नीमराना कबाड़ गोदाम में भीषण आग: 7 साल की मासूम समेत 4 लोग जिंदा जले, विस्फोट से दहशत

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नीमराना कबाड़ गोदाम में भीषण आग: 7 साल की मासूम समेत 4 लोग जिंदा जले, विस्फोट से दहशत

सारांश

नीमराना के कबाड़ गोदाम में शनिवार रात भड़की भीषण आग और विस्फोट ने 7 साल की मासूम सहित 4 मजदूरों की जान ले ली। गेट पर खड़े ट्रक में आग लगने से निकासी का रास्ता बंद हो गया। 2 मजदूर अभी भी लापता, FSL जांच जारी।

Key Takeaways

  • 25 अप्रैल, शनिवार रात को नीमराना, जयपुर के मोहलाडिया गांव, बिचपुरी रोड स्थित कबाड़ गोदाम में भीषण आग लगी।
  • 7 वर्षीय बच्ची सहित 4 लोगों की मौत हुई, जिनके शव सरकारी अस्पताल भेजे गए।
  • गोदाम के गेट पर खड़े ट्रक में आग लगने से मजदूरों का निकासी मार्ग बंद हो गया, जिससे वे फंस गए।
  • आग पास की प्लास्टिक ग्रेन्यूल फैक्ट्री तक फैली और जोरदार विस्फोट ने तबाही को और बढ़ाया।
  • दो मजदूर अभी भी लापता हैं, मृतकों की पहचान के लिए डीएनए नमूने लिए जाएंगे।
  • प्रारंभिक जांच में गोदाम में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था का अभाव सामने आया, FSL टीम जांच में जुटी है।

जयपुर, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नीमराना के मोहलाडिया गांव, बिचपुरी रोड स्थित एक कबाड़ गोदाम में शनिवार देर रात भड़की भीषण आग ने 7 वर्षीय मासूम बच्ची सहित चार लोगों की जान ले ली। आग की चपेट में आए एक प्लास्टिक ग्रेन्यूल कारखाने में जोरदार विस्फोट होने से पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरातफरी मच गई और आसपास की रिहायशी बस्तियों तक दहशत फैल गई।

कैसे बनी मौत का जाल बनी आग?

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह ने बताया कि चारों शव बरामद कर लिए गए हैं और पूरे इलाके की गहन तलाशी पूरी हो चुकी है। फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने घटनास्थल पर जांच शुरू कर दी है और आग लगने के सटीक कारण का पता लगाया जा रहा है।

गोदाम में खाली इत्र की बोतलों सहित भारी मात्रा में ज्वलनशील कबाड़ सामग्री जमा थी। आग लगने के समय कई मजदूर परिसर के भीतर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मजदूरों ने बाहर निकलने की कोशिश की तो गोदाम के मुख्य द्वार पर खड़े एक ट्रक में भी आग लग गई, जिसने निकासी का एकमात्र रास्ता बंद कर दिया।

फंसे हुए श्रमिकों ने चारदीवारी फांदकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन दीवार की अधिक ऊंचाई के कारण वे सफल नहीं हो सके और कई लोग वहीं जलकर मर गए। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की घोर विफलता को उजागर करती है।

विस्फोट ने बढ़ाई तबाही

आग की लपटें तेजी से उसी परिसर में संचालित प्लास्टिक ग्रेन्यूल निर्माण इकाई तक पहुंच गईं। कारखाने में एक जोरदार विस्फोट हुआ, जिसने आग को और भयावह रूप दे दिया। विस्फोट की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग घरों से बाहर निकल आए।

नीमराना, घिलोथ और जापानी क्षेत्र से कई दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। बचाव अभियान में SDRF और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें भी तैनात की गईं।

लापता मजदूर और पहचान का संकट

स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक दो अन्य मजदूर अभी भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और डीएनए नमूने लिए जाएंगे।

जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। चारों शवों को सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।

अग्निशमन व्यवस्था की घोर लापरवाही

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोदाम और कारखाने में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण मौजूद नहीं थे, जिसके कारण आग इतनी तेजी से फैली। यह कोई पहली घटना नहीं है — राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में इस प्रकार की दुर्घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन अग्निशमन मानकों की अनदेखी जारी रहती है।

गौरतलब है कि नीमराना औद्योगिक क्षेत्र राजस्थान के प्रमुख निवेश केंद्रों में से एक है, जहां जापानी और अन्य विदेशी कंपनियों के साथ-साथ छोटे-बड़े कारखाने संचालित होते हैं। इस क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा मानकों की नियमित जांच न होना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

आलोचकों का कहना है कि जब तक औद्योगिक इकाइयों में फायर ऑडिट अनिवार्य नहीं किया जाएगा और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं होती रहेंगी और मजदूर वर्ग की जानें जाती रहेंगी। आने वाले दिनों में FSL रिपोर्ट और डीएनए परिणाम इस दुखद घटना की पूरी तस्वीर सामने लाएंगे।

Point of View

बल्कि औद्योगिक लापरवाही की एक और कड़वी कीमत है जो मजदूर वर्ग ने चुकाई। राजस्थान जैसे राज्य में जहां 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर निवेशकों को आकर्षित किया जाता है, वहां श्रमिक सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी एक भयावह विरोधाभास है। गोदाम में न पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, न आपातकालीन निकास — यह दर्शाता है कि नियामक निरीक्षण पूरी तरह विफल रहा। जब तक फायर ऑडिट को कागजी खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, ऐसे गोदाम मजदूरों के लिए 'मौत के जाल' बनते रहेंगे।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

नीमराना कबाड़ गोदाम में आग से कितने लोगों की मौत हुई?
नीमराना के मोहलाडिया गांव स्थित कबाड़ गोदाम में लगी भीषण आग में 7 वर्षीय बच्ची सहित 4 लोगों की मौत हो गई। दो अन्य मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नीमराना गोदाम आग में मजदूर बाहर क्यों नहीं निकल पाए?
गोदाम के मुख्य गेट पर खड़े एक ट्रक में भी आग लग गई, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। चारदीवारी की अधिक ऊंचाई के कारण मजदूर दीवार फांदकर भी नहीं निकल सके।
नीमराना गोदाम में आग कैसे लगी?
आग लगने का सटीक कारण अभी अज्ञात है और FSL टीम जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि गोदाम में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था नहीं थी, जिससे आग तेजी से फैली।
नीमराना आग में मृतकों की पहचान कैसे होगी?
मृतकों के शव बुरी तरह जल जाने के कारण डीएनए नमूने लिए जाएंगे। अभी तक किसी भी मृतक की पहचान नहीं हो पाई है।
नीमराना गोदाम आग में राहत कार्य कैसे हुआ?
नीमराना, घिलोथ और जापानी क्षेत्र से कई दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और SDRF व फोरेंसिक टीमें भी तैनात की गईं।
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