13 जुलाई 2026
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नोएडा टेक इंजीनियर युवराज मेहता की मौत: छह महीने बाद भी न्याय नहीं, पिता ने उम्मीद छोड़ी

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नोएडा टेक इंजीनियर युवराज मेहता की मौत: छह महीने बाद भी न्याय नहीं, पिता ने उम्मीद छोड़ी

सारांश

नोएडा में खुली निर्माण खाई में डूबकर जान गँवाने वाले इंजीनियर युवराज मेहता के पिता का दर्द — SIT रिपोर्ट आई, लापरवाह अधिकारी बहाल हुए, और छह महीने बाद परिवार न्याय की उम्मीद खो चुका है। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, शहरी सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का आईना है।

मुख्य बातें

27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत 17 जनवरी को नोएडा सेक्टर 150 में पानी से भरी निर्माण खाई में गिरने से हुई थी।
घटना के बाद गठित SIT ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी, लेकिन पिता के अनुसार छह महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शुरुआत में लापरवाह अधिकारियों पर की गई कार्रवाई बाद में वापस ले ली गई और उन्हें बहाल कर दिया गया।
पिता राजकुमार मेहता ने आर्थिक असमर्थता के कारण अदालत न जाने का फैसला किया; उत्तर प्रदेश सरकार से जवाबदेही की अपील की।
नोएडा सेक्टर 57 में एक अन्य इंजीनियर आर्यन की भी हाल ही में नाले में गिरकर मौत हो गई, जो शहरी सुरक्षा की बड़ी खामियों को उजागर करती है।

नोएडा के सेक्टर 150 में 17 जनवरी को हुई 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के लगभग छह महीने बाद उनके पिता राजकुमार मेहता ने कहा है कि उन्हें अब इस मामले में न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने से वह गहरी निराशा में हैं।

हादसे का मुख्य घटनाक्रम

17 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच युवराज मेहता की एसयूवी नोएडा के सेक्टर 150 में बिना किसी सुरक्षा घेरे वाली पानी से भरी निर्माण-कार्य की खाई में जा गिरी। युवराज अपनी गाड़ी की छत पर चढ़कर करीब डेढ़ घंटे तक मदद के लिए पुकारते रहे। 112 हेल्पलाइन पर बुलाई गई रेस्क्यू टीम न तो लाइफ जैकेट लाई, न रस्सी — और बताया जाता है कि वह आधे रास्ते से ही लौट गई। आखिरकार युवराज डूब गए।

SIT जांच: रिपोर्ट आई, कार्रवाई नहीं

घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT गठित की, जिसने जल्द ही अपनी रिपोर्ट संबंधित सचिव को सौंप दी। राजकुमार मेहता के अनुसार, शुरुआत में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कुछ कार्रवाई की भी गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया और उन अधिकारियों को बहाल कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'एसआईटी की जांच तो हुई, लेकिन असल में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह बिना किसी कार्रवाई वाली एसआईटी रिपोर्ट थी — यही सच्चाई है।'

पिता ने गिनाई तीन बड़ी लापरवाहियाँ

राजकुमार मेहता ने उन तीन खास खामियों की ओर इशारा किया जो उनके बेटे की मौत का कारण बनीं। पहली — खाई खोदने वालों ने उसके आसपास कोई सुरक्षा बाधा नहीं लगाई। दूसरी — उस मोड़ पर ट्रैफिक या सुरक्षा संकेत का कोई इंतजाम नहीं था, जिससे कोई भी अनजान व्यक्ति आसानी से उसमें गिर सकता था। तीसरी — 112 पर बुलाई गई रेस्क्यू टीम न तो जरूरी उपकरण लाई और न ही समय पर पहुँची।

न्यायालय जाने में असमर्थ, सरकार से अपील

मेहता ने स्वीकार किया कि वह अकेले कानूनी लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं हैं और इसलिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाएंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। उनके शब्दों में, 'जनता के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों को सज़ा दी जाती है।'

एक और इंजीनियर की मौत — बढ़ती चिंता

यह मामला ऐसे समय में फिर सुर्खियों में है जब नोएडा के सेक्टर 57 में एक अन्य इंजीनियर आर्यन की भी नाले में गिरकर मौत हो गई — जब वह सेक्टर 58 में काम पर जा रहे थे। दो समान हादसे शहरी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की घोर उपेक्षा की ओर इशारा करते हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होती, ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो संदेश साफ है — जवाबदेही की कोई कीमत नहीं। नोएडा में एक और इंजीनियर आर्यन की मौत यह साबित करती है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं बल्कि एक पैटर्न है। असली सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लागू कराने के लिए कब बाध्यकारी तंत्र बनाएगी — क्योंकि बिना दंड के, नियम सिर्फ कागज पर रहते हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युवराज मेहता की मौत कैसे हुई थी?
17 जनवरी को घने कोहरे में नोएडा सेक्टर 150 में युवराज मेहता की एसयूवी बिना सुरक्षा घेरे वाली पानी से भरी निर्माण खाई में गिर गई। वह करीब डेढ़ घंटे तक मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन 112 पर बुलाई गई रेस्क्यू टीम समय पर उचित उपकरणों के साथ नहीं पहुँची और वह डूब गए।
SIT जांच का क्या नतीजा निकला?
घटना के बाद गठित SIT ने जल्द ही अपनी रिपोर्ट सचिव को सौंप दी। हालाँकि, पिता राजकुमार मेहता के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई — शुरुआत में जो कार्रवाई हुई भी, वह बाद में वापस ले ली गई और अधिकारियों को बहाल कर दिया गया।
पिता राजकुमार मेहता अदालत क्यों नहीं जा रहे?
राजकुमार मेहता ने कहा कि वह अकेले कानूनी लड़ाई लड़ने की आर्थिक और व्यावहारिक स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्होंने अदालत जाने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार से सीधे जवाबदेही तय करने की अपील की है।
इस हादसे के लिए कौन-सी तीन लापरवाहियाँ जिम्मेदार बताई गई हैं?
पिता के अनुसार तीन मुख्य खामियाँ थीं: पहली — खाई के आसपास कोई सुरक्षा बाधा नहीं थी; दूसरी — उस मोड़ पर कोई ट्रैफिक या खतरे का संकेत नहीं था; तीसरी — 112 की रेस्क्यू टीम न लाइफ जैकेट लाई, न रस्सी, और समय पर नहीं पहुँची।
क्या नोएडा में ऐसी कोई और घटना हुई है?
हाँ, हाल ही में नोएडा सेक्टर 57 में एक अन्य इंजीनियर आर्यन की भी नाले में गिरकर मौत हो गई, जब वह सेक्टर 58 में काम पर जा रहे थे। यह दूसरी घटना शहरी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की लगातार उपेक्षा को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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