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क्या बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर नीलम गोरहे ने साझा की यादें?

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क्या बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर नीलम गोरहे ने साझा की यादें?

सारांश

पुणे में बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर नीलम गोरहे ने उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अगर बालासाहेब आज जीवित होते, तो राजनीति को नई ऊंचाई देते। जानिए उनकी यादों में बालासाहेब की क्या खासियत थी।

मुख्य बातें

बालासाहेब ठाकरे का योगदान अनमोल था।
उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा को मजबूत किया।
नीलम गोरहे ने बालासाहेब के साथ अपने अनुभव साझा किए।
उनका मानना था कि समाज के लिए काम करना अधिक महत्वपूर्ण है।
बालासाहेब ठाकरे का दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है।

पुणे, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने उन्हें स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे से उन्हें पिछले 28 वर्षों से सीखने का अवसर मिला।

नीलम गोरहे ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "बालासाहेब ठाकरे एक महान नेता थे। उन्होंने हिंदुत्व के माध्यम से राष्ट्रवाद की अवधारणा को स्पष्ट किया और अपनी विचारधारा में महाराष्ट्र, मराठी मानुष और छत्रपति शिवाजी महाराज की धरोहर को महत्व दिया।"

उन्होंने आगे बताया कि बालासाहेब का मानना था कि जीवन का 80 प्रतिशत भाग सामाजिक कार्यों में और केवल 20 प्रतिशत राजनीति में होना चाहिए।

नीलम गोरहे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे को उनके कार्टून के लिए विश्वभर में सराहा जाता था। इसके साथ ही उन्हें क्रिकेट, कला, साहित्य और संगीत में गहरी रुचि थी, जो उनकी बहुआयामी सोच को दर्शाती है।

उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा, "अगर बालासाहेब आज हमारे बीच होते, तो वे भारत और महाराष्ट्र की राजनीति को नई ऊँचाइयों पर ले जाते। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी थे।"

नीलम गोरहे ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब बालासाहेब पुणे आए थे, तब उन्होंने उनसे शाम को एक सम्मान समारोह आयोजित करने की अनुमति मांगी। बालासाहेब ने पहले पूछा कि ऐसा क्यों करना चाहती हैं और उनकी योजना क्या है, लेकिन बाद में सहमति दे दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई छोटे-छोटे क्षण थे जो यह दर्शाते हैं कि बालासाहेब कितने सतर्क और ध्यान देने वाले व्यक्ति थे। वे आशीर्वाद भी देते थे और गलतियों को सुधारने के लिए सलाह भी देते थे।

नीलम गोरहे ने बताया कि उनके पिता का निधन 2011 में हुआ था। उन्होंने कहा, "मेरे पिता चाहते थे कि मैं शिवसेना के साथ जुड़ी रहूं। जब उनके जाने के बाद बालासाहेब को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने मुझे फोन कर कहा, 'देखो, हम सब तुम्हारे साथ हैं। यह मत समझो कि तुम अकेली हो।'"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि बालासाहेब ठाकरे का योगदान भारतीय राजनीति में अद्वितीय रहा है। उनकी विचारधारा और नेतृत्व ने कई लोगों को प्रेरित किया है। आज के संदर्भ में, उनकी सोच और दृष्टिकोण को समझना महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालासाहेब ठाकरे का योगदान क्या था?
बालासाहेब ठाकरे ने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की विचारधारा को प्रस्तुत किया। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
नीलम गोरहे ने बालासाहेब के बारे में क्या कहा?
नीलम गोरहे ने बताया कि बालासाहेब एक मार्गदर्शक थे और अगर वे आज होते, तो राजनीति को नई ऊंचाई देते।
राष्ट्र प्रेस
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