निशिकांत दुबे का आरोप: राहुल गांधी विदेशी ताकतों संग 'रिजीम चेंज' की साजिश रच रहे हैं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 22 अक्टूबर 2026 को झारखंड की उपराजधानी दुमका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी चेहरों पर विदेशी ताकतों से सांठगांठ कर देश में 'रिजीम चेंज' की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह कथित षड्यंत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन और ऑनलाइन गैंबलिंग से जुड़े आर्थिक नेटवर्क के ज़रिए देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को कमज़ोर करने की एक सुनियोजित कोशिश है।
मुख्य आरोप और दावे
दुबे ने दावा किया कि राहुल गांधी ने पिछले 10 वर्षों में लगभग 270 बार विदेश यात्राएँ की हैं। उनके अनुसार, इन यात्राओं के दौरान राहुल गांधी किन लोगों से मिले, किनसे संपर्क हुआ और भारत जोड़ो यात्रा में कौन-कौन से व्यक्ति शामिल हुए — इन सभी पहलुओं की विधिवत जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि इन संपर्कों का उपयोग देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
भाजपा सांसद ने अमेरिका में सामने आई कांग्रेस से जुड़ी एक कथित रिपोर्ट और नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने बिटकॉइन, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन गैंबलिंग से जुड़े आर्थिक तंत्र पर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि इन माध्यमों से भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने और राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा सकती है।
आंदोलन और विपक्षी चेहरों पर निशाना
दुबे ने हाल के विरोध प्रदर्शनों को 'जेन जी' आंदोलन बताए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कथित हाईकोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों की उम्र और पृष्ठभूमि पर टिप्पणी की। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि 'केवल टी-शर्ट और जींस पहनने से कोई युवा नहीं हो जाता।'
उन्होंने प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और वृंदा करात जैसे नामों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ये चेहरे लंबे समय से विभिन्न आंदोलनों में निरंतर दिखते आए हैं। उनका दावा था कि इस कथित साजिश का अंतिम उद्देश्य भारत में सत्ता-परिवर्तन के साथ-साथ देश की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करना है।
विदेशी तत्वों और देश-विरोधी गतिविधियों का आरोप
भाजपा सांसद ने जाकिर नाइक, खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़े गुरपतवंत सिंह पन्नू और अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम का नाम लेते हुए दावा किया कि इन लोगों ने कथित आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी धरती से सक्रिय ऐसे तत्व भारत में धार्मिक और जातीय आधार पर विभाजन पैदा करना चाहते हैं।
दुबे ने यह भी चेताया कि इस कथित आंदोलन का मकसद भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसी राजनीतिक परिस्थितियों की ओर धकेलना है — यानी राष्ट्रीय अस्थिरता की एक ऐसी स्थिति जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करे।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
गौरतलब है कि यह बयान झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी के बीच आया है। दुबे के ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं और अभी तक कांग्रेस या अन्य उल्लिखित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सरकार के बीच आंदोलन की वैधता और उसके वित्तपोषण को लेकर बहस तेज़ हो रही है। इन आरोपों की पुष्टि या खंडन स्वतंत्र जाँच पर निर्भर करेगा।