15 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नवरात्रि पंचम दिवस: कालकाजी मंदिर में मां स्कंदमाता की पूजा, संतान सुख के लिए जानें विशेष विधान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नवरात्रि पंचम दिवस: कालकाजी मंदिर में मां स्कंदमाता की पूजा, संतान सुख के लिए जानें विशेष विधान

सारांश

नवरात्रि के पाँचवें दिन कालकाजी मंदिर में हज़ारों भक्त माँ स्कंदमाता के दर्शन को उमड़े। मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि जियापोता हवन से संतान-बाधा दूर होती है। 150 सीसीटीवी और पैरामिलिट्री तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।

मुख्य बातें

शारदीय नवरात्रि के पाँचवें दिन ( 15 अक्टूबर 2026 ) कालकाजी मंदिर में माँ स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार जियापोता (पुत्रजीवक) हवन से संतान प्राप्ति होती है और संतान-बाधाएँ दूर होती हैं।
मंदिर में भक्तों के लिए तीन अलग प्रवेश मार्ग — राम प्याऊ, कमल मंदिर और वीआईपी दर्शन — बनाए गए हैं।
सुरक्षा के लिए परिसर में लगभग 150 सीसीटीवी कैमरे (हेडकाउंट कैमरों सहित) और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात है।
मध्यरात्रि में विशेष आरती के बाद मंदिर के पट खोले जाते हैं; स्वयंसेवी संस्थाएँ दिन-रात श्रद्धालुओं की सेवा में सक्रिय हैं।

शारदीय नवरात्रि के पाँचवें दिन, 15 अक्टूबर 2026 को, नई दिल्ली के ऐतिहासिक कालकाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हज़ारों भक्त माँ स्कंदमाता के दर्शन और उनका आशीर्वाद पाने के लिए मंदिर परिसर में पहुँचे, जहाँ चारों ओर 'जय माता दी' के उद्घोष गूँज रहे थे। मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस दिन की पूजा के महत्व और विशेष विधि-विधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

माँ स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया, 'पंचम नवरात्रि पर भगवती स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। देव सेनापति स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म देने के कारण भगवती स्कंदमाता के नाम से विख्यात हुईं।' उन्होंने देवी के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवती स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं — दो हाथों में कमल के फूल, एक में गोद में विराजमान देव सेनापति कार्तिकेय, और एक हाथ से वे भक्तों को अभय प्रदान करती हैं।

महंत जी के अनुसार, 'भगवती स्कंदमाता करुणा और वात्सल्य की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं।' नवरात्रि के पाँचवें दिन उनकी उपासना को हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष फलदायी माना जाता है।

संतान सुख के लिए विशेष पूजा विधान

महंत सुरेंद्रनाथ ने बताया कि माँ स्कंदमाता की विधिवत आराधना से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। उनके अनुसार, 'सिंहासनगता देवी स्कंदमाता यशस्विनी के मंत्रों के साथ उनकी आराधना करने और उन्हें प्रिय वस्तुएँ अर्पित करने से भगवती प्रसन्न होकर संतान का वरदान देती हैं।'

हवन की विशेष विधि के संदर्भ में उन्होंने बताया कि इस दिन हवन में जियापोता — जिसे पुत्रजीवक भी कहा जाता है — की आहुति दी जाती है। उनके अनुसार इस विशेष हवन से साधक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है और संतान से जुड़ी बाधाएँ दूर होती हैं।

मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

महंत जी ने बताया कि प्रत्येक नवरात्रि में माँ कालका के दरबार में भक्तों की भारी संख्या आती है। मध्यरात्रि में भगवती की विशेष आरती की जाती है और उसके उपरांत मंदिर के पट खोले जाते हैं, जिससे श्रद्धालु सुचारू रूप से दर्शन कर सकें। इस वर्ष भी भक्तों का तांता प्रातः काल से ही लगा रहा।

सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम

भक्तों की सुविधा के लिए इस बार तीन अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं — पहला राम प्याऊ की दिशा से, दूसरा कमल मंदिर की ओर से और तीसरा वीआईपी दर्शन के लिए। मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है, जहाँ अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिसर में लगभग 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें हेडकाउंट कैमरे भी शामिल हैं। महंत सुरेंद्रनाथ के अनुसार इन कैमरों की मदद से परिसर में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता दिन-रात सेवा में संलग्न हैं, ताकि किसी भक्त को असुविधा न हो।

आस्था और परंपरा का संगम

गौरतलब है कि कालकाजी मंदिर दिल्ली के सबसे प्राचीन और श्रद्धेय मंदिरों में से एक है, और नवरात्रि के अवसर पर यहाँ देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुँचते हैं। पाँचवें दिन की यह पूजा न केवल आध्यात्मिक, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनती है। शेष नवरात्रि में भी प्रतिदिन विशेष अनुष्ठान जारी रहेंगे और आस्था का यह प्रवाह नवमी तक अनवरत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इस पर्व की कवरेज अक्सर केवल भीड़ के आँकड़ों तक सिमट जाती है — पूजा की वैज्ञानिक व सांस्कृतिक व्याख्या पीछे रह जाती है। महंत सुरेंद्रनाथ द्वारा बताई गई जियापोता हवन विधि उस समृद्ध औषधीय-धार्मिक परंपरा की ओर इशारा करती है जो आधुनिक चर्चा में प्रायः अनदेखी रह जाती है। 150 सीसीटीवी कैमरे और पैरामिलिट्री तैनाती यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आयोजन अब केवल आस्था नहीं, बल्कि बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन की भी माँग करते हैं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि के पाँचवें दिन किस देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देव सेनापति कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है और वे सिंह पर सवार चार भुजाधारी देवी हैं।
संतान प्राप्ति के लिए नवरात्रि पर कौन-सा हवन किया जाता है?
कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, नवरात्रि के पाँचवें दिन जियापोता (पुत्रजीवक) का हवन किया जाता है। इस हवन से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है और संतान-संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं।
कालकाजी मंदिर में नवरात्रि के दौरान क्या विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं?
इस बार भक्तों के लिए तीन अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं — राम प्याऊ, कमल मंदिर और वीआईपी दर्शन मार्ग। परिसर में लगभग 150 सीसीटीवी कैमरे, एक अस्थायी पुलिस चौकी और पैरामिलिट्री जवान तैनात हैं।
कालकाजी मंदिर में नवरात्रि के दौरान दर्शन का समय क्या है?
मध्यरात्रि में भगवती की विशेष आरती के बाद मंदिर के पट खोले जाते हैं, जिससे भक्त सुचारू रूप से दर्शन कर सकें। स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता दिन-रात सेवा में उपस्थित रहते हैं।
माँ स्कंदमाता का स्वरूप कैसा है?
माँ स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं। दो हाथों में कमल के फूल हैं, एक हाथ में वे कार्तिकेय को गोद में लिए हैं और एक हाथ से भक्तों को अभय देती हैं। वे करुणा और वात्सल्य की प्रतीक मानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले