क्या एनडीए में सब सामान्य है? सीट बंटवारे की घोषणा जल्द होगी: राजीव रंजन
सारांश
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पटना, 10 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता राजीव रंजन ने यह दावा किया है कि बिहार में अगली सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनेगी और एनडीए के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का विवरण जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में राजीव रंजन ने कहा कि यह एनडीए है, महागठबंधन नहीं, जहाँ अंतिम समय तक घटक दलों द्वारा दबाव नहीं डाला जाता। हाल ही में तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मिलना भी अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन में लेफ्ट, जिसमें माले शामिल है, और वीआईपी जैसे दलों से बगावती सुर सुनाई दे रहे हैं। हमारे यहाँ सब कुछ सामान्य है और सीट बंटवारे की घोषणा शीघ्र ही होगी।
राजीव रंजन ने बताया कि एनडीए के सभी पांच घटक दलों के बीच बातचीत समाप्त हो चुकी है। सीट बंटवारा तय हो चुका है और इसका औपचारिक ऐलान जल्द ही किया जाएगा। यह कोई अप्रत्याशित स्थिति नहीं है। पहले भी आचार संहिता लागू होने के बाद सीट बंटवारे के फैसले हुए हैं। जनता का आशीर्वाद हमारे साथ है और नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री होंगे।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक को याद करते हुए कहा कि मुलायम सिंह वंचितों, पीड़ितों और शोषितों की आवाज थे। उन्होंने सामाजिक असमानता के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया। दुर्भाग्यवश, समाजवादी पार्टी उनके दिखाए रास्ते से भटक गई है। आज पार्टी को उनके मूल्यों पर वापस लौटने की आवश्यकता है। वर्तमान नेतृत्व सत्ता में वापसी के लिए उन तिकड़मों का सहारा ले रहा है, जो मुलायम सिंह कभी नहीं अपनाते थे।
एसआईआर पर टीएमसी के विरोध पर जदयू नेता ने कहा, टीएमसी अपनी हार को भांप चुकी है। विधानसभा चुनाव में उनकी वापसी नहीं होने वाली। बिहार में एसआईआर प्रक्रिया सफल रही है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई वैध मतदाता छूटे नहीं और कोई अवैध मतदाता शामिल न हो।
उन्होंने कहा कि बंगाल में अवैध मतदाताओं की संख्या अधिक है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार के बाद बंगाल में भी एसआईआर प्रक्रिया लागू होगी।
बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सभी को पर्याप्त अवसर दिए गए हैं और छूटे हुए नाम जोड़े जा चुके हैं। अब यह मुद्दा जमीनी स्तर पर नहीं है। विपक्षी नेताओं को भी यह बात पता है, यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई तक किसी भी दल ने औपचारिक आपत्ति नहीं दर्ज की।