नीट एडमिट कार्ड विवाद: नागपुर छात्र को मिला अबू धाबी सेंटर, राहुल गांधी बोले — 'ऐसे सिस्टम को परीक्षा आयोजित करने का अधिकार नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की एक गंभीर प्रशासनिक चूक ने 21 जून 2025 को होने वाली नीट यूजी री-एग्जाम से ठीक पहले बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। नागपुर के एक छात्र — जिनका नाम अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब बताया जा रहा है — के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात) दर्ज था, न कि उनके गृहनगर में। इस घटना ने NTA की कार्यप्रणाली और देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
जब अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब ने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसमें परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी का उल्लेख देखकर वह और उनका परिवार स्तब्ध रह गए। परिजनों के अनुसार, छात्र के पास न तो पासपोर्ट है और न ही विदेश जाकर परीक्षा देने के लिए आवश्यक संसाधन। परीक्षा से महज एक दिन पहले यह जानकारी मिलने से परिवार में गहरी चिंता और मानसिक तनाव का माहौल बन गया।
छात्र ने पिछले करीब एक महीने से परीक्षा की तैयारी की थी। अंतिम समय में इस स्थिति का सामना करने पर वह गहरे मानसिक दबाव में आ गया और कथित तौर पर परीक्षा देने से ही मना करने लगा।
राहुल गांधी की तीखी प्रतिक्रिया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को उठाते हुए NTA और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे और न ही अब कोई समय बचा है। वह रातभर रोता रहा और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है। क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है? आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुंच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ धैर्य परीक्षण कर रही है। जो सिस्टम एक बच्चे को उसके अपने शहर में परीक्षा केंद्र नहीं दे सकता और उल्टा उसे विदेश भेज सकता है, उसे परीक्षा आयोजित करने का कोई अधिकार नहीं है।'
गांधी ने आगे कहा, 'कोटा में मैंने यही कहा था कि यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रह गई है। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली बन गई है। हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वे एक संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था के हकदार हैं और हम उन्हें यह दिलाकर रहेंगे।'
अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
पंजाब से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'खबर है कि नागपुर के एक विद्यार्थी को अबू धाबी में नीट री-टेस्ट सेंटर मिला है और NTA इसे तकनीकी गलती बता रहा है। विद्यार्थी के लिए यह कोई ग्लिच नहीं है। यह वर्षों की कड़ी मेहनत, तनाव, अनिश्चितता और अधर में लटका करियर है। भारत के विद्यार्थी एक पेशेवर परीक्षा प्रणाली के हकदार हैं, न कि हर विवाद के बाद बहाने बनाने वाली व्यवस्था के। जवाबदेही को 'टेक्निकल ग्लिच' के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।'
NTA का जवाब
मामला सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इसे तकनीकी त्रुटि स्वीकार किया। एजेंसी के अनुसार, यह गलती सिस्टम में आई खराबी के कारण हुई और इसे शीघ्र ठीक किया जाएगा। NTA ने छात्र के परिवार को ईमेल के माध्यम से आश्वस्त किया कि संशोधित एडमिट कार्ड शाम तक जारी कर दिया जाएगा, जिसमें सही परीक्षा केंद्र दर्ज होगा।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब NTA पहले से ही नीट-यूजी 2024 के पेपर लीक विवाद को लेकर जाँच के घेरे में है और री-एग्जाम उसी विवाद की परिणति है। आलोचकों का कहना है कि एक के बाद एक प्रशासनिक चूकें NTA की संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
आगे क्या होगा
21 जून को देशभर में एक ही शिफ्ट में आयोजित होने वाली नीट यूजी री-एग्जाम में हजारों छात्र शामिल होने वाले हैं। NTA के आश्वासन के बावजूद, इस घटना ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में छात्रों और अभिभावकों के विश्वास को और कमज़ोर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक NTA की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहेगा।