नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो-आईआईआरएस का नोडल सेंटर, छात्रों को मिलेंगे मुफ्त रिमोट सेंसिंग कोर्स
सारांश
मुख्य बातें
नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अधीन कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) का आधिकारिक नोडल सेंटर नामित किया गया है। इस साझेदारी के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थियों को रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) में विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस बयान में यह जानकारी दी गई।
क्या है यह साझेदारी
आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (डीएलपी) के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें भाग लेने के लिए किसी एक विशेष विभाग का छात्र होना आवश्यक नहीं है — विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह अंतर्विषयक खुलापन इस पहल को अन्य तकनीकी साझेदारियों से अलग बनाता है।
इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म से मिलेगी शिक्षा
पंजीकृत विद्यार्थियों को इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाएं तथा अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन और भौगोलिक आँकड़ों के विश्लेषण जैसे उन्नत विषयों की जानकारी मिलेगी। गौरतलब है कि यह वही तकनीकी दक्षता है जिसकी माँग रक्षा, कृषि, शहरी नियोजन और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही है।
आवेदन प्रक्रिया और समन्वयक
वर्ष 2026 में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, उनकी अवधि और समय-सारिणी की जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर में उपलब्ध है। नालंदा विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी पंजीकरण की स्वीकृति और संबंधित जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क कर सकते हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम का नामित समन्वयक बनाया गया है।
विश्वविद्यालय और इस पहल का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब नालंदा विश्वविद्यालय अपनी अंतर्विषयक और शोध-केंद्रित पहचान को और मज़बूत करने की दिशा में कार्यरत है। बिहार के नालंदा जिले में स्थित यह विश्वविद्यालय अपनी ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत के साथ अब आधुनिक प्रौद्योगिकी शिक्षा को जोड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस साझेदारी से विद्यार्थियों के कौशल विकास और शोध क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ जुड़ाव विद्यार्थियों के करियर की संभावनाओं को नई दिशा दे सकता है।