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क्या एसआईआर प्रक्रिया सामान्य है, या कुछ दल फैला रहे हैं भ्रम? - नीतीश मिश्रा

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क्या एसआईआर प्रक्रिया सामान्य है, या कुछ दल फैला रहे हैं भ्रम? - नीतीश मिश्रा

सारांश

नीतीश मिश्रा ने एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ दल भ्रम फैला रहे हैं जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। जानें इस विषय पर उनकी राय और चुनाव आयोग की भूमिका।

मुख्य बातें

एसआईआर प्रक्रिया एक सामान्य प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक दलों को आपत्ति दर्ज करने का अधिकार है।
जिनका नाम काटा गया है, उनकी सूची सार्वजनिक है।
राजनीतिक दलों को भ्रम फैलाने से बचना चाहिए।

पटना, 18 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मंत्री और भाजपा नेता नीतीश मिश्रा ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कुछ दल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसके तहत कार्य किया जा रहा है।

पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो यह प्रक्रिया संचालित करती है। देश की आजादी के बाद से चुनाव आयोग ही देश में चुनावों का संचालन करता आ रहा है। उनके निष्पक्ष चुनाव को न केवल देश, बल्कि दुनिया भी स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि जिनका नाम काटा गया है, उन्हें नाम जुड़वाने का अवसर मिलेगा। प्रारूप प्रकाशन के बाद, यदि कुछ गलतियां मौजूद हैं, तो यह अधिकार है कि आपत्ति दर्ज की जाए। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त तक किसी राजनीतिक दल ने आपत्ति दर्ज नहीं की है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, राजनीतिक दलों और जनता को आपत्ति दर्ज करने का अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिनके नाम काटे गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की गई है, जिसे देखा जा सकता है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र की पूरी सूची भी प्रस्तुत की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा किस समस्या का समाधान करेगी, यह उन्हें खुद जानना होगा। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों को नाम काटने की आशंका है, वे अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। पंचायत भवन और प्रखंड कार्यालय में भी काटे गए नामों की सूची उपलब्ध कराई गई है।

तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आज वे वोट कटने की बात कर रहे हैं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नाम रहते वोट का प्रयोग नहीं किया, यह उन्हें याद रखना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के संविधान समाप्त करने के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने 2013 में सरकार के एक ऑर्डिनेंस को फाड़ दिया था। जिनके पास सही जानकारी नहीं है, इसलिए वे बोलने के लिए कुछ नहीं रखते। यही कारण है कि वे जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हमारे विधानसभा क्षेत्रों से भी नाम काटे गए हैं। इनमें कई लोग अब जीवित नहीं हैं। कुछ लोगों पर शिकायत भी की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी पार्टी के मतदाताओं के प्रति सजग हैं, इसी कारण यह जानकारी साझा कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की भूमिका को समझना आवश्यक है, ताकि जनता में भ्रम और भ्रांतियों का समाधान हो सके।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करता है।
क्या राजनीतिक दलों को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है?
जी हां, राजनीतिक दलों और जनता को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है, यदि नाम काटे गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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