11 अगस्त 2026
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नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में आमंत्रित किया, भारत-अमेरिका डीप स्पेस साझेदारी को नई ऊँचाई

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नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में आमंत्रित किया, भारत-अमेरिका डीप स्पेस साझेदारी को नई ऊँचाई

सारांश

नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में आमंत्रित कर भारत-अमेरिका डीप स्पेस साझेदारी को नई परिभाषा दी है। 5-6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में हुई CSJWG की 9वीं बैठक के बाद यह घोषणा NISAR मिशन की सफलता के बाद दोनों देशों के अंतरिक्ष संबंधों का सबसे बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया।
भारत-अमेरिका CSJWG की 9वीं बैठक 5-6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में आयोजित हुई।
नारायणन और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया।
बैठक TRUST पहल के तहत हुई, जो फरवरी 2025 में मोदी-ट्रंप संयुक्त बयान पर आधारित है।
दोनों देश आर्टेमिस अकॉर्ड्स के तहत ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग पर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।
संयुक्त NISAR मिशन की सफल लॉन्च के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) को नासा ने अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है, जो भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। यह घोषणा 5-6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (CSJWG) की 9वीं बैठक के बाद सामने आई।

बैठक का आयोजन और प्रमुख प्रतिभागी

बैठक के उद्घाटन सत्र में इसरो के चेयरमैन एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संबोधन दिया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय पक्ष की सह-अध्यक्षता इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक एम. शंकरन ने की। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महासागर एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण व वैज्ञानिक मामलों के ब्यूरो के सहायक विदेश सचिव डॉ. वेस्ली ब्रूक्स और नासा की अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर-एजेंसी संबंध एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथलीन कारिका ने किया।

मून बेस प्रोग्राम और आर्टेमिस अकॉर्ड्स

बैठक के बाद राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिससे अमेरिका-भारत डीप स्पेस पार्टनरशिप और गहरी होगी।' यह निमंत्रण आर्टेमिस अकॉर्ड्स के तहत दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देता है।

दोनों पक्ष आर्टेमिस अकॉर्ड्स के अंतर्गत ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत चंद्रयान-3 की सफलता के बाद वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में अपनी साख मज़बूत कर चुका है।

TRUST पहल और द्विपक्षीय ढाँचा

यह बैठक अमेरिका-भारत TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) पहल के तहत नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को गति देने पर केंद्रित थी। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फरवरी 2025 में जारी संयुक्त नेताओं के बयान के अनुरूप है।

दोनों देशों ने पिछले वर्ष सफलतापूर्वक प्रक्षेपित संयुक्त नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन के बाद सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा की। भविष्य में विज्ञान एवं मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझा प्रयासों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बहुपक्षीय प्रतिबद्धता

बैठक में दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों के तहत बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। समिति की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए चल रहे बहुपक्षीय प्रयासों की भी समीक्षा की गई।

आगे की राह

नासा का यह निमंत्रण भारत के लिए चंद्र अन्वेषण कार्यक्रमों में सीधी भागीदारी का द्वार खोलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मून बेस प्रोग्राम में इसरो की भागीदारी भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है और भविष्य की मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजनाओं के लिए तकनीकी आधार तैयार कर सकती है। अब सभी की निगाहें इस साझेदारी के ठोस क्रियान्वयन और समयसीमा पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अमेरिका ने रणनीतिक साझेदारी में बदलने की पहल की है। हालाँकि, मून बेस प्रोग्राम में 'शामिल होने का निमंत्रण' और वास्तविक वित्तीय-तकनीकी प्रतिबद्धता के बीच की खाई अभी स्पष्ट नहीं है। यह देखना होगा कि इसरो की भागीदारी की शर्तें, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण किस हद तक भारत के हित में होंगे। TRUST पहल के तहत यह कदम निश्चित रूप से सही दिशा में है, लेकिन असली कसौटी ठोस परियोजनाओं और बराबरी की साझेदारी पर होगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में क्यों आमंत्रित किया?
नासा ने इसरो को आर्टेमिस अकॉर्ड्स के तहत अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण दिया, जो भारत-अमेरिका डीप स्पेस पार्टनरशिप को और गहरा करेगा। यह निमंत्रण 5-6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में हुई CSJWG की 9वीं बैठक के बाद घोषित किया गया।
CSJWG की 9वीं बैठक में क्या निर्णय हुए?
बैठक में नासा द्वारा इसरो को मून बेस प्रोग्राम में आमंत्रण, आर्टेमिस अकॉर्ड्स के तहत ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग, और मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी में सहयोग पर सहमति बनी। COPUOS दिशानिर्देशों के तहत अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
TRUST पहल क्या है और यह भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग से कैसे जुड़ी है?
TRUST यानी 'Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology' एक द्विपक्षीय पहल है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने फरवरी 2025 में अपने संयुक्त बयान में घोषित किया था। यह पहल नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग सहित रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका संबंधों को मज़बूत करने का ढाँचा प्रदान करती है।
NISAR मिशन क्या है और इसका इस बैठक से क्या संबंध है?
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) एक संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह मिशन है, जिसे नासा और इसरो ने मिलकर विकसित किया और पिछले वर्ष सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। इस सफलता के बाद दोनों देशों ने बेंगलुरु बैठक में भविष्य के विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षेत्रों में और गहरे सहयोग पर चर्चा की।
भारत के लिए मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का क्या महत्त्व है?
मून बेस प्रोग्राम में भागीदारी भारत को चंद्र अन्वेषण में सीधी भूमिका देगी और इसरो की तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक मानकों पर परखने का अवसर मिलेगा। यह भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और भविष्य की मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजनाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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