27 अगस्त 2026
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पद्म पुरस्कार परिवार या जान-पहचान के लिए नहीं — अमित शाह ने अमरेली में स्पष्ट किया

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पद्म पुरस्कार परिवार या जान-पहचान के लिए नहीं — अमित शाह ने अमरेली में स्पष्ट किया

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने अमरेली में दो-टूक कहा — पद्म पुरस्कार परिवार या जान-पहचान की देन नहीं हैं। सावजीभाई ढोलकिया की 208 झीलों वाली जल संरक्षण यात्रा को उदाहरण बनाते हुए शाह ने बताया कि निःस्वार्थ सेवा ही इन राष्ट्रीय सम्मानों की असली कसौटी है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त को अमरेली, गुजरात में स्पष्ट किया कि पद्म पुरस्कार पारिवारिक संबंधों या जान-पहचान के आधार पर नहीं दिए जाते।
समाजसेवी सावजीभाई ढोलकिया को 2022 में पद्म श्री मिला, जबकि उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था।
ढोलकिया ने सौराष्ट्र में 208 झीलों का निर्माण कर जल संरक्षण की संस्कृति विकसित की।
शाह ने ढोलकिया फाउंडेशन से सामाजिक पहल को 250 से बढ़ाकर 1,100 गाँवों तक ले जाने का आग्रह किया।
गुजरात गौरव सरोवर के उद्घाटन समारोह में शाह ने धन के सामाजिक सदुपयोग पर भी ज़ोर दिया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गाँव में स्पष्ट किया कि पद्म पुरस्कार परिवारजनों, रिश्तेदारों या व्यक्तिगत जान-पहचान के आधार पर नहीं दिए जाते — ये सम्मान उन लोगों के लिए हैं जिन्होंने बिना किसी यश की चाहत के अपना जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया। शाह 'गुजरात गौरव सरोवर' के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे, जहाँ उन्होंने समाजसेवी सावजीभाई ढोलकिया के जल संरक्षण कार्यों की विशेष सराहना की।

सावजीभाई ढोलकिया और पद्म श्री की कहानी

शाह ने बताया कि सावजीभाई ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने पद्म श्री के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इस पर शाह ने कहा, 'सावजीभाई, 208 झीलों के ज़रिए जल संरक्षण के लिए इतना काम करने के बाद भी अगर आपको आवेदन करना पड़े, तो हमारी सरकार को बेकार माना जाएगा।' केंद्र सरकार ने सावजी ढोलकिया को 2022 में समाज सेवा के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था। उन्हें मार्च 2022 में राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों यह सम्मान प्राप्त हुआ था।

पद्म पुरस्कारों का असली उद्देश्य

शाह ने दो-टूक कहा कि पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न — ये सभी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान उन लोगों के लिए हैं जो बिना प्रशंसा की अपेक्षा किए, अपना पूरा जीवन देश के गरीबों और आम जनता की सेवा में लगा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये पुरस्कार न तो पारिवारिक संबंधों के लिए हैं और न ही व्यक्तिगत परिचय के आधार पर दिए जाते हैं।

208 झीलें और सौराष्ट्र में जल संरक्षण की संस्कृति

हरी कृष्णा एक्सपोर्ट्स के संस्थापक और चेयरमैन सावजी ढोलकिया को उनके परोपकारी कार्यों — विशेषकर गुजरात के पानी की कमी वाले इलाकों में 208 झीलों के निर्माण — के लिए पहचाना गया है। शाह के अनुसार, इस पहल का असर व्यक्तिगत परियोजनाओं से कहीं आगे गया और इसने सौराष्ट्र में जल संरक्षण की एक व्यापक सामुदायिक संस्कृति को बढ़ावा दिया।

