नोएडा में युवराज मेहता की मौत पर हाईकोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया, सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल

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नोएडा में युवराज मेहता की मौत पर हाईकोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया, सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल

सारांश

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने सिस्टम की लापरवाही और राहत कार्य में देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या समय पर कार्रवाई से युवराज की जान बचाई जा सकती थी?

Key Takeaways

  • हाईकोर्ट ने सिस्टम की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की है।
  • युवराज की मौत को रोकना संभव था अगर समय पर कार्रवाई होती।
  • परिवार अब भी न्याय की उम्मीद कर रहा है।
  • एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
  • हाईकोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है।

नोएडा, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सिस्टम की लापरवाही और राहत कार्य में देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत उत्तर मांगा है।

हाईकोर्ट ने यह कहा है कि युवराज की जान को बचाया जा सकता था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्ती और समय पर कार्रवाई न होने के कारण उनकी जान चली गई। इस मामले में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है।

अदालत ने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि जब हादसा हुआ, तब सेक्टर 150 में अधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे या उनकी उपस्थिति राहत कार्यों में प्रभावी क्यों नहीं रही। अदालत ने पूछा कि युवराज को समय पर क्यों नहीं बचाया जा सका। इस मामले में नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में कई स्तरों पर गंभीर चूक और लापरवाही की बात सामने आई है, जिसने राहत और बचाव कार्य को प्रभावित किया।

युवराज के परिजन अब भी न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिम्मेदारी तय करना और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना अनिवार्य है।

ज्ञात रहे कि युवराज मेहता एक जूनियर इंजीनियर थे और लंबे समय से प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। दो महीने पहले जनवरी में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय युवराज मेहता की एक बिल्डर के प्लॉट में भरे पानी में गिरने के कारण मृत्यु हो गई थी। वह घंटों तक मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन उन्हें समय पर बचाया नहीं जा सका। बताया जा रहा है कि युवराज की मौत हार्ट फेलियर/ कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी। जांच में सामने आए तथ्य चौंकाने वाले हैं। अब हाईकोर्ट ने भी सिस्टम की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जवाब तलब किया है।

Point of View

बल्कि हम सभी का है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

युवराज मेहता की मौत कैसे हुई?
युवराज मेहता की मौत एक बिल्डर के प्लॉट में भरे पानी में गिरने से हुई, जिससे उन्हें समय पर बचाया नहीं जा सका।
हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने सिस्टम की लापरवाही पर नाराजगी जताई है और सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है।
क्या युवराज की जान बचाई जा सकती थी?
हाईकोर्ट के अनुसार, युवराज की जान को बचाया जा सकता था यदि समय पर कार्रवाई होती।
इस मामले में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका क्या है?
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, विशेषकर राहत कार्य में उनकी उपस्थिति को लेकर।
क्या युवराज के परिजन न्याय की उम्मीद कर रहे हैं?
जी हां, युवराज के परिजन न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं और हाईकोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई का आश्वासन दिया है।
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