नर्मदा परियोजना: नेहरू ने 1964 में रखी नींव, मोदी के कार्यकाल में खुले गेट — अमित शाह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को अमरेली जिले के दुधला में 'गुजरात गौरव सरोवर' के उद्घाटन समारोह में नर्मदा परियोजना के ऐतिहासिक सफर को रेखांकित किया। शाह ने कहा कि इस परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1964 में रखी थी, जबकि इसके गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए।
नर्मदा परियोजना का ऐतिहासिक सफर
शाह ने कहा, 'नर्मदा प्रोजेक्ट की नींव 1964 में जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। मेरा जन्म भी 1964 में ही हुआ था। इसके गेट तब खुले जब नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री बने।' उन्होंने बताया कि नर्मदा का पानी आखिरकार गुजरात के बड़े हिस्सों तक पहुँचा और बाद में सौराष्ट्र व कच्छ में खावड़ा तक भी पहुँचाया गया। इस क्रम में 'सौनी योजना' का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसके तहत नर्मदा का अतिरिक्त पानी सौराष्ट्र के बांधों और नदियों तक पहुँचाया गया।
सूखे से जल सुरक्षा तक का सफर
शाह ने 1985, 1986 और 1987 के भीषण सूखे के वर्षों को याद किया और उस दौर में पानी की कमी व राहत कार्यों की चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी ने पानी बचाने और सिंचाई के कई उपाय शुरू किए। विशेष रूप से उन्होंने बताया कि मोदी ने 2003 में एक ही वर्ष में 1.5 लाख चेक डैम बनाने का काम करवाया।
जल संरक्षण की पहलें
शाह ने राज्य में जल संरक्षण के व्यापक प्रयासों का उल्लेख किया — जिनमें हजारों झीलों का निर्माण और उन्हें भरना, उत्तर गुजरात में 'सुजलाम सुफलाम योजना', ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियाँ और केंद्र का 'कैच द रेन' अभियान शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के केंद्र में पद संभालने के बाद 'जल शक्ति मंत्रालय' के गठन से पानी बचाने के कार्यों पर संस्थागत रूप से अधिक ध्यान दिया गया।
गुजरात गौरव सरोवर और सावजीभाई ढोलकिया की पहल
उद्घाटन समारोह में शाह ने हरिकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया की सराहना की। उन्होंने बताया कि ढोलकिया ने दो वर्ष पूर्व उन्हें इस झील निर्माण की योजना से अवगत कराया था। 21 एकड़ में फैली यह झील 360 मीटर लंबी, 260 मीटर चौड़ी और 4 मीटर गहरी है। शाह ने बताया कि ढोलकिया के अनुसार जल संरक्षण कार्यों के बाद इलाके में भूजल स्तर बढ़ा है और कुएँ पुनः सक्रिय हो गए हैं। ढोलकिया के फाउंडेशन ने गगाडिया नदी को पुनर्जीवित करने और 208 झीलें बनाने में भी योगदान दिया है।
आगे की राह
शाह ने भरोसा जताया कि इस तरह की निजी-सामुदायिक पहलें पूरे सौराष्ट्र और गुजरात में जल संरक्षण के सामूहिक प्रयासों को नई गति देंगी। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों पर ईश्वर की कृपा है, वे निश्चित रूप से पानी बचाने के लिए लोगों के बीच आगे आएंगे।' यह आयोजन गुजरात में सरकारी और सामाजिक स्तर पर जल प्रबंधन की बढ़ती साझेदारी का प्रतीक बनकर उभरा है।