नितेश कुमार का लक्ष्य: वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड और लॉस एंजिल्स पैरालंपिक में खिताब का बचाव
सारांश
मुख्य बातें
पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने 30 अक्टूबर 2026 को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि उनका लक्ष्य केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि हर टूर्नामेंट में खुद को बेहतर बनाना है। हाल ही में उन्होंने जापान के आइची नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 में मेंस सिंगल्स एसएल3 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता और थुलसिमथी मुरुगेसन के साथ मिक्स्ड डबल्स एसएल3 एसयू5 इवेंट में रजत पदक हासिल किया।
मेडल से परे — निरंतर विकास की सोच
नितेश ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह खेल के प्रति मेरे प्यार की वजह से है। जो मैं कर रहा हूं, उसे करने में मज़ा आता है। मेरा लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं है, बल्कि लगातार आगे बढ़ना और बेहतर होना है।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता हूं, तो मुझमें गोल्ड मेडल जीतने की पूरी क्षमता है।' यह सोच उन्हें महज़ परिणाम केंद्रित एथलीट से अलग करती है।
पेरिस पैरालंपिक्स के मेंस सिंगल्स इवेंट में नितेश ने ग्रेट ब्रिटेन के डैनियल बेथेल को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा, वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनके नाम दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हैं। इतने व्यापक मेडल संग्रह के बावजूद, वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड उनके लिए अधूरा सपना बना हुआ है।
वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड — अधूरी कड़ी
नितेश ने स्वीकार किया, 'वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरे पास दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हैं। हालांकि, वहां मेरे पास कोई गोल्ड नहीं है, तो यह एक ऐसी चीज़ है जो कहीं न कहीं मेरे मन में हमेशा खटकती रहती है।' गौरतलब है कि पैरालंपिक और एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी हुई है।
उन्होंने कहा, 'मेरा लक्ष्य बस यही है कि मैं वह एक मेडल भी हासिल कर लूं, जो अभी मेरे कलेक्शन में नहीं है।' यह आत्म विश्लेषण किसी चैंपियन खिलाड़ी की परिपक्वता को दर्शाता है।
प्रमोद भगत के खिलाफ एशियन पैरा गेम्स फाइनल — सबक और धैर्य
आइची नागोया फाइनल में नितेश ने अपने साथी भारतीय खिलाड़ी प्रमोद भगत को हराया। यह एक तरह का बदला था, क्योंकि हांगझोऊ पैरा गेम्स के फाइनल में प्रमोद ने नितेश को मात दी थी। नितेश ने कहा, 'पहले गेम में मेरी कोशिश उन पर दबाव बनाने की थी। जब मैच खत्म होने के करीब था, तो मैं खुद से यही कहता रहा कि अभी काम पूरा नहीं हुआ है।'
उन्होंने यह भी बताया कि तैयारी में कोई खास बदलाव नहीं था, क्योंकि दोनों खिलाड़ी पूरे साल के सर्किट में एक दूसरे के खिलाफ खेलते रहे हैं। 'जब तक खेल खत्म नहीं होता, प्रमोद हमेशा और मजबूत होकर वापसी कर सकते हैं' — इस सचाई को ध्यान में रखकर नितेश ने हर एक अंक के लिए पूरे जोश से खेला।
लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स — 'ऑल इंडिया फाइनल' का सपना
अब नितेश की नज़र लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स पर है, जहां वे अपने पैरालंपिक खिताब का बचाव करेंगे। उनकी सोच अनूठी है — वे चाहते हैं कि फाइनल में केवल भारतीय खिलाड़ी हों, ताकि मेडल तो भारत के पास ही रहे।
उन्होंने कहा, 'जब हमारे पास दो मजबूत दावेदार होते हैं, तो जिम्मेदारी हम दोनों पर आ जाती है। अगर हम इसे एक "ऑल इंडिया फाइनल" बना सकें, तो मुझे लगता है कि फाइनल में हम पर उतना दबाव नहीं होगा।' पेरिस में उनका मुख्य लक्ष्य उस खिताब का बचाव करना था जो प्रमोद भगत ने टोक्यो में जीता था — और अब लॉस एंजिल्स में भी वही भावना बरकरार है।
आगे का रास्ता
नितेश ने स्पष्ट किया कि पहले क्वालिफिकेशन उनकी प्राथमिकता है। 'एक बार जब हम क्वालीफाई कर लेंगे, तो हम लॉस एंजिल्स गेम्स में अपने मनचाहे नतीजों के बारे में सोच सकते हैं। हमारा मुख्य लक्ष्य यही होगा कि अगले चार वर्षों तक भारत के लिए फिर से पदक हासिल किया जाए।' यह दीर्घकालिक सोच नितेश कुमार को भारतीय पैरा बैडमिंटन का सबसे भरोसेमंद नाम बनाती है।