ढोलकिया फाउंडेशन की सामाजिक पहल

शाह ने राज्यसभा सांसद गोविंद ढोलकिया के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि ढोलकिया परिवार के फाउंडेशन ने दक्षिण गुजरात के सैकड़ों गाँवों में हनुमान मंदिरों का निर्माण, सत्संग कार्यक्रमों का आयोजन और स्कूलों की स्थापना जैसे कार्य किए हैं। उन्होंने इस समूह से आग्रह किया कि वे इस पहल को 250 गाँवों से बढ़ाकर 1,100 गाँवों तक विस्तारित करें।

आदिवासी बच्चों से प्रेरणा और धन के सदुपयोग का संदेश

शाह ने बताया कि आदिवासी परिवारों के बच्चों को संस्कृत श्लोक और दुर्गा स्तवन का पाठ करते देख वे बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने ढोलकिया परिवार की समाज सेवा की सोच को रेखांकित करते हुए कहा, 'पैसा ईश्वर और देवी लक्ष्मी की कृपा है जो बहुत से लोगों को मिलती है। लेकिन जब आप लक्ष्मी को बेटी मानकर किसी और के घर भेजते हैं, तभी यह कहा जा सकता है कि आपने सचमुच लक्ष्मी की पूजा की है।' यह संबोधन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार पद्म पुरस्कार प्रक्रिया की पारदर्शिता और योग्यता-आधारित चयन पर ज़ोर देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एकल उदाहरण पूरी प्रणाली की पारदर्शिता का प्रमाण नहीं बन सकता। असली परीक्षा यह है कि नामांकन प्रक्रिया कितनी खुली है और क्या सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले गुमनाम सेवकों तक यह पहुँच पाती है। जब तक चयन की पूरी कार्यप्रणाली सार्वजनिक नहीं होती, मंत्री का यह आश्वासन नीयत की घोषणा तो है, पर जवाबदेही का ढाँचा नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने पद्म पुरस्कारों के बारे में क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त को अमरेली में कहा कि पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न जैसे राष्ट्रीय सम्मान परिवार, रिश्तेदारों या व्यक्तिगत जान-पहचान के आधार पर नहीं दिए जाते। ये पुरस्कार उन लोगों के लिए हैं जो बिना यश की चाहत के जनसेवा में जीवन लगा देते हैं।
सावजीभाई ढोलकिया को पद्म श्री क्यों मिला?
सावजी ढोलकिया को केंद्र सरकार ने 2022 में समाज सेवा के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्होंने सौराष्ट्र, गुजरात में 208 झीलों का निर्माण कर जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया और हरी कृष्णा एक्सपोर्ट्स के संस्थापक के रूप में सामुदायिक कल्याण में भी सक्रिय रहे।
गुजरात गौरव सरोवर क्या है और इसका उद्घाटन कहाँ हुआ?
गुजरात गौरव सरोवर एक जल संरक्षण परियोजना है जिसका उद्घाटन 27 अगस्त को अमरेली जिले के दुधला गाँव में हुआ। इस समारोह में गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि थे।
ढोलकिया फाउंडेशन ने दक्षिण गुजरात में क्या कार्य किए हैं?
ढोलकिया परिवार के फाउंडेशन ने दक्षिण गुजरात के गाँवों में हनुमान मंदिरों का निर्माण, शनिवार को सुंदरकांड कार्यक्रमों का आयोजन और स्कूलों की स्थापना जैसे कार्य किए हैं। शाह ने इस फाउंडेशन से इन पहलों को 250 गाँवों से बढ़ाकर 1,100 गाँवों तक विस्तारित करने का आग्रह किया।
पद्म पुरस्कारों के लिए चयन कैसे होता है?
पद्म पुरस्कारों का चयन एक समिति द्वारा किया जाता है और नागरिक स्वयं या संस्थाएँ नामांकन कर सकती हैं। शाह के अनुसार, सरकार उन लोगों की पहचान करती है जो बिना आवेदन किए भी असाधारण जनसेवा करते हैं — जैसा सावजीभाई ढोलकिया के मामले में हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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