प्रवीण कुमार का अगला लक्ष्य: LA पैरालंपिक 2028 में स्वर्ण और वर्ल्ड चैंपियनशिप 2027 में गोल्ड
सारांश
मुख्य बातें
पैरालंपिक ऊंची कूद के दो बार के पदक विजेता प्रवीण कुमार ने अपने अगले बड़े लक्ष्यों का खुलासा किया है — 2027 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शीर्ष प्रदर्शन। जल्द रिलीज होने वाले एक पॉडकास्ट में दिए साक्षात्कार में प्रवीण ने अपनी खेल यात्रा, संघर्ष और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं को बेबाकी से साझा किया।
अगले लक्ष्य और महत्वाकांक्षाएं
प्रवीण कुमार ने पॉडकास्ट में कहा, 'मैंने नहीं सोचा था कि मैं इतनी दूर तक पहुंचूंगा। अभी और भी कई लक्ष्य हासिल करना बाकी है। उन लक्ष्यों में एक वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरे पास अभी स्वर्ण पदक नहीं है। 2027 में मैं स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करूंगा। हालांकि मेरा प्राथमिक लक्ष्य लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 है।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पैरा-एथलेटिक्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। गौरतलब है कि प्रवीण ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में टी64 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था।
ऊंची कूद से जुड़ाव की अनोखी शुरुआत
प्रवीण ने बताया कि उनका ऊंची कूद से परिचय स्कूल के दिनों में बिल्कुल अचानक हुआ। वे उस समय 9वीं कक्षा में पढ़ रहे थे और एथलेटिक्स के स्पोर्ट्स डे के लिए कोई इवेंट चुनना था। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि कौन-से इवेंट होते हैं। दोस्तों ने मेरे वॉलीबॉल बैकग्राउंड की वजह से ऊंची कूद का सुझाव दिया।'
ऊंची कूद से पहले प्रवीण अपने दोस्तों के साथ वॉलीबॉल खेलते थे और स्पाइकर व डिफेंडर की भूमिका निभाते थे। दोस्तों ने लकड़ी की छड़ी से क्रॉसबार बनाया और प्रवीण ने उसे सहजता से पार किया — पहले छाती की ऊंचाई पर, फिर कंधे की ऊंचाई पर। इसी के बाद दोस्तों ने उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह दी।
दिव्यांगता के बावजूद संघर्ष और हौसला
प्रवीण की राह आसान नहीं थी। प्रतियोगिता के लिए चयन दो सप्ताह पहले हो चुका था और स्कूल अधिकारियों ने शुरुआत में उन्हें दिव्यांग होने के कारण हिस्सा लेने से मना कर दिया। प्रवीण ने बताया, 'मेरी मां ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ। मैंने उनसे कहा कि मैं खेलना चाहता हूं, लेकिन वे मुझे दिव्यांग होने की वजह से खेलने नहीं दे रहे।'
परिवार और स्कूल प्रबंधन के दखल के बाद प्रवीण को अवसर मिला, लेकिन अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी उन्हीं पर डाल दी। प्रवीण ने दृढ़ता से कहा था, 'मैं अपनी जिम्मेदारी लूंगा, मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी — बस मुझे मुकाबला करने दो।'
मुकाबले के दिन भी कुछ प्रतियोगियों ने रेफरी से उन्हें भाग न लेने देने की मांग की। तब एक शिक्षक ने कहा, 'वह एक पैर से कूदेगा, जबकि तुम्हारे दोनों पैर हैं — तुम्हें बेहतर करना चाहिए।' इस एक वाक्य ने प्रवीण के आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
पहले पदक से पैरालंपिक तक का सफर
अपने पहले हाई जंप मुकाबले में ही प्रवीण ने पदक जीता। उन्होंने कहा, 'यह मेरा पहला पदक था, और आज भी मेरे पास है।' उस एक पदक से शुरू हुआ सफर आज पैरालंपिक के स्वर्ण तक पहुंच चुका है।
प्रवीण कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में टी64 श्रेणी में रजत पदक और पेरिस पैरालंपिक 2024 में टी64 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता। अब उनकी नजर 2027 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के स्वर्ण और LA 2028 के मंच पर है।
आगे की राह
प्रवीण का यह सफर भारतीय पैरा-खेलों के लिए एक प्रेरणा-स्रोत बन चुका है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण की कमी को पूरा करने और लॉस एंजिल्स 2028 में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के संकल्प के साथ, प्रवीण कुमार भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के सबसे चमकते सितारों में से एक बनते जा रहे हैं।