भारत का मेड-टेक बाज़ार $15-16 अरब से $250 अरब की राह पर, PM मोदी ने PLI और घरेलू विनिर्माण को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त 2026 को भारत के मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेड-टेक) क्षेत्र की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि घरेलू विनिर्माण में वृद्धि, आयात निर्भरता में कमी और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के बल पर भारत एक विश्वसनीय वैश्विक मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे एक लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, जिसमें इस क्षेत्र में हुए बदलावों को विस्तार से रेखांकित किया गया है।
मेड-टेक क्षेत्र की मौजूदा स्थिति
जेपी नड्डा के अनुसार, वर्तमान में भारत का मेड-टेक बाज़ार $15 से $16 अरब का है और यह लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत आज एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाज़ार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाज़ारों में शामिल है। इसी सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि वर्तमान में करीब $14 अरब मूल्य वाला यह क्षेत्र इस दशक के अंत तक $30 से $50 अरब और वर्ष 2047 तक $250 अरब तक पहुँच सकता है।
सरकारी योजनाओं की भूमिका
नड्डा ने अपने लेख में बताया कि सरकार मेडिकल उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख पहलें चला रही है — प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क, और फार्मा-मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार संवर्धन (PRIP) योजना। PLI योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। साथ ही विदेशी निवेश में लगातार वृद्धि इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
आयात निर्भरता में कमी का असर
नड्डा ने कहा कि मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटने से आपूर्ति शृंखला अधिक मज़बूत होगी और लागत में कमी आएगी। इससे उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और ICU उपकरणों की उपलब्धता एवं पहुँच बेहतर होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश की एक बड़ी आबादी अभी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से वंचित है।
उभरती प्रौद्योगिकियों में अवसर
स्वास्थ्य मंत्री ने रेखांकित किया कि मेड-टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर ऐज़ ए मेडिकल डिवाइस (SaMD), कनेक्टेड मेडिकल डिवाइसेस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े अवसर हैं। आने वाले वर्षों में ये तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं के स्वरूप को मौलिक रूप से बदल सकती हैं। सरकार नियामकीय ढाँचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा के विकास को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और भारतीय उपकरण अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।
आगे की राह
नड्डा ने कहा कि एक मज़बूत मेडिकल डिवाइस उद्योग न केवल विनिर्माण और रोज़गार को गति देगा, बल्कि निर्यात वृद्धि और तकनीकी विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि यह क्षेत्र अभी भी बड़े पैमाने पर आयात-निर्भर है — एक चुनौती जिसे पाटने में नीतिगत निरंतरता और निजी निवेश दोनों की ज़रूरत होगी। यदि मौजूदा विकास दर बनी रही और नीतियाँ प्रभावी ढंग से लागू हुईं, तो भारत अगले दशक में वैश्विक मेड-टेक मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।