निर्मला सीतारमण: कांग्रेस परिवार से BJP तक का सफर, 9 बजट और इतिहास के कई कीर्तिमान
सारांश
मुख्य बातें
निर्मला सीतारमण — भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री — का राजनीतिक सफर उतना ही असाधारण है जितना उनके फैसले। एक कांग्रेस समर्थक परिवार में पली-बढ़ीं, कांग्रेस समर्थक ससुराल में ब्याही गईं, और फिर 2008 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामकर भारतीय राजनीति में एक नई इबारत लिख दी। रक्षा मंत्री के रूप में बालाकोट एयर स्ट्राइक की रणनीतिक पृष्ठभूमि तय करने से लेकर लगातार नौ केंद्रीय बजट पेश करने तक, उनके कार्यकाल ने कई ऐतिहासिक मील के पत्थर स्थापित किए हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
18 अगस्त 1959 को तमिलनाडु के मदुरै में जन्मी निर्मला सीतारमण का बचपन राज्य के विभिन्न हिस्सों में बीता, क्योंकि उनके पिता रेलवे में कार्यरत थे और उनका स्थानांतरण होता रहता था। उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सीतालक्ष्मी रामासामी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की, जहाँ वैश्वीकरण (Globalisation) उनका प्रिय विषय रहा।
कांग्रेस परिवार से BJP तक का सफर
रिपोर्टों के अनुसार, निर्मला सीतारमण का मायका और ससुराल, दोनों परिवार कांग्रेस के समर्थक थे। बावजूद इसके, जब राजनीतिक करियर चुनने का समय आया, तो उन्होंने 2008 में BJP को चुना। इससे पहले, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें 2003 में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सदस्य नियुक्त किया था। वह 2005 तक इस पद पर रहीं। NCW में कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज से उनका परिचय हुआ, जिन्होंने BJP में उनके नाम की सिफारिश की। एक वर्ष बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
2010 में, जब नितिन गडकरी BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब निर्मला सीतारमण को पार्टी का प्रवक्ता नियुक्त किया गया। वह उस प्रवक्ता दल का हिस्सा थीं जिसका नेतृत्व रविशंकर प्रसाद करते थे। हर विपरीत परिस्थिति में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखना उनकी पहचान बनी।
मंत्रिमंडल में प्रवेश और रक्षा मंत्री का कार्यकाल
2014 के आम चुनावों में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया। इसके बाद सितंबर 2017 में उन्हें रक्षा मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया। इस तरह वह इंदिरा गांधी के बाद भारत की दूसरी महिला रक्षा मंत्री बनीं — उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी ने यह पद दो बार सँभाला था।
रक्षा मंत्री के रूप में उन्हें रक्षा खरीद प्रक्रिया को गति देने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने देश की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक रक्षा योजना समिति का गठन किया। बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान रणनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही। एक दिलचस्प संयोग यह भी रहा कि जब JNU परिसर में 'राष्ट्र-विरोधी' नारेबाजी की घटनाओं के बाद तत्कालीन कुलपति एम. जगदीश कुमार ने सरकार से विश्वविद्यालय के लिए एक आर्मी टैंक की माँग की, तब JNU की पूर्व छात्रा निर्मला सीतारमण ही देश की रक्षा मंत्री थीं।
पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री और रिकॉर्डों की झड़ी
जब 2019 में दूसरी बार मोदी सरकार बनी, तो निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री का पद सौंपा गया। वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनीं — इंदिरा गांधी के पास यह पद अतिरिक्त प्रभार के रूप में था। वित्त मंत्री के रूप में उनके नाम कई उल्लेखनीय कीर्तिमान दर्ज हैं:
उन्होंने लगातार नौ केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया। 1 फरवरी 2020 को उन्होंने 2 घंटे 42 मिनट का अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण दिया। इसके अतिरिक्त, 2019 में बजट दस्तावेजों को पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह पारंपरिक लाल 'बही-खाता' में प्रस्तुत करने की नई परंपरा शुरू करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।
आगे की राह
निर्मला सीतारमण वर्तमान में भी वित्त मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि राजनीतिक विरासत से परे, व्यक्तिगत निर्णय और कार्यक्षमता किसी भी नेता की पहचान तय करती है। आने वाले समय में उनकी आर्थिक नीतियाँ और राजकोषीय दिशा भारत के विकास पथ को आकार देती रहेंगी।