नवरात्रि पंचम दिवस: कालकाजी मंदिर में मां स्कंदमाता की पूजा, संतान सुख के लिए जानें विशेष विधान
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्रि के पाँचवें दिन, 15 अक्टूबर 2026 को, नई दिल्ली के ऐतिहासिक कालकाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हज़ारों भक्त माँ स्कंदमाता के दर्शन और उनका आशीर्वाद पाने के लिए मंदिर परिसर में पहुँचे, जहाँ चारों ओर 'जय माता दी' के उद्घोष गूँज रहे थे। मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस दिन की पूजा के महत्व और विशेष विधि-विधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
माँ स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया, 'पंचम नवरात्रि पर भगवती स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। देव सेनापति स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म देने के कारण भगवती स्कंदमाता के नाम से विख्यात हुईं।' उन्होंने देवी के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवती स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं — दो हाथों में कमल के फूल, एक में गोद में विराजमान देव सेनापति कार्तिकेय, और एक हाथ से वे भक्तों को अभय प्रदान करती हैं।
महंत जी के अनुसार, 'भगवती स्कंदमाता करुणा और वात्सल्य की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं।' नवरात्रि के पाँचवें दिन उनकी उपासना को हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष फलदायी माना जाता है।
संतान सुख के लिए विशेष पूजा विधान
महंत सुरेंद्रनाथ ने बताया कि माँ स्कंदमाता की विधिवत आराधना से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। उनके अनुसार, 'सिंहासनगता देवी स्कंदमाता यशस्विनी के मंत्रों के साथ उनकी आराधना करने और उन्हें प्रिय वस्तुएँ अर्पित करने से भगवती प्रसन्न होकर संतान का वरदान देती हैं।'
हवन की विशेष विधि के संदर्भ में उन्होंने बताया कि इस दिन हवन में जियापोता — जिसे पुत्रजीवक भी कहा जाता है — की आहुति दी जाती है। उनके अनुसार इस विशेष हवन से साधक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है और संतान से जुड़ी बाधाएँ दूर होती हैं।
मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
महंत जी ने बताया कि प्रत्येक नवरात्रि में माँ कालका के दरबार में भक्तों की भारी संख्या आती है। मध्यरात्रि में भगवती की विशेष आरती की जाती है और उसके उपरांत मंदिर के पट खोले जाते हैं, जिससे श्रद्धालु सुचारू रूप से दर्शन कर सकें। इस वर्ष भी भक्तों का तांता प्रातः काल से ही लगा रहा।
सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम
भक्तों की सुविधा के लिए इस बार तीन अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं — पहला राम प्याऊ की दिशा से, दूसरा कमल मंदिर की ओर से और तीसरा वीआईपी दर्शन के लिए। मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है, जहाँ अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिसर में लगभग 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें हेडकाउंट कैमरे भी शामिल हैं। महंत सुरेंद्रनाथ के अनुसार इन कैमरों की मदद से परिसर में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता दिन-रात सेवा में संलग्न हैं, ताकि किसी भक्त को असुविधा न हो।
आस्था और परंपरा का संगम
गौरतलब है कि कालकाजी मंदिर दिल्ली के सबसे प्राचीन और श्रद्धेय मंदिरों में से एक है, और नवरात्रि के अवसर पर यहाँ देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुँचते हैं। पाँचवें दिन की यह पूजा न केवल आध्यात्मिक, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनती है। शेष नवरात्रि में भी प्रतिदिन विशेष अनुष्ठान जारी रहेंगे और आस्था का यह प्रवाह नवमी तक अनवरत बना रहेगा।