25 अगस्त 2026
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लखनऊ नगर निगम में भैंसों की नीलामी पर सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा, अनिस राज समेत 11 नामजद पर एफआईआर

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लखनऊ नगर निगम में भैंसों की नीलामी पर सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा, अनिस राज समेत 11 नामजद पर एफआईआर

सारांश

लखनऊ के नगर निगम परिसर में भैंसों की नीलामी के दौरान सपा कार्यकर्ताओं के कथित धरने और सड़क जाम पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है — अनिस राज समेत 11 नामजद और 50 अज्ञात पर बीएनएस की कई धाराओं में एफआईआर दर्ज। मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।

मुख्य बातें

लखनऊ नगर निगम परिसर में 25 अगस्त को भैंसों की नीलामी के दौरान कथित हंगामे पर एफआईआर दर्ज।
सपा कार्यकर्ता अनिस राज समेत 10 अन्य नामजद और करीब 50 अज्ञात व्यक्तियों पर मुकदमा।
हजरतगंज थाने की लालबाग चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार की शिकायत पर कार्रवाई।
बीएनएस धारा 3(5), 285, 190 और 223 के तहत एफआईआर दर्ज; सड़क जाम और सरकारी कार्य में बाधा का आरोप।
पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए जाँच जारी कर रही है।

लखनऊ के नगर निगम कार्यालय परिसर में 25 अगस्त को भैंसों की नीलामी के दौरान कथित धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम के मामले में हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यकर्ता अनिस राज समेत 10 अन्य नामजद और करीब 50 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।

घटनाक्रम क्या हुआ

नगर निगम परिसर में पकड़ी गई भैंसों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही थी, तभी कथित तौर पर सपा कार्यकर्ताओं ने वहाँ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की, जिससे नीलामी प्रक्रिया बाधित हुई।

यह घटना उस समय हुई जब नगर निगम अधिकारी आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान के तहत पकड़ी गई भैंसों की नीलामी कर रहे थे। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं और उनके निपटान को लेकर नगर निकायों और स्थानीय राजनीतिक दलों के बीच विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं।

एफआईआर की धाराएँ और पुलिस कार्रवाई

हजरतगंज थाने की लालबाग चौकी के प्रभारी प्रदीप कुमार की शिकायत के आधार पर यह मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3(5), 285, 190 और 223 के तहत कार्रवाई की है।

पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक मार्ग बाधित करने और सरकारी कार्य में व्यवधान डालने के मामले में नियमानुसार जाँच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि नामजद आरोपियों के साथ-साथ प्रदर्शन में शामिल अज्ञात व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।

राजनीतिक रंग

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया है, क्योंकि नामजद आरोपियों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सपा के बीच स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों पर टकराव बढ़ता रहा है।

सपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नज़र बनी हुई है।

आगे क्या होगा

पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जाँच कर रही है। नामजद आरोपियों से पूछताछ और संभावित गिरफ्तारियों की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस घटना ने इसे फिर से राजनीतिक मंच पर ला दिया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बीएनएस की धाराएँ अपेक्षाकृत कड़ी हैं, जो संकेत देती हैं कि प्रशासन इस बार सख्त रुख अपना रहा है। असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था की बहाली है या राजनीतिक विरोध को दबाने का प्रयास — इसका जवाब जाँच की दिशा से स्पष्ट होगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ नगर निगम में भैंसों की नीलामी पर हंगामा क्यों हुआ?
नगर निगम परिसर में पकड़ी गई भैंसों की नीलामी प्रक्रिया के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया और सड़क जाम कर दी। इससे सरकारी कार्य बाधित हुआ और पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
इस मामले में किन पर एफआईआर दर्ज हुई है?
सपा कार्यकर्ता अनिस राज समेत 10 अन्य नामजद व्यक्तियों और करीब 50 अज्ञात लोगों पर हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत लालबाग चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार ने दर्ज कराई।
एफआईआर में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3(5), 285, 190 और 223 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ये धाराएँ सार्वजनिक मार्ग बाधित करने और सरकारी कार्य में व्यवधान डालने से संबंधित हैं।
क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
अभी तक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस नामजद आरोपियों के साथ-साथ अज्ञात प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए जाँच कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की नीलामी का क्या नियम है?
नगर निगम और स्थानीय निकाय सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले आवारा पशुओं को पकड़कर नियमानुसार नीलामी या निपटान की प्रक्रिया अपनाते हैं। यह प्रक्रिया पहले भी विवादों में रही है, खासकर जब पशु मालिकों या राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया हो।
राष्ट्र प्रेस
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