न्यिंगची में दूसरा नमचा बरवा फोरम: पाँच प्रमुख उपलब्धियाँ, पठारीय संरक्षण पर बड़ी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के न्यिंगची शहर में 10 अक्टूबर 2026 को दूसरे नमचा बरवा फोरम और राष्ट्रीय पारिस्थितिक सभ्यता उच्चभूमि निर्माण मंच का आयोजन हुआ, जिसमें विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने छिंगहाई-शीत्सांग पठार के पारिस्थितिक संरक्षण, जलवायु जोखिम और आपदा रोकथाम पर विचार-विमर्श किया। इस बार फोरम का केंद्रीय विषय 'प्रौद्योगिकी से सशक्तिकरण, हरित पठार' रखा गया था। फोरम में एक मुख्य सत्र और दो विषयगत सत्र आयोजित किए गए, और शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाँच प्रमुख उपलब्धियों की घोषणा की गई।
मुख्य सत्र में क्या हुआ
मुख्य सत्र में विशेषज्ञों ने छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदा जोखिमों और उनकी रोकथाम के उपायों पर विस्तार से विचार रखे। हिमनदों के निकटवर्ती पारिस्थितिक तंत्र और प्रजातियों की विविधता पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का भी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
इसके अतिरिक्त, एशिया के प्रमुख जल स्रोत क्षेत्र में ग्लेशियरों और हिमझीलों के सर्वेक्षण तथा हिमस्खलन एवं हिमझीलों के फटने से उत्पन्न खतरों के आकलन पर विशेष रिपोर्टें पेश की गईं। प्रतिनिधियों ने पठारीय पारिस्थितिक संरक्षण की नई उपलब्धियों और प्रौद्योगिकी के माध्यम से हरित विकास को गति देने के तरीकों पर भी चर्चा की।
फोरम की पाँच प्रमुख उपलब्धियाँ
10 अक्टूबर की शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाँच महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों की घोषणा की गई।
पहली उपलब्धि के रूप में रचनात्मक कार्य सुझाव तैयार किए गए। दूसरी, '14वीं पंचवर्षीय योजना' (2021-2025) के दौरान शीत्सांग में राष्ट्रीय पारिस्थितिक सभ्यता उच्चभूमि निर्माण की उपलब्धियों का मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की गई। तीसरी, दूसरे छिंगहाई-शीत्सांग वैज्ञानिक अभियान के निष्कर्षों के आधार पर यह रेखांकित किया गया कि छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर्यावरणीय बदलाव के तीसरे चरण से गुजर रहा है।
चौथी उपलब्धि के रूप में नमचा बरवा प्रौद्योगिकी विशेष पहल का प्रस्ताव पेश किया गया। पाँचवीं और उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि शीत्सांग तथा छिंगहाई, सछ्वान एवं युन्नान प्रांतों के बीच पठारीय क्षेत्र के समन्वित संरक्षण को लेकर परस्पर सहमति बनी।
पठार पर पर्यावरणीय संकट की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि छिंगहाई-शीत्सांग पठार को 'एशिया की जल-मीनार' कहा जाता है, क्योंकि यहाँ से निकलने वाली नदियाँ अरबों लोगों की जल आपूर्ति का आधार हैं। इस क्षेत्र में तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और हिमझीलों के फटने की बढ़ती घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु वैज्ञानिक वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण उच्च ऊँचाई वाले पारिस्थितिक तंत्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर आगाह कर रहे हैं। दूसरे छिंगहाई-शीत्सांग वैज्ञानिक अभियान के निष्कर्ष इस संदर्भ में नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।
क्षेत्रीय सहयोग और आगे की राह
शीत्सांग, छिंगहाई, सछ्वान और युन्नान के बीच बनी यह सहमति भविष्य में समन्वित नीति-निर्माण और संसाधन प्रबंधन की नींव रख सकती है। नमचा बरवा प्रौद्योगिकी विशेष पहल के ज़रिए इस क्षेत्र में तकनीकी समाधानों को पारिस्थितिक संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आगामी समय में इन उपलब्धियों को नीतिगत रूप देना और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करना इस फोरम की असली परीक्षा होगी।