NSO के 80वें सर्वेक्षण में भारत की स्वास्थ्य सेवा पहुँच में बड़ा सुधार, बीमा कवरेज तीन गुना बढ़ा

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NSO के 80वें सर्वेक्षण में भारत की स्वास्थ्य सेवा पहुँच में बड़ा सुधार, बीमा कवरेज तीन गुना बढ़ा

सारांश

NSO के 80वें दौर के स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में बड़े बदलाव दर्शाए हैं — ग्रामीण बीमा कवरेज तीन गुना से अधिक बढ़ा, सार्वजनिक सुविधाओं में आउटपेशेंट खर्च शून्य, और संस्थागत प्रसव 95.6%25 तक पहुँचे। लेकिन गैर-संक्रामक रोगों की बढ़ती व्यापकता नई चुनौती बनकर उभरी है।

Key Takeaways

  • NSO के 80वें दौर के सर्वेक्षण में 1,39,732 परिवारों को शामिल किया गया — ग्रामीण में 76,296 और शहरी में 63,436
  • सरकारी स्वास्थ्य बीमा कवरेज ग्रामीण क्षेत्रों में 12.9%25 से बढ़कर 45.5%25 और शहरी क्षेत्रों में 8.9%25 से 31.8%25 हुआ — तीन गुना से अधिक वृद्धि।
  • सार्वजनिक सुविधाओं में आउटपेशेंट देखभाल का औसत OOPE शून्य; अस्पताल भर्ती में औसत OOPE ₹11,285
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव 2017-18 के 90.5%25 से बढ़कर 2025 में 95.6%25 हुए।
  • बीमारी रिपोर्ट करने वाली आबादी का अनुपात ग्रामीण में 6.8%25 से 12.2%25 और शहरी में 9.1%25 से 14.9%25 हुआ।
  • सार्वजनिक सुविधाओं का आउटपेशेंट उपयोग 2014 के 28%25 से बढ़कर 2025 में 35%25 पहुँचा।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 80वें दौर के घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, वहनीयता और बीमा कवरेज में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 29 अप्रैल 2025 को जारी इस रिपोर्ट में 1,39,732 परिवारों के सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आए हैं कि सरकारी हस्तक्षेपों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव लाए हैं।

सर्वेक्षण का दायरा और पद्धति

यह सर्वेक्षण देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को कवर करता है — ग्रामीण क्षेत्रों में 76,296 और शहरी क्षेत्रों में 63,436 परिवारों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण से स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच, खर्च और उपयोग के पैटर्न पर विस्तृत जमीनी आँकड़े प्राप्त हुए हैं।

गौरतलब है कि यह सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।

जेब से होने वाला खर्च और वहनीयता

आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रति अस्पताल भर्ती पर औसत आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE) ₹11,285 दर्ज किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि देश में आधे से अधिक अस्पताल भर्ती मामलों में खर्च इससे काफी कम है, और केवल विशेष उपचार वाले मामलों में यह औसत ऊपर जाता है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती होने वाले आधे से अधिक मामलों में OOPE मात्र ₹1,100 रहा। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि सार्वजनिक सुविधाओं में आउटपेशेंट देखभाल के लिए औसत OOPE शून्य है, जो दर्शाता है कि बड़ी संख्या में नागरिक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह निःशुल्क प्राप्त कर रहे हैं।

सरकार की 2015 में शुरू की गई मुफ्त दवा सेवा पहल (FDSI) और मुफ्त निदान पहल (FDI) ने दूरस्थ क्षेत्रों तक दवाएँ और जाँच सेवाएँ पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAM) ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को समुदाय स्तर तक विस्तारित किया है।

बीमा कवरेज में तीन गुना से अधिक वृद्धि

सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं — विशेष रूप से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) — के तहत कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कवर की गई जनसंख्या का प्रतिशत 12.9%25 से बढ़कर 45.5%25 और शहरी क्षेत्रों में 8.9%25 से बढ़कर 31.8%25 हो गया है — यह तीन गुना से अधिक की वृद्धि है।

घरेलू स्तर के आँकड़े यह भी संकेत देते हैं कि उपभोग के सबसे निचले दो वर्गों में OOPE में गिरावट आई है, जो यह दर्शाता है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग इन हस्तक्षेपों से सर्वाधिक लाभान्वित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की माँग और उपयोग में बदलाव

