पद्म पुरस्कार परिवार या जान-पहचान के लिए नहीं — अमित शाह ने अमरेली में स्पष्ट किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गाँव में स्पष्ट किया कि पद्म पुरस्कार परिवारजनों, रिश्तेदारों या व्यक्तिगत जान-पहचान के आधार पर नहीं दिए जाते — ये सम्मान उन लोगों के लिए हैं जिन्होंने बिना किसी यश की चाहत के अपना जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया। शाह 'गुजरात गौरव सरोवर' के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे, जहाँ उन्होंने समाजसेवी सावजीभाई ढोलकिया के जल संरक्षण कार्यों की विशेष सराहना की।
सावजीभाई ढोलकिया और पद्म श्री की कहानी
शाह ने बताया कि सावजीभाई ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने पद्म श्री के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इस पर शाह ने कहा, 'सावजीभाई, 208 झीलों के ज़रिए जल संरक्षण के लिए इतना काम करने के बाद भी अगर आपको आवेदन करना पड़े, तो हमारी सरकार को बेकार माना जाएगा।' केंद्र सरकार ने सावजी ढोलकिया को 2022 में समाज सेवा के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था। उन्हें मार्च 2022 में राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों यह सम्मान प्राप्त हुआ था।
पद्म पुरस्कारों का असली उद्देश्य
शाह ने दो-टूक कहा कि पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न — ये सभी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान उन लोगों के लिए हैं जो बिना प्रशंसा की अपेक्षा किए, अपना पूरा जीवन देश के गरीबों और आम जनता की सेवा में लगा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये पुरस्कार न तो पारिवारिक संबंधों के लिए हैं और न ही व्यक्तिगत परिचय के आधार पर दिए जाते हैं।
208 झीलें और सौराष्ट्र में जल संरक्षण की संस्कृति
हरी कृष्णा एक्सपोर्ट्स के संस्थापक और चेयरमैन सावजी ढोलकिया को उनके परोपकारी कार्यों — विशेषकर गुजरात के पानी की कमी वाले इलाकों में 208 झीलों के निर्माण — के लिए पहचाना गया है। शाह के अनुसार, इस पहल का असर व्यक्तिगत परियोजनाओं से कहीं आगे गया और इसने सौराष्ट्र में जल संरक्षण की एक व्यापक सामुदायिक संस्कृति को बढ़ावा दिया।
ढोलकिया फाउंडेशन की सामाजिक पहल
शाह ने राज्यसभा सांसद गोविंद ढोलकिया के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि ढोलकिया परिवार के फाउंडेशन ने दक्षिण गुजरात के सैकड़ों गाँवों में हनुमान मंदिरों का निर्माण, सत्संग कार्यक्रमों का आयोजन और स्कूलों की स्थापना जैसे कार्य किए हैं। उन्होंने इस समूह से आग्रह किया कि वे इस पहल को 250 गाँवों से बढ़ाकर 1,100 गाँवों तक विस्तारित करें।
आदिवासी बच्चों से प्रेरणा और धन के सदुपयोग का संदेश
शाह ने बताया कि आदिवासी परिवारों के बच्चों को संस्कृत श्लोक और दुर्गा स्तवन का पाठ करते देख वे बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने ढोलकिया परिवार की समाज सेवा की सोच को रेखांकित करते हुए कहा, 'पैसा ईश्वर और देवी लक्ष्मी की कृपा है जो बहुत से लोगों को मिलती है। लेकिन जब आप लक्ष्मी को बेटी मानकर किसी और के घर भेजते हैं, तभी यह कहा जा सकता है कि आपने सचमुच लक्ष्मी की पूजा की है।' यह संबोधन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार पद्म पुरस्कार प्रक्रिया की पारदर्शिता और योग्यता-आधारित चयन पर ज़ोर देती रहेगी।