चीन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए
सारांश
Key Takeaways
- सार्वभौमिक लाभ के सिद्धांत को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऊर्जा का एकीकृत विकास आवश्यक है।
- क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए नीतिगत संवाद की ज़रूरत है।
बीजिंग, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 19 मार्च को चीनी राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के ऊर्जा कार्य समूह की 71वीं बैठक 18 और 19 मार्च को च्यांगशी प्रांत के नानछांग शहर में संपन्न हुई।
इस अवसर पर, चीन ने तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 'उच्च गुणवत्ता वाली सार्वभौमिक ऊर्जा सेवा', 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता + ऊर्जा', और 'एशिया-प्रशांत ऊर्जा सहयोग और शासन' के तहत तीन प्रस्ताव रखे।
पहला सुझाव यह है कि हमें सार्वभौमिक लाभ के सिद्धांत को बनाए रखते हुए समावेशी प्रक्रियाओं, विविध तकनीकी मार्गों, लक्षित सशक्तीकरण, और घनिष्ठ क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा सेवाओं का संयुक्त रूप से प्रचार करना चाहिए, ताकि विकास का लाभ सभी को मिले।
दूसरा, नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऊर्जा के एकीकृत विकास को बढ़ावा देने हेतु विकास रणनीतियों, शासन नियमों, और तकनीकी मानकों का एकीकरण आवश्यक है। हमें क्षेत्रीय नवाचारों पर सहमति बनानी चाहिए।
तीसरा, सहयोग को मज़बूत करना चाहिए ताकि नीतिगत संवाद, सूचना साझाकरण, और क्षमता निर्माण के माध्यम से ऊर्जा शासन की प्रभावशीलता और पारदर्शिता को बढ़ाया जा सके। इससे क्षेत्रीय सहयोग का एक नया प्रतिमान विकसित होगा।
चीनी राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के उप निदेशक हे यांग ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक विकास का एक अहम इंजन है। यह न केवल वैश्विक ऊर्जा खपत का केंद्र है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चीन हमेशा एक सुरक्षित और किफायती एशिया-प्रशांत ऊर्जा प्रणाली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)