27 अगस्त 2026
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नर्मदा परियोजना: नेहरू ने 1964 में रखी नींव, मोदी के कार्यकाल में खुले गेट — अमित शाह

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नर्मदा परियोजना: नेहरू ने 1964 में रखी नींव, मोदी के कार्यकाल में खुले गेट — अमित शाह

सारांश

अमरेली के दुधला में 'गुजरात गौरव सरोवर' के उद्घाटन पर अमित शाह ने नर्मदा परियोजना का पूरा इतिहास सामने रखा — नेहरू की 1964 की नींव से लेकर मोदी के कार्यकाल में खुले गेट तक। साथ ही 1.5 लाख चेक डैम और सौनी योजना जैसी पहलों से गुजरात की जल-क्रांति की कहानी भी सुनाई।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त को अमरेली के दुधला में 'गुजरात गौरव सरोवर' का उद्घाटन किया।
शाह के अनुसार नर्मदा परियोजना की नींव 1964 में जवाहरलाल नेहरू ने रखी, जबकि इसके गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए।
2003 में मुख्यमंत्री मोदी ने एक ही वर्ष में 1.5 लाख चेक डैम बनवाए।
हरिकृष्ण फाउंडेशन के सावजीभाई ढोलकिया ने गगाडिया नदी पुनर्जीवन और 208 झीलों के निर्माण में योगदान दिया।
गुजरात गौरव सरोवर 21 एकड़ में फैला है — 360 मीटर लंबा , 260 मीटर चौड़ा और 4 मीटर गहरा ।

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को अमरेली जिले के दुधला में 'गुजरात गौरव सरोवर' के उद्घाटन समारोह में नर्मदा परियोजना के ऐतिहासिक सफर को रेखांकित किया। शाह ने कहा कि इस परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1964 में रखी थी, जबकि इसके गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए।

नर्मदा परियोजना का ऐतिहासिक सफर

शाह ने कहा, 'नर्मदा प्रोजेक्ट की नींव 1964 में जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। मेरा जन्म भी 1964 में ही हुआ था। इसके गेट तब खुले जब नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री बने।' उन्होंने बताया कि नर्मदा का पानी आखिरकार गुजरात के बड़े हिस्सों तक पहुँचा और बाद में सौराष्ट्रकच्छ में खावड़ा तक भी पहुँचाया गया। इस क्रम में 'सौनी योजना' का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसके तहत नर्मदा का अतिरिक्त पानी सौराष्ट्र के बांधों और नदियों तक पहुँचाया गया।

सूखे से जल सुरक्षा तक का सफर

शाह ने 1985, 1986 और 1987 के भीषण सूखे के वर्षों को याद किया और उस दौर में पानी की कमी व राहत कार्यों की चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी ने पानी बचाने और सिंचाई के कई उपाय शुरू किए। विशेष रूप से उन्होंने बताया कि मोदी ने 2003 में एक ही वर्ष में 1.5 लाख चेक डैम बनाने का काम करवाया।

जल संरक्षण की पहलें

शाह ने राज्य में जल संरक्षण के व्यापक प्रयासों का उल्लेख किया — जिनमें हजारों झीलों का निर्माण और उन्हें भरना, उत्तर गुजरात में 'सुजलाम सुफलाम योजना', ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियाँ और केंद्र का 'कैच द रेन' अभियान शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के केंद्र में पद संभालने के बाद 'जल शक्ति मंत्रालय' के गठन से पानी बचाने के कार्यों पर संस्थागत रूप से अधिक ध्यान दिया गया।

गुजरात गौरव सरोवर और सावजीभाई ढोलकिया की पहल

उद्घाटन समारोह में शाह ने हरिकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया की सराहना की। उन्होंने बताया कि ढोलकिया ने दो वर्ष पूर्व उन्हें इस झील निर्माण की योजना से अवगत कराया था। 21 एकड़ में फैली यह झील 360 मीटर लंबी, 260 मीटर चौड़ी और 4 मीटर गहरी है। शाह ने बताया कि ढोलकिया के अनुसार जल संरक्षण कार्यों के बाद इलाके में भूजल स्तर बढ़ा है और कुएँ पुनः सक्रिय हो गए हैं। ढोलकिया के फाउंडेशन ने गगाडिया नदी को पुनर्जीवित करने और 208 झीलें बनाने में भी योगदान दिया है।

आगे की राह

शाह ने भरोसा जताया कि इस तरह की निजी-सामुदायिक पहलें पूरे सौराष्ट्र और गुजरात में जल संरक्षण के सामूहिक प्रयासों को नई गति देंगी। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों पर ईश्वर की कृपा है, वे निश्चित रूप से पानी बचाने के लिए लोगों के बीच आगे आएंगे।' यह आयोजन गुजरात में सरकारी और सामाजिक स्तर पर जल प्रबंधन की बढ़ती साझेदारी का प्रतीक बनकर उभरा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में, पूरी ऊँचाई तक उठाए गए थे। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि इस परियोजना में दशकों तक कई केंद्र और राज्य सरकारों का योगदान रहा, और विस्थापन का दर्द झेलने वाले लाखों परिवारों का संघर्ष इस कथा में अनुपस्थित रहा। जल संरक्षण की उपलब्धियों का श्रेय एकल नेतृत्व को देने की यह राजनीतिक शैली चुनावी दृष्टि से प्रभावी हो सकती है, पर नीतिगत निरंतरता और सामूहिक प्रयास की जटिलता को सरल बना देती है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नर्मदा परियोजना की नींव कब और किसने रखी थी?
अमित शाह के अनुसार नर्मदा परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1964 में रखी थी। यह परियोजना दशकों तक विभिन्न सरकारों के अधीन चलती रही और इसके गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए।
गुजरात गौरव सरोवर क्या है और यह कहाँ स्थित है?
गुजरात गौरव सरोवर अमरेली जिले के दुधला में स्थित एक झील है, जिसका उद्घाटन 27 अगस्त को अमित शाह ने किया। यह 21 एकड़ में फैली है, 360 मीटर लंबी, 260 मीटर चौड़ी और 4 मीटर गहरी है।
सावजीभाई ढोलकिया और हरिकृष्ण फाउंडेशन का जल संरक्षण में क्या योगदान है?
हरिकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया ने गगाडिया नदी को पुनर्जीवित करने और 208 झीलें बनाने में योगदान दिया है। अमित शाह ने बताया कि इन प्रयासों के बाद इलाके में भूजल स्तर बढ़ा है और कुएँ पुनः सक्रिय हो गए हैं।
मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते जल संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए?
अमित शाह के अनुसार 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने जल संरक्षण और सिंचाई के कई उपाय शुरू किए। 2003 में एक ही वर्ष में 1.5 लाख चेक डैम बनाए गए और 'सुजलाम सुफलाम योजना' के तहत उत्तर गुजरात में जल वितरण को मजबूत किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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