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क्या नेपाल में जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के देश छोड़ने पर रोक लगाई?

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क्या नेपाल में जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के देश छोड़ने पर रोक लगाई?

सारांश

नेपाल में जनरेशन-जेड विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रहे आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक पर देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। जानिए इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे की वजह और इससे नेपाल की राजनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है।

मुख्य बातें

जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के विदेश जाने पर रोक लगाई है।
जनरेशन-जेड विरोध प्रदर्शनों में हिंसा का बड़ा मामला सामने आया है।
आयोग को मानवीय और भौतिक क्षति का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक स्थिति में संभावित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सरकार और आयोग पर तथ्यों को उजागर करने का दबाव है।

काठमांडू, 28 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में हाल ही में हुए जनरेशन-जेड (जेन-जेड) विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए शारीरिक, मानवीय और भौतिक नुकसान की जांच कर रहे आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है।

जांच आयोग ने रविवार को जारी बयान में कहा कि उसने संबंधित सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि ओली और लेखक के अलावा पूर्व गृह सचिव गोकर्ण मणि दुवादी, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छवि रिजाल की विदेश यात्रा पर भी प्रतिबंध लगाया जाए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि ये सभी लोग जांच के दायरे में हैं और किसी भी समय पूछताछ के लिए बुलाए जा सकते हैं, इसीलिए इन्हें न केवल विदेश जाने से, बल्कि बिना अनुमति काठमांडू घाटी छोड़ने से भी रोका गया है।

गौरतलब है कि 8 और 9 सितंबर को हुए जनजातीय विरोध प्रदर्शनों के पहले दिन पुलिस गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई थी। आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़कर 70 से अधिक हो गई, क्योंकि कई घायलों ने दम तोड़ दिया और आगजनी की घटनाओं में भी लोगों की जान गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इन मौतों और हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

पिछले हफ्ते गठित इस जांच आयोग की अध्यक्षता पूर्व विशेष न्यायालय अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं। आयोग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह मानवीय और भौतिक क्षति का आकलन करे, घटनाओं के कारणों की पहचान करे और अपने निर्णायक निष्कर्षों के साथ सिफारिश पेश करे। इसके अलावा आयोग को अपनी सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना भी प्रस्तुत करनी होगी।

जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल में राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की वर्तमान में अंतरिम सरकार की अगुवाई कर रही हैं। इस सरकार का प्रमुख दायित्व अगले साल 5 मार्च 2026 को प्रस्तावित प्रतिनिधि सभा चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न कराना है।

जांच आयोग का गठन सरकार और जनरेशन जेड आंदोलन के नेताओं के बीच हुई सहमति का हिस्सा है, ताकि हिंसा और उससे जुड़े नुकसानों की जवाबदेही तय की जा सके।

शहरी विकास मंत्रालय के प्रारंभिक अध्ययन के मुताबिक, तोड़फोड़ और आगजनी से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को 100 अरब नेपाली रुपए से अधिक का नुकसान पहुंचा है। साथ ही 380 संघीय सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

वहीं, निजी क्षेत्र की सर्वोच्च संस्था फेडरेशन ऑफ नेपाली चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अनुमान लगाया है कि निजी संपत्तियों को 80 अरब नेपाली रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

इन घटनाओं के बाद नेपाल सरकार और जांच आयोग पर यह दबाव बढ़ गया है कि वे जल्द से जल्द तथ्यों को उजागर करें और जिम्मेदार व्यक्तियों को कटघरे में खड़ा करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि नेपाल में होने वाले घटनाक्रमों से लोकतंत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। आयोग की कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी जरूरी है कि सभी पक्षों को न्याय मिले। जनहित में सही निर्णय लेना आवश्यक है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जांच आयोग ने केवल केपी ओली पर ही रोक लगाई है?
नहीं, आयोग ने केपी ओली के साथ-साथ अन्य प्रमुख व्यक्तियों पर भी देश छोड़ने पर रोक लगाई है।
जनरेशन-जेड विरोध प्रदर्शनों में कितने लोग मारे गए?
प्रारंभ में 19 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन यह संख्या बाद में 70 से अधिक हो गई।
आयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आयोग का उद्देश्य मानवीय और भौतिक क्षति का आकलन करना है और जिम्मेदार व्यक्तियों को चिन्हित करना है।
क्या सरकार पर इस जांच का कोई दबाव है?
हाँ, सरकार और जांच आयोग पर यह दबाव है कि वे जल्द से जल्द तथ्यों को उजागर करें।
नेपाल में राजनीतिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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