चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा करें इन प्राचीन मंदिरों में, पाएं कष्टों से मुक्ति

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चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा करें इन प्राचीन मंदिरों में, पाएं कष्टों से मुक्ति

सारांश

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। जानिए देशभर के उन प्राचीन मंदिरों के बारे में जहां भक्त मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Key Takeaways

  • चैत्र नवरात्रि में मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है।
  • मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।
  • मां के दर्शन से सभी दुख समाप्त होते हैं।
  • प्राचीन मंदिरों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है।
  • मां की विधिवत पूजा से भक्त हर कठिनाई से मुक्ति पा सकते हैं।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व है। इन्हें बुद्धि के विकास, सुख-शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की देवी माना जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में स्कंदमाता को समर्पित अनेक भव्य एवं प्राचीन मंदिर हैं, जिनका ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व है। आज हम आपको देशभर के स्कंदमाता के मंदिरों की जानकारी देंगे।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जगतपुरा क्षेत्र में स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर मां स्कंदमाता को समर्पित है। इस मंदिर का उल्लेख हमारे पुराणों में भी मिलता है। कहा जाता है कि मां ने इसी स्थान पर राक्षस देवासुर का वध किया था और मां बागेश्वरी देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। नवरात्रि के पांचवे दिन बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

मध्यप्रदेश के विदिशा में भी स्कंदमाता का एक मंदिर है, जहां दर्शन करने से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। विदिशा के पुराने बस स्टैंड के पास सांकल कुआं के निकट मां स्कंदमाता का मंदिर है, जहां नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। यहां नवरात्रि के दौरान झांकी सजाई जाती है, और विशेष बात यह है कि यहां स्कंद माता की अखंड ज्योत जलती रहती है।

गुजरात के वडोदरा में भी मां स्कंदमाता का एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए मशहूर है। मान्यता है कि मां के दर्शन से मन को शांति और घर में खुशहाली मिलती है। नवरात्रि में मां का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है।

इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के चंबा में भी स्कंदमाता को समर्पित एक मंदिर है, जहां चैत्र नवरात्रि में विशेष भीड़ होती है। यह मंदिर लकड़ी की नक्काशी और संरचना के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मां के दर्शन से सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। तमिलनाडु के मदुरै में भी स्कंदमाता का एक मंदिर है, जो 7वीं शताब्दी में बना था। मान्यता है कि यदि मां की विधिवत पूजा की जाए, तो भक्त हर कठिनाई से मुक्ति पा सकते हैं।

Point of View

NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व क्या है?
मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व बुद्धि, सुख-शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा में है।
कौन से मंदिरों में मां स्कंदमाता की पूजा की जा सकती है?
वाराणसी, विदिशा, वडोदरा, चंबा और मदुरै में मां स्कंदमाता के प्रमुख मंदिर हैं।
नवरात्रि में क्या विशेष पूजा होती है?
नवरात्रि में विशेष पूजा-अनुष्ठान और झांकियां सजाई जाती हैं।
क्या मां स्कंदमाता के दर्शन से कष्ट दूर होते हैं?
जी हां, मां स्कंदमाता के दर्शन से भक्तों के सभी दुख समाप्त हो जाते हैं।
मां स्कंदमाता का प्राचीन मंदिर कब बना था?
गुजरात के वडोदरा में मां स्कंदमाता का मंदिर 10वीं शताब्दी में बना था।
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