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नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो-आईआईआरएस का नोडल सेंटर, छात्रों को मिलेंगे मुफ्त रिमोट सेंसिंग कोर्स

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नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो-आईआईआरएस का नोडल सेंटर, छात्रों को मिलेंगे मुफ्त रिमोट सेंसिंग कोर्स

सारांश

नालंदा विश्वविद्यालय अब इसरो के आईआईआरएस का नोडल सेंटर बन गया है। इससे बिहार के इस विश्वविद्यालय के सभी विभागों के छात्रों को रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और अंतरिक्ष विज्ञान के उन्नत पाठ्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क मिलेंगे — ऐतिहासिक ज्ञान की धरती पर आधुनिक तकनीक का नया अध्याय।

मुख्य बातें

नालंदा विश्वविद्यालय , राजगीर को इसरो के अधीन आईआईआरएस का आधिकारिक नोडल सेंटर नामित किया गया है।
रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के ऑनलाइन पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पूरी तरह निःशुल्क होंगे।
सभी विभागों के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं — किसी एक विभाग तक सीमित नहीं।
शिक्षा इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाइव और संवादात्मक कक्षाओं के माध्यम से दी जाएगी।
नामित समन्वयक प्रोफेसर दीपक कुमार , स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज हैं।
पाठ्यक्रमों की जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर 2026 में उपलब्ध है।

नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अधीन कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) का आधिकारिक नोडल सेंटर नामित किया गया है। इस साझेदारी के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थियों को रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) में विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस बयान में यह जानकारी दी गई।

क्या है यह साझेदारी

आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (डीएलपी) के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें भाग लेने के लिए किसी एक विशेष विभाग का छात्र होना आवश्यक नहीं है — विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह अंतर्विषयक खुलापन इस पहल को अन्य तकनीकी साझेदारियों से अलग बनाता है।

इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म से मिलेगी शिक्षा

पंजीकृत विद्यार्थियों को इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाएं तथा अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन और भौगोलिक आँकड़ों के विश्लेषण जैसे उन्नत विषयों की जानकारी मिलेगी। गौरतलब है कि यह वही तकनीकी दक्षता है जिसकी माँग रक्षा, कृषि, शहरी नियोजन और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही है।

आवेदन प्रक्रिया और समन्वयक

वर्ष 2026 में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, उनकी अवधि और समय-सारिणी की जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर में उपलब्ध है। नालंदा विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी पंजीकरण की स्वीकृति और संबंधित जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क कर सकते हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम का नामित समन्वयक बनाया गया है।

विश्वविद्यालय और इस पहल का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब नालंदा विश्वविद्यालय अपनी अंतर्विषयक और शोध-केंद्रित पहचान को और मज़बूत करने की दिशा में कार्यरत है। बिहार के नालंदा जिले में स्थित यह विश्वविद्यालय अपनी ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत के साथ अब आधुनिक प्रौद्योगिकी शिक्षा को जोड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस साझेदारी से विद्यार्थियों के कौशल विकास और शोध क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ जुड़ाव विद्यार्थियों के करियर की संभावनाओं को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब अंतरिक्ष विज्ञान की आधुनिक शिक्षा का द्वार खुल रहा है। हालांकि, असली परीक्षा यह होगी कि यह डिस्टेंस लर्निंग मॉडल विद्यार्थियों की भागीदारी और पाठ्यक्रम पूर्णता दर में वास्तविक बदलाव ला पाता है या नहीं — क्योंकि ऑनलाइन तकनीकी कोर्सों में ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय स्तर पर एक जानी-मानी चुनौती है। यह पहल तब और प्रासंगिक हो जाती है जब सरकार भू-स्थानिक नीति 2021 के तहत जीआईएस और रिमोट सेंसिंग के उपयोग को कृषि, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन में विस्तार दे रही है। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहाँ उच्च शिक्षा में तकनीकी पाठ्यक्रमों की पहुँच सीमित रही है, यह निःशुल्क मॉडल एक सकारात्मक नज़ीर बन सकता है — बशर्ते क्रियान्वयन कागज़ों से आगे जाए।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा विश्वविद्यालय इसरो-आईआईआरएस का नोडल सेंटर कैसे बना?
नालंदा विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अधीन कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) का नोडल सेंटर नामित किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस बयान में इस साझेदारी की पुष्टि की गई।
इसरो के इन मुफ्त ऑनलाइन कोर्स में कौन-से विषय शामिल हैं?
इन पाठ्यक्रमों में रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पृथ्वी संसाधन मूल्यांकन और भौगोलिक आँकड़ों के विश्लेषण जैसे उन्नत विषय शामिल हैं। शिक्षा इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाइव और संवादात्मक कक्षाओं के माध्यम से दी जाएगी।
नालंदा विश्वविद्यालय में इन कोर्स के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
नालंदा विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं — किसी एक विशेष विभाग तक पात्रता सीमित नहीं है। यह अंतर्विषयक खुलापन इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता है।
आवेदन के लिए किससे संपर्क करें?
नालंदा विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन की जानकारी और पंजीकरण की स्वीकृति के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क किया जा सकता है, जिन्हें इस कार्यक्रम का नामित समन्वयक बनाया गया है।
वर्ष 2026 के पाठ्यक्रमों की जानकारी कहाँ मिलेगी?
वर्ष 2026 में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, उनकी अवधि और समय-सारिणी की विस्तृत जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर में देखी जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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