फार्मा-मेडटेक PLI योजना: ₹46,744 करोड़ का निवेश, 57 मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन शुरू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने भारत के फार्मास्युटिकल, बल्क ड्रग्स और मेडिकल डिवाइस विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। 25 सितंबर 2026 को सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इन योजनाओं ने आयात पर निर्भरता घटाई है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता विकसित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। फार्मास्युटिकल PLI के तहत अकेले ₹46,744 करोड़ का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है।
बल्क ड्रग्स PLI: लक्ष्य से अधिक निवेश, 39 परियोजनाएं शुरू
2020 में स्वीकृत बल्क ड्रग्स PLI योजना के लिए ₹6,940 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 41 महत्वपूर्ण उत्पादों का घरेलू विनिर्माण सुनिश्चित करना और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) तथा जरूरी फार्मास्युटिकल कच्चे माल के लिए आयात निर्भरता कम करना था।
फैक्टशीट के अनुसार, जून 2026 तक इस योजना के तहत ₹5,210.74 करोड़ का निवेश हो चुका है, जो ₹4,330 करोड़ के निर्धारित निवेश लक्ष्य को पार कर गया है। 28 API के विनिर्माण के लिए 39 परियोजनाएं क्रियाशील हो चुकी हैं।
गौरतलब है कि इस योजना ने पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण फर्मेंटेशन-आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन संभव बनाया है, जिनके लिए पहले बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भरता थी।
फार्मास्युटिकल PLI: ₹46,744 करोड़ का ऐतिहासिक निवेश
2021 में ₹15,000 करोड़ के प्रावधान के साथ स्वीकृत फार्मास्युटिकल्स PLI योजना का उद्देश्य उच्च-मूल्य वाली दवाओं के विनिर्माण की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करना है। यह योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, पेटेंटेड व पेटेंट-मुक्त दवाओं, ऑर्फन ड्रग्स, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च-मूल्य उत्पादों को समर्थन देती है।
फैक्टशीट के अनुसार, 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 MSME शामिल हैं। जून 2026 तक ₹46,744 करोड़ का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ है — यह ₹17,275 करोड़ के लक्षित निवेश से लगभग तीन गुना अधिक है।
सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अरबिंदो फार्मा लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड, ल्यूपिन लिमिटेड, सिप्ला लिमिटेड, इंटास फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड जैसी प्रमुख कंपनियों ने इस योजना के अंतर्गत कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, बायोसिमिलर और ऑटो-इम्यून दवाओं के उत्पादन के लिए अपनी क्षमता विस्तारित की है।
मेडिकल डिवाइस PLI: 57 उपकरणों का घरेलू उत्पादन, वैश्विक दिग्गज भारत में
2020 में ₹3,420 करोड़ के प्रावधान के साथ स्वीकृत मेडिकल डिवाइस PLI योजना ने बड़े पैमाने पर आयात किए जाने वाले उच्च-स्तरीय उपकरणों के घरेलू उत्पादन की नींव रखी है। यह योजना भारत में निर्मित पात्र मेडिकल डिवाइस की अतिरिक्त बिक्री पर पाँच वर्षों के लिए 5 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करती है।
फैक्टशीट के अनुसार, योजना के तहत अब तक 57 मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन शुरू हो चुका है। इनमें MRI मशीन, CT स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलरेटर, C-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व जैसे उपकरण शामिल हैं।
GE हेल्थकेयर, सीमेंस, फिलिप्स, वेरेक्स, निप्रो और ओमरोन जैसी वैश्विक कंपनियों ने भारत में अपनी विनिर्माण गतिविधियाँ स्थापित या विस्तारित की हैं। इसके साथ ही कई भाग लेने वाली कंपनियों ने वैश्विक साझेदारों के साथ तकनीक हस्तांतरण के समझौते भी किए हैं।
आम जनता और स्वास्थ्य क्षेत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। MRI और CT स्कैनर जैसे महंगे उपकरणों का घरेलू उत्पादन शुरू होने से न केवल उनकी उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि आयात पर निर्भरता घटने से इनकी लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत अब तक अपनी ज़रूरत के अधिकांश उन्नत मेडिकल उपकरण आयात करता था, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं महँगी बनी रहती थीं। इन योजनाओं की सफलता इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या होगा आगे
सरकार की इन तीनों PLI योजनाओं की प्रगति से स्पष्ट है कि निवेश लक्ष्यों को पार किया जा चुका है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव यह देखना होगा कि वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आँकड़े इस निवेश के अनुरूप आते हैं या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता मानकों के पालन और वैश्विक बाज़ारों में स्वीकृति ही इन योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता की असली कसौटी होगी।