8 अगस्त 2026
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भारत का मेड-टेक बाज़ार $15-16 अरब से $250 अरब की राह पर, PM मोदी ने PLI और घरेलू विनिर्माण को सराहा

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भारत का मेड-टेक बाज़ार $15-16 अरब से $250 अरब की राह पर, PM मोदी ने PLI और घरेलू विनिर्माण को सराहा

सारांश

भारत का मेड-टेक बाज़ार अभी $15-16 अरब का है, लेकिन 2047 तक $250 अरब तक पहुँचने का अनुमान है। PM मोदी ने PLI योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और PRIP जैसी पहलों की सराहना की। 50 से अधिक उपकरणों का घरेलू निर्माण शुरू हो चुका है — यह 'आत्मनिर्भर स्वास्थ्य' की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 8 अगस्त 2026 को भारत के मेड-टेक क्षेत्र की प्रगति की सराहना की और जेपी नड्डा का लेख एक्स पर साझा किया।
भारत का मेड-टेक बाज़ार वर्तमान में $15-16 अरब का है और 12% वार्षिक दर से बढ़ रहा है।
PLI योजना के तहत अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का घरेलू निर्माण शुरू।
रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र इस दशक के अंत तक $30-50 अरब और 2047 तक $250 अरब तक पहुँच सकता है।
भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा और वैश्विक शीर्ष 20 मेड-टेक बाज़ारों में शामिल।
AI, रोबोटिक्स, SaMD और रिमोट डायग्नोस्टिक्स को भविष्य के प्रमुख अवसर क्षेत्र बताया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त 2026 को भारत के मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेड-टेक) क्षेत्र की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि घरेलू विनिर्माण में वृद्धि, आयात निर्भरता में कमी और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के बल पर भारत एक विश्वसनीय वैश्विक मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे एक लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, जिसमें इस क्षेत्र में हुए बदलावों को विस्तार से रेखांकित किया गया है।

मेड-टेक क्षेत्र की मौजूदा स्थिति

जेपी नड्डा के अनुसार, वर्तमान में भारत का मेड-टेक बाज़ार $15 से $16 अरब का है और यह लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत आज एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाज़ार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाज़ारों में शामिल है। इसी सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि वर्तमान में करीब $14 अरब मूल्य वाला यह क्षेत्र इस दशक के अंत तक $30 से $50 अरब और वर्ष 2047 तक $250 अरब तक पहुँच सकता है।

सरकारी योजनाओं की भूमिका

नड्डा ने अपने लेख में बताया कि सरकार मेडिकल उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख पहलें चला रही है — प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क, और फार्मा-मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार संवर्धन (PRIP) योजना। PLI योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। साथ ही विदेशी निवेश में लगातार वृद्धि इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

आयात निर्भरता में कमी का असर

नड्डा ने कहा कि मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटने से आपूर्ति शृंखला अधिक मज़बूत होगी और लागत में कमी आएगी। इससे उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और ICU उपकरणों की उपलब्धता एवं पहुँच बेहतर होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश की एक बड़ी आबादी अभी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से वंचित है।

उभरती प्रौद्योगिकियों में अवसर

स्वास्थ्य मंत्री ने रेखांकित किया कि मेड-टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर ऐज़ ए मेडिकल डिवाइस (SaMD), कनेक्टेड मेडिकल डिवाइसेस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े अवसर हैं। आने वाले वर्षों में ये तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं के स्वरूप को मौलिक रूप से बदल सकती हैं। सरकार नियामकीय ढाँचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा के विकास को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और भारतीय उपकरण अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

आगे की राह

नड्डा ने कहा कि एक मज़बूत मेडिकल डिवाइस उद्योग न केवल विनिर्माण और रोज़गार को गति देगा, बल्कि निर्यात वृद्धि और तकनीकी विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि यह क्षेत्र अभी भी बड़े पैमाने पर आयात-निर्भर है — एक चुनौती जिसे पाटने में नीतिगत निरंतरता और निजी निवेश दोनों की ज़रूरत होगी। यदि मौजूदा विकास दर बनी रही और नीतियाँ प्रभावी ढंग से लागू हुईं, तो भारत अगले दशक में वैश्विक मेड-टेक मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन $250 अरब का लक्ष्य तभी हासिल होगा जब आयात निर्भरता में कमी केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित न रहे। PLI योजना ने 50 से अधिक उपकरणों का निर्माण शुरू कराया है, परंतु उच्च-जटिलता वाले उपकरण — जैसे इमेजिंग सिस्टम और इम्प्लांट्स — अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। असली कसौटी यह है कि क्या नियामकीय सुधार और परीक्षण अवसंरचना उस गति से विकसित होंगे जो वैश्विक बाज़ार में भारतीय उपकरणों की साख बना सके — वरना विकास दर की संख्याएँ आकर्षक रहेंगी, पर वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पीछे छूट जाएगी।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का मेड-टेक बाज़ार कितना बड़ा है और इसकी विकास दर क्या है?
जेपी नड्डा के अनुसार, वर्तमान में भारत का मेड-टेक बाज़ार $15 से $16 अरब का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान है कि यह इस दशक के अंत तक $30-50 अरब और 2047 तक $250 अरब तक पहुँच सकता है।
मेड-टेक क्षेत्र के लिए PLI योजना क्या है और इसके क्या परिणाम रहे हैं?
प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना घरेलू मेडिकल उपकरण निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की प्रमुख पहल है। इस योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है और विदेशी निवेश में भी वृद्धि देखी गई है।
PM मोदी ने मेड-टेक क्षेत्र पर क्या कहा?
PM मोदी ने 8 अगस्त 2026 को कहा कि भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन, आयात निर्भरता में कमी और PLI तथा मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी सरकारी पहलों के बल पर मज़बूत हो रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का लेख एक्स पर साझा करते हुए भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक मेड-टेक भागीदार बनाने का संकल्प दोहराया।
मेड-टेक क्षेत्र में आयात निर्भरता कम होने से आम मरीज़ों को क्या फायदा होगा?
आयात निर्भरता घटने से आपूर्ति शृंखला मज़बूत होगी और उपकरणों की लागत में कमी आएगी। इससे डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और ICU उपकरणों की उपलब्धता एवं पहुँच बेहतर होगी, जिसका सीधा लाभ आम मरीज़ों को मिलेगा।
मेड-टेक क्षेत्र में भविष्य की कौन-सी तकनीकें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं?
जेपी नड्डा के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर ऐज़ ए मेडिकल डिवाइस (SaMD), कनेक्टेड मेडिकल डिवाइसेस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स मेड-टेक क्षेत्र के भविष्य के प्रमुख अवसर क्षेत्र हैं। आने वाले वर्षों में ये तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं के स्वरूप को बदल सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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