8 अगस्त 2026
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मानसून सत्र से पहले एमवीए ने फडणवीस की चाय पार्टी ठुकराई, 13 मुद्दों पर महायुति को घेरा

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मानसून सत्र से पहले एमवीए ने फडणवीस की चाय पार्टी ठुकराई, 13 मुद्दों पर महायुति को घेरा

सारांश

महाराष्ट्र मानसून सत्र से पहले एमवीए ने फडणवीस की चाय पार्टी ठुकराकर सीधा संदेश दिया — विपक्ष के नेता पद खाली, बाँधों में 23.54% पानी, लाडकी बहिन में ₹24,300 करोड़ की कथित गड़बड़ी और हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमले के बीच औपचारिकता की कोई जगह नहीं।

मुख्य बातें

महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने 21 जून 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पारंपरिक हाई-टी बैठक का बहिष्कार किया।
विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद खाली होना बहिष्कार का प्रमुख संवैधानिक कारण बताया गया।
राज्य के बाँधों में जलस्तर 23.54% तक गिरा; ₹36,585 करोड़ की किसान योजना पर 'शर्तों का जाल' का आरोप।
लाडकी बहिन योजना में 81 लाख अयोग्य लाभार्थी, कथित तौर पर ₹24,300 करोड़ का गलत वितरण।
2026 के पहले चार महीनों में 3,279 पॉक्सो मामले ; हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमले का दावा।
मराठी ठेकेदारों के लंबित बिल ₹1 लाख करोड़ ; सरकारी प्रोजेक्ट के लिए 44% कमीशन माँगे जाने का आरोप।

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले, 21 जून 2026 को विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित पारंपरिक हाई-टी बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की। एमवीए नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब राज्य की जनता गंभीर संकटों से जूझ रही है, तब औपचारिक चाय-पार्टी में शामिल होना जनभावनाओं की अनदेखी होगी।

बहिष्कार की घोषणा और कारण

जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव, सतेज पाटिल, अनिल परब, अंबादास दानवे और अमीन पटेल सहित वरिष्ठ एमवीए नेताओं ने मुख्यमंत्री को एक संयुक्त पत्र लिखकर महायुति सरकार की आलोचना की। नेताओं ने कहा कि एकमत से लिए गए इस फैसले के पीछे एक बड़ा संवैधानिक कारण भी है — विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद अभी तक खाली हैं। एमवीए का आरोप है कि सरकार इन अहम वॉचडॉग पदों को भरने की बजाय विधायकों को अलग-अलग चाय-पार्टी के निमंत्रण भेजकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर कर रही है।

किसानों की बदहाली और सूखे का संकट

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमवीए नेताओं ने 13 प्रमुख मुद्दे उठाए। नेताओं ने बताया कि देर से हुई बारिश के कारण भयंकर सूखे की स्थिति बन गई है और राज्य के बाँधों में जलस्तर गिरकर मात्र 23.54 प्रतिशत रह गया है, जिससे बुआई का काम ठप हो गया है। विपक्ष ने ₹36,585 करोड़ की पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान स्वतंत्रता योजना को 'वास्तविक राहत की बजाय शर्तों और नियमों का जाल' करार दिया और माँग की कि किसानों के 7/12 भूमि अभिलेख (सातबारा) बिना किसी शर्त के ऋणमुक्त किए जाएँ। आम और काजू उगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹22,000 मुआवज़े को नाकाफी बताते हुए एमवीए ने कहा कि इस क्षेत्र में पहली बार किसानों ने आत्महत्या की है।

खरीद घोटाले और लाडकी बहिन योजना पर आरोप

एमवीए ने खरीद प्रक्रिया में बड़े घोटाले का आरोप लगाया। विपक्ष के अनुसार, 11 अयोग्य सहकारी समितियों को गैर-कानूनी तरीके से नैफेड (NAFED) खरीद अनुबंध दिए गए। इसके साथ ही फ्लैगशिप लाडकी बहिन योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। एमवीए के अनुसार, 2.47 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लोग अयोग्य पाए गए, जिससे कथित तौर पर लगभग ₹24,300 करोड़ का गलत वितरण हुआ। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि महिलाओं के लिए बने पोर्टल पर 14,000 पुरुष कैसे पंजीकृत हो गए।

कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए एमवीए ने बताया कि 2026 के पहले चार महीनों में 3,279 पॉक्सो मामले दर्ज हुए। आँकड़ों के अनुसार, हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमला और रोज़ाना 24 नाबालिगों के साथ दुराचार की घटनाएँ सामने आई हैं। नागपुर हत्या के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर होने का भी उल्लेख किया गया। भ्रष्टाचार के मोर्चे पर एमवीए ने दावा किया कि ठेकेदारों को सरकारी परियोजनाएँ हासिल करने के लिए 44 प्रतिशत कमीशन और बिल पास कराने के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है। मराठी ठेकेदारों के लंबित बिल लगभग ₹1 लाख करोड़ तक पहुँचने का दावा किया गया।

पर्यावरण और अन्य मुद्दे

एमवीए ने पर्यावरण विनाश पर भी सरकार को घेरा। विपक्ष के अनुसार, सरकार के 1.38 करोड़ पौधे लगाने के दावे के बावजूद ठाणे, आरे और बड़े कॉरिडोर परियोजनाओं के इर्द-गिर्द अंधाधुंध वृक्षकटाई से राज्य में 23,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो गया है। इसके अलावा, मुंबई-गोवा राजमार्ग के 17 साल बाद भी अधूरे होने के बावजूद खारपाड़ा पर टोल वसूली जारी रहने पर भी सवाल उठाए गए। तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार, 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 तक चलेगा — और इन मुद्दों पर विधानसभा में तीखी बहस अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एलओपी पद का खाली रहना विधायी जवाबदेही के लिए गंभीर चिंता का विषय है। लाडकी बहिन योजना में ₹24,300 करोड़ के कथित गलत वितरण और 81 लाख अयोग्य लाभार्थियों के आँकड़े, यदि सत्यापित हों, तो यह महायुति के सबसे बड़े कल्याण दांव की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। 44% कमीशन के आरोप और ₹1 लाख करोड़ के लंबित बिल यह बताते हैं कि भ्रष्टाचार की शिकायतें अब केवल विपक्षी बयानबाज़ी नहीं, बल्कि व्यापार-जगत की ज़मीनी वास्तविकता बन चुकी हैं — और मानसून सत्र में इन पर जवाब माँगा जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमवीए ने फडणवीस की चाय पार्टी का बहिष्कार क्यों किया?
एमवीए ने कहा कि जब राज्य की जनता सूखे, कानून-व्यवस्था की विफलता और भ्रष्टाचार से जूझ रही है, तब औपचारिक चाय-पार्टी में शामिल होना जनभावनाओं की अनदेखी होगी। इसके साथ ही विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता पद खाली होने को भी प्रमुख संवैधानिक कारण बताया गया।
महाराष्ट्र मानसून सत्र 2026 कब से कब तक चलेगा?
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 22 जून 2026 से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 तक, यानी तीन सप्ताह तक चलेगा। इस सत्र में एमवीए द्वारा उठाए गए 13 प्रमुख मुद्दों पर तीखी बहस अपेक्षित है।
लाडकी बहिन योजना में क्या गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है?
एमवीए के अनुसार, 2.47 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लोग अयोग्य पाए गए, जिससे कथित तौर पर लगभग ₹24,300 करोड़ का गलत वितरण हुआ। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि महिलाओं के लिए बने पोर्टल पर 14,000 पुरुष कैसे पंजीकृत हो गए।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
एमवीए नेताओं के अनुसार, देर से हुई बारिश के कारण राज्य के बाँधों में जलस्तर गिरकर मात्र 23.54 प्रतिशत रह गया है, जिससे बुआई का काम ठप हो गया है। आम और काजू उगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹22,000 मुआवज़े को नाकाफी बताते हुए कहा गया कि इस क्षेत्र में पहली बार किसान आत्महत्या की घटनाएँ सामने आई हैं।
एमवीए ने महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था को लेकर क्या आँकड़े पेश किए?
एमवीए के अनुसार, 2026 के पहले चार महीनों में 3,279 पॉक्सो मामले दर्ज हुए — यानी हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमला और रोज़ाना 24 नाबालिगों के साथ दुराचार। नागपुर को हत्या के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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