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नेपाल में नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए आयोग का गठन

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नेपाल में नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए आयोग का गठन

सारांश

नेपाल सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच प्रमुख नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए आयोग बनाने की घोषणा की है। यह कदम देश में बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बातें

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच आयोग की अध्यक्षता पूर्व जज करेंगे जांच निष्पक्ष और सबूतों के आधार पर होगी जनता का विश्वास बढ़ाने का प्रयास

काठमांडू, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत पिछले दो दशकों में शासन में रहे प्रमुख नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया जाएगा। यह कदम बढ़ते भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उठाया गया है।

बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 2006 से अब तक सत्ता में रहने वाले व्यक्तियों की संपत्ति की जांच की जाएगी। 2006 वही वर्ष था जब दूसरे जनआंदोलन के बाद तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र शाह की 'निरंकुश' सरकार का पतन हुआ था।

इस दौरान नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और माओवादी केंद्र जैसी पार्टियों ने देश का संचालन किया। इन दलों के नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर काफी संपत्ति जमा की।

पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की भी जांच चल रही है।

सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज राजेन्द्र कुमार भंडारी करेंगे। यह आयोग 2006 से 2026 तक सत्ता में रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी जुटाएगा, उसकी जांच करेगा और उसे सत्यापित करेगा।

यह निर्णय प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह की नई सरकार के 100 सूत्रीय सुधार एजेंडे का हिस्सा है। 27 मार्च को की गई घोषणा के अनुसार, पहले 2006 से 2026 तक के मामलों की जांच होगी, और उसके बाद दूसरे चरण में 1992 से 2006 तक के मामलों की समीक्षा की जाएगी।

पोखरेल ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से, सबूतों के आधार पर की जाएगी और आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ जनता की नाराजगी स्पष्ट रूप से देखी गई थी। इन्हीं प्रदर्शन के कारण केपी शर्मा ओली की सरकार का पतन हुआ था।

इसके बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया गया, जिसने पांच मार्च को चुनाव कराए। इन चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया। अब इस पार्टी के नेता बलेन्द्र शाह प्रधानमंत्री हैं और उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कई कठोर कदम उठा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इससे जनता के बीच विश्वास भी बढ़ेगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस आयोग का गठन क्यों किया गया है?
यह आयोग भ्रष्टाचार के बढ़ते आरोपों के बीच नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए बनाया गया है।
आयोग किसकी अध्यक्षता में कार्य करेगा?
आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज राजेन्द्र कुमार भंडारी करेंगे।
यह जांच कब तक चलेगी?
यह जांच 2006 से 2026 तक के मामलों की जांच करेगी, उसके बाद 1992 से 2006 तक के मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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