बीमारियों की रिपोर्ट करने वाली आबादी का अनुपात (PPRA) 75वें और 80वें दौर के बीच लगभग दोगुना हो गया है — ग्रामीण क्षेत्रों में 6.8%25 से बढ़कर 12.2%25 और शहरी क्षेत्रों में 9.1%25 से बढ़कर 14.9%25। यह बेहतर जागरूकता और स्वास्थ्य के प्रति सक्रिय व्यवहार का संकेत है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग भी बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आउटपेशेंट देखभाल के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग 2014 के 28%25 से बढ़कर 2025 में 35%25 हो गया है। सर्वेक्षण में एक महत्वपूर्ण महामारी विज्ञान संबंधी बदलाव भी सामने आया है — संक्रामक रोगों में कमी और मधुमेह तथा हृदय रोग जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की बढ़ती व्यापकता।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार

सर्वेक्षण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति भी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव 2017-18 के 90.5%25 से बढ़कर 2025 में 95.6%25 हो गए, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 96.1%25 से बढ़कर 97.8%25 पर पहुँच गए।

ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग दो-तिहाई (66.8%25) प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आँकड़ा 47%25 है। जननी सुरक्षा योजना (JSY), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) जैसी योजनाओं ने इस प्रगति में अहम योगदान दिया है।

किफायती दवाएँ और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (AMRIT) पहल, जो 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 220 से अधिक फार्मेसियों के माध्यम से बाज़ार दर पर 50%25 तक की छूट पर 6,500 से अधिक दवाएँ उपलब्ध कराती है, उपचार की वहनीयता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। NSO के ये निष्कर्ष सभी के लिए सस्ती, सुलभ और न्यायसंगत स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में भारत की प्रगति का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत करते हैं।

Point of View

लेकिन इन्हें पढ़ते समय सावधानी ज़रूरी है — बीमारी रिपोर्ट करने वाली आबादी का दोगुना होना वास्तविक बीमारी में वृद्धि भी हो सकती है, न कि केवल बेहतर जागरूकता। इसके अलावा, गैर-संक्रामक रोगों की बढ़ती व्यापकता संकेत देती है कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली एक नई और महंगी चुनौती की ओर बढ़ रही है, जिसके लिए मौजूदा ढाँचा पर्याप्त नहीं हो सकता। PM-JAY कवरेज का तीन गुना विस्तार प्रभावशाली है, परंतु कवरेज और वास्तविक दावा निपटान के बीच का अंतर अभी भी एक अनुत्तरित प्रश्न है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

NSO का 80वाँ दौर स्वास्थ्य सर्वेक्षण क्या है?
यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा कराया गया घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण है, जिसमें देशभर के 1,39,732 परिवारों से स्वास्थ्य सेवा पहुँच, खर्च और बीमा कवरेज पर आँकड़े एकत्र किए गए। इसके निष्कर्ष 29 अप्रैल 2025 को जारी किए गए।
आयुष्मान भारत PM-JAY के तहत बीमा कवरेज कितना बढ़ा?
सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत ग्रामीण कवरेज 12.9%25 से बढ़कर 45.5%25 और शहरी कवरेज 8.9%25 से बढ़कर 31.8%25 हो गया है। यह तीन गुना से अधिक की वृद्धि है और PM-JAY इसमें प्रमुख भूमिका में रही है।
सरकारी अस्पतालों में इलाज पर कितना खर्च करना पड़ता है?
NSO सर्वेक्षण के अनुसार सार्वजनिक सुविधाओं में आउटपेशेंट देखभाल का औसत OOPE शून्य है। अस्पताल भर्ती के मामलों में सार्वजनिक सुविधाओं में आधे से अधिक मामलों में यह खर्च केवल ₹1,100 रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव की स्थिति क्या है?
ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव 2017-18 के 90.5%25 से बढ़कर 2025 में 95.6%25 हो गए हैं। इनमें से लगभग दो-तिहाई (66.8%25) प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे हैं।
AMRIT फार्मेसी पहल क्या है और इससे किसे फायदा होता है?
AMRIT (किफायती दवाएँ और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण) पहल 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 220 से अधिक फार्मेसियों के ज़रिए बाज़ार दर पर 50%25 तक की छूट पर 6,500 से अधिक दवाएँ उपलब्ध कराती है। इससे विशेष रूप से कमज़ोर आय वर्ग के मरीज़ों को उपचार की वहनीयता में सुधार मिलता है।
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