नीट यूजी 2026: नागपुर के अभ्यर्थी को अबू धाबी परीक्षा केंद्र आवंटित, एनटीए ने माना तकनीकी गलती
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की एक गंभीर प्रशासनिक चूक उस वक्त सामने आई जब नागपुर, महाराष्ट्र के नीट यूजी 2026 अभ्यर्थी अब्दुल्ला के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दर्ज हो गया — जबकि उसने आवेदन में नागपुर, वर्धा और भंडारा को अपनी पसंद के शहरों के रूप में चुना था। यह घटना 20 जून 2026 को उजागर हुई, यानी 21 जून को निर्धारित दोबारा परीक्षा से ठीक एक रात पहले।
क्या हुआ: घटनाक्रम
अब्दुल्ला के पिता मोहम्मद तालिब ने बताया कि उनके बेटे ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान केवल भारतीय शहरों — नागपुर, वर्धा और भंडारा — को परीक्षा केंद्र के रूप में चुना था। इससे पहले हुई नीट परीक्षा में भी अब्दुल्ला को नागपुर में ही केंद्र मिला था और वह परीक्षा बिना किसी बाधा के संपन्न हुई थी। तालिब के अनुसार, उन्होंने कभी भी भारत के बाहर किसी केंद्र के लिए अनुरोध नहीं किया था।
तालिब ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि ऐसा कैसे हुआ। अब सिर्फ एजेंसी ही इसका कारण बता सकती है। हमने परीक्षा के लिए अपनी पसंद के तीन केंद्र चुने थे, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि वे हमें अबू धाबी क्यों भेजना चाहते हैं।'
अभ्यर्थी की मानसिक स्थिति
परिवार ने बताया कि अबू धाबी में केंद्र आवंटन की जानकारी मिलते ही अब्दुल्ला गहरे सदमे में आ गया। तालिब ने कहा, 'अबू धाबी सेंटर के बारे में सुनकर मेरा बेटा सदमे में आ गया। दवा लेने के बाद वह अभी सो रहा है। जब भी हम उससे बात करने की कोशिश करते हैं, वह टूट जाता है और रोने लगता है।' यह ऐसे समय में आया है जब छात्र परीक्षा की तैयारी के अंतिम चरण में था।
एनटीए ने स्वीकारी गलती
तालिब के अनुसार, जब परिवार ने NTA अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने इस गलती को स्वीकार किया और इसे तकनीकी खराबी बताया। अधिकारियों ने परिवार को आश्वस्त किया कि वे उसी शाम 4 बजे दोबारा संपर्क करेंगे और समस्या का समाधान करेंगे। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हों — 2024 में पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए पहले से ही जाँच के दायरे में है।
परिवार की माँग
तमाम परेशानियों के बावजूद परिवार की एकमात्र माँग यह है कि अब्दुल्ला को परीक्षा में बैठने का उचित अवसर मिले। तालिब ने कहा, 'हम बस यही चाहते हैं कि हमारा बेटा परीक्षा में बैठ सके। नतीजा चाहे जो भी हो, वह बाद की बात है।'
आगे क्या होगा
यह मामला उस व्यापक चिंता को रेखांकित करता है जो नीट परीक्षा की पारदर्शिता और एनटीए की प्रशासनिक क्षमता को लेकर देशभर में बनी हुई है। अब नज़रें इस बात पर हैं कि NTA इस तकनीकी गलती को परीक्षा से पहले सुधारती है या नहीं, और क्या अब्दुल्ला को 21 जून 2026 की परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल पाएगा।