खड़गे माफी मांगें: कुमारस्वामी ने PM मोदी के पिता पर टिप्पणी को बताया 'राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी की थी। कुमारस्वामी ने इसे अपमानजनक करार देते हुए खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की माँग की है।
कुमारस्वामी की आपत्ति और X पर पोस्ट
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए कुमारस्वामी ने कहा कि खड़गे के शब्द 'मानवता का उपहास' हैं और उनकी 'छिपी हुई कठोर मानसिकता' को उजागर करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान राजनीतिक मर्यादा का स्पष्ट उल्लंघन है।
कुमारस्वामी ने संत कवि पुरंदर दास का उल्लेख करते हुए कहा कि 'हे आचरणहीन जिह्वा, अपनी दूषित बुद्धि का त्याग कर' — यह उद्धरण ऐसी भाषा और व्यवहार को सुधारने के उद्देश्य से दिया गया था, न केवल कहने के लिए।
प्रधानमंत्री के पिता को निशाना बनाना 'अस्वीकार्य'
जनता दल (सेक्युलर) नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को राजनीतिक हमले का निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में लंबे अनुभव और वरिष्ठता के बावजूद खड़गे के शब्दों में दिखाई देने वाली संकीर्णता 'अक्षम्य' है।
राजनीतिक हताशा का आरोप
कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि खड़गे का यह व्यवहार केवल राजनीतिक हताशा का संकेत नहीं, बल्कि 'बेहद शर्मनाक' भी है। उनके अनुसार यह कांग्रेस पार्टी के 'पतन के सबसे निचले स्तर' को दर्शाता है। उन्होंने खड़गे से आग्रह किया कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखें और प्रधानमंत्री मोदी से तत्काल माफी माँगें।
खड़गे के बयान की पृष्ठभूमि और प्रतिक्रियाएँ
बिहार की राजधानी पटना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी और उनके पिता को लेकर यह टिप्पणी की थी। कांग्रेस नेताओं ने इस बयान का बचाव किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अनेक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माफी की माँग की है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक बयानबाज़ी पर बहस पहले से ही तेज़ है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता के बयान को लेकर सत्तापक्ष और सहयोगी दलों ने एकजुट होकर माफी की माँग की हो। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यह विवाद संसद के आगामी सत्र तक चर्चा में बना रह सकता है।