26 अक्टूबर 2026
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निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला: 'लगातार हार से उबर न पाने पर अभद्र भाषा का सहारा'

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निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला: 'लगातार हार से उबर न पाने पर अभद्र भाषा का सहारा'

सारांश

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को आईना दिखाया — वाजपेयी और आडवाणी का वह उदाहरण देते हुए जब विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने संसद में इंदिरा गांधी का बचाव किया था। दुबे का सवाल सीधा है: क्या लगातार हार की कुंठा लोकतांत्रिक मर्यादा की बलि ले रही है?

मुख्य बातें

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर लगातार हार से उबर न पाने का आरोप लगाया।
दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत माता-पिता के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियाँ लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।
1971-72 का उदाहरण देते हुए कहा कि वाजपेयी और आडवाणी ने विपक्ष में रहते हुए भी इंदिरा गांधी का संसद में बचाव किया था।
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में भी कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने में नाकाम रही: दुबे।
मानहानि मामले में राहुल गांधी के बरी होने पर भी दुबे ने सवाल खड़े किए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखे आरोप लगाए। दुबे ने कहा कि लगातार चुनावी पराजय से उबर न पाने के कारण कांग्रेस अब अभद्र भाषा का सहारा ले रही है। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।

मुख्य आरोप और बयान

दुबे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत माता-पिता के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक नेता के परिवार के सदस्यों के बारे में इस प्रकार की भाषा का उपयोग न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं के भी खिलाफ है।

ऐतिहासिक संदर्भ: वाजपेयी और इंदिरा गांधी का उदाहरण

भाजपा सांसद ने 1971-72 के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध के बाद तत्कालीन अमेरिकी नेताओं हेनरी किसिंजर और रिचर्ड निक्सन ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। उस समय विपक्ष में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने संसद में इंदिरा गांधी का पक्ष लिया था। दुबे का तर्क था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रधानमंत्री पद की गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस के नेतृत्व पर निशाना

दुबे ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर राहुल गांधी तक पार्टी का नेतृत्व संभाल रहे हैं, फिर भी कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने में नाकाम रही है। उनके अनुसार, पार्टी का यह पतन उसे लोकतांत्रिक बहस की बजाय आपत्तिजनक भाषा की ओर धकेल रहा है।

मानहानि मामले पर सवाल

भाजपा सांसद ने मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी के बरी होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह मामला गृह मंत्री के विरुद्ध की गई टिप्पणी से जुड़ा था और यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या एक राष्ट्रीय दल के नेता का दूसरे दल के नेता के विरुद्ध इस प्रकार की भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक आचरण के अनुरूप है।

लोकतांत्रिक मर्यादा पर जोर

दुबे ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को अपनी बात रखने तथा सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, 'जब राजनीतिक विरोधी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में असमर्थ महसूस करते हैं, तो वे अभद्र भाषा का सहारा लेते हैं।' यह देखना अब शेष है कि इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच संसद के आगामी सत्र में दोनों पक्षों के बीच बहस का स्तर क्या रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह भाजपा को नैतिक ऊँचाई पर खड़ा करता है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या स्वयं सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं की भाषा हमेशा संसदीय मर्यादा के अनुरूप रही है। असली बहस भाषा की नहीं, जवाबदेही की है — और वह दोनों पक्षों पर लागू होती है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावी हार से उबर नहीं पाई है और इसीलिए वह प्रधानमंत्री तथा उनके परिवार के विरुद्ध अभद्र भाषा का सहारा ले रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया।
दुबे ने वाजपेयी और इंदिरा गांधी का उदाहरण क्यों दिया?
दुबे ने 1971-72 का संदर्भ देते हुए कहा कि जब अमेरिकी नेताओं हेनरी किसिंजर और रिचर्ड निक्सन ने इंदिरा गांधी के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, तब विपक्ष में रहते हुए वाजपेयी और आडवाणी ने संसद में उनका बचाव किया था। यह उदाहरण यह बताने के लिए दिया गया कि राजनीतिक विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री पद की गरिमा की रक्षा करना परंपरा रही है।
राहुल गांधी के मानहानि मामले में बरी होने पर दुबे ने क्या कहा?
दुबे ने कहा कि वह मामला गृह मंत्री के विरुद्ध की गई टिप्पणी से जुड़ा था और यह प्रश्न उठता है कि क्या एक राष्ट्रीय दल के नेता का दूसरे दल के नेता के विरुद्ध इस प्रकार की भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक आचरण है। उन्होंने बरी होने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।
कांग्रेस के नेतृत्व पर दुबे का क्या कहना था?
दुबे ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर राहुल गांधी तक पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, फिर भी कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने में असफल रही है। उनके अनुसार यही कुंठा पार्टी को अभद्र भाषा की ओर ले जा रही है।
दुबे ने लोकतंत्र में विरोध के अधिकार पर क्या कहा?
दुबे ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और अपनी बात रखने का सभी को पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि जो दल लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में खुद को असमर्थ पाते हैं, वे अभद्र भाषा का रास्ता अपनाते हैं — और यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
राष्ट्र प्रेस
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