जनभावनाओं की अनदेखी होगी।
बहिष्कार की घोषणा और कारण
जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव, सतेज पाटिल, अनिल परब, अंबादास दानवे और अमीन पटेल सहित वरिष्ठ एमवीए नेताओं ने मुख्यमंत्री को एक संयुक्त पत्र लिखकर महायुति सरकार की आलोचना की। नेताओं ने कहा कि एकमत से लिए गए इस फैसले के पीछे एक बड़ा संवैधानिक कारण भी है — विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद अभी तक खाली हैं। एमवीए का आरोप है कि सरकार इन अहम वॉचडॉग पदों को भरने की बजाय विधायकों को अलग-अलग चाय-पार्टी के निमंत्रण भेजकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर कर रही है।
किसानों की बदहाली और सूखे का संकट
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमवीए नेताओं ने 13 प्रमुख मुद्दे उठाए। नेताओं ने बताया कि देर से हुई बारिश के कारण भयंकर सूखे की स्थिति बन गई है और राज्य के बाँधों में जलस्तर गिरकर मात्र 23.54 प्रतिशत रह गया है, जिससे बुआई का काम ठप हो गया है। विपक्ष ने ₹36,585 करोड़ की पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान स्वतंत्रता योजना को 'वास्तविक राहत की बजाय शर्तों और नियमों का जाल' करार दिया और माँग की कि किसानों के 7/12 भूमि अभिलेख (सातबारा) बिना किसी शर्त के ऋणमुक्त किए जाएँ। आम और काजू उगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹22,000 मुआवज़े को नाकाफी बताते हुए एमवीए ने कहा कि इस क्षेत्र में पहली बार किसानों ने आत्महत्या की है।
खरीद घोटाले और लाडकी बहिन योजना पर आरोप
एमवीए ने खरीद प्रक्रिया में बड़े घोटाले का आरोप लगाया। विपक्ष के अनुसार, 11 अयोग्य सहकारी समितियों को गैर-कानूनी तरीके से नैफेड (NAFED) खरीद अनुबंध दिए गए। इसके साथ ही फ्लैगशिप लाडकी बहिन योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। एमवीए के अनुसार, 2.47 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लोग अयोग्य पाए गए, जिससे कथित तौर पर लगभग ₹24,300 करोड़ का गलत वितरण हुआ। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि महिलाओं के लिए बने पोर्टल पर 14,000 पुरुष कैसे पंजीकृत हो गए।
कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए एमवीए ने बताया कि 2026 के पहले चार महीनों में 3,279 पॉक्सो मामले दर्ज हुए। आँकड़ों के अनुसार, हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमला और रोज़ाना 24 नाबालिगों के साथ दुराचार की घटनाएँ सामने आई हैं। नागपुर हत्या के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर होने का भी उल्लेख किया गया। भ्रष्टाचार के मोर्चे पर एमवीए ने दावा किया कि ठेकेदारों को सरकारी परियोजनाएँ हासिल करने के लिए 44 प्रतिशत कमीशन और बिल पास कराने के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है। मराठी ठेकेदारों के लंबित बिल लगभग ₹1 लाख करोड़ तक पहुँचने का दावा किया गया।
पर्यावरण और अन्य मुद्दे
एमवीए ने पर्यावरण विनाश पर भी सरकार को घेरा। विपक्ष के अनुसार, सरकार के 1.38 करोड़ पौधे लगाने के दावे के बावजूद ठाणे, आरे और बड़े कॉरिडोर परियोजनाओं के इर्द-गिर्द अंधाधुंध वृक्षकटाई से राज्य में 23,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो गया है। इसके अलावा, मुंबई-गोवा राजमार्ग के 17 साल बाद भी अधूरे होने के बावजूद खारपाड़ा पर टोल वसूली जारी रहने पर भी सवाल उठाए गए। तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार, 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 तक चलेगा — और इन मुद्दों पर विधानसभा में तीखी बहस अपेक्षित है।