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ओडिशा कैबिनेट ने ₹450 करोड़ की 'दक्ष्यता विकास योजना' को दी मंजूरी, 4.2 लाख युवाओं को मिलेगा लाभ

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ओडिशा कैबिनेट ने ₹450 करोड़ की 'दक्ष्यता विकास योजना' को दी मंजूरी, 4.2 लाख युवाओं को मिलेगा लाभ

सारांश

ओडिशा कैबिनेट ने ₹450 करोड़ की 'दक्ष्यता विकास योजना' को हरी झंडी दी — 4.2 लाख युवाओं को AI, साइबर सुरक्षा और जर्मन-जापानी भाषा प्रशिक्षण के ज़रिए देश-विदेश में रोजगार के लिए तैयार करने का लक्ष्य। यह ओडिशा की अब तक की सबसे व्यापक कौशल पहल है।

मुख्य बातें

ओडिशा मंत्रिमंडल ने 13 अक्टूबर 2026 को ₹450 करोड़ की 'दक्ष्यता विकास योजना' को मंजूरी दी।
योजना की अवधि 2026-27 से 2028-29 तक है; लाभार्थी संख्या 4.2 लाख युवा ।
1.17 लाख युवाओं को अल्पकालिक रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और 3 लाख युवाओं को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स व साइबर सुरक्षा में डिजिटल कौशल मिलेगा।
पात्र छात्रों को जर्मन और जापानी भाषा प्रशिक्षण सहित वीज़ा व यात्रा सहायता भी दी जाएगी।
दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर समुदाय, जेल बंदी और कमजोर जनजातीय समूहों के लिए विशेष परियोजनाएँ शामिल।
40 कौशल विकास फेलो जिलों में तैनात होंगे; निगरानी के लिए 'स्किल्ड-इन-ओडिशा डिजिटल हब' स्थापित किया जाएगा।

ओडिशा मंत्रिमंडल ने 13 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित अपनी 48वीं बैठक में ₹450 करोड़ की महत्वाकांक्षी 'दक्ष्यता विकास योजना' को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य राज्य के 4.2 लाख युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें देश-विदेश के उभरते अवसरों के लिए सक्षम बनाना है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 11 विभागों से जुड़े 16 प्रमुख प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

योजना का दायरा और मुख्य विशेषताएँ

कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की इस योजना की अवधि 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों की है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया, 'यह योजना युवाओं के लिए तैयार की गई है। राज्य के करीब 4.2 लाख युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता कौशल प्रशिक्षण को उच्च शिक्षा से जोड़ना है।'

सरकारी बयान के अनुसार, राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्किल हब स्थापित किए जाएंगे, जहाँ छात्रों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के अनुरूप रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय कौशल पर जोर

योजना के तहत 1.17 लाख युवाओं को अल्पकालिक रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 3 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों में डिजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में कुशल कामगारों की बढ़ती माँग को देखते हुए पात्र छात्रों को जर्मन और जापानी जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा सांस्कृतिक प्रशिक्षण, प्रमाणन सहायता, वीज़ा सहायता, यात्रा सहायता और नौकरी मिलने के बाद सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।

संवेदनशील वर्गों पर विशेष ध्यान

यह योजना केवल सामान्य युवाओं तक सीमित नहीं है। सरकारी बयान के अनुसार, दिव्यांगजन, जेल बंदी, ट्रांसजेंडर समुदाय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए भी विशेष परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। गौरतलब है कि ऐसे वर्गों को मुख्यधारा की कौशल योजनाओं में अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

निगरानी और फेलोशिप तंत्र

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कौशल विकास फेलोशिप को जारी रखने की भी स्वीकृति दी। इसके तहत 40 फेलो विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे, जो कौशल की माँग का आकलन, कौशल अंतर की पहचान और उद्योगों के साथ साझेदारी स्थापित करने में सहयोग करेंगे।

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की प्रगति और रोजगार परिणामों की निगरानी के लिए 'स्किल्ड-इन-ओडिशा डिजिटल हब' भी स्थापित किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में युवा बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।

अन्य प्रमुख कैबिनेट निर्णय

मंगलवार की कैबिनेट बैठक में दक्ष्यता विकास योजना के अतिरिक्त राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, उद्योग, वित्त तथा कृषि एवं किसान सशक्तिकरण सहित अन्य विभागों के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का ब्यौरा सरकार की ओर से अलग से जारी किया जाना अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — राज्य में पहले भी कौशल कार्यक्रम शुरू हुए हैं जिनकी प्लेसमेंट दर सवालों के घेरे में रही है। कौशल प्रशिक्षण को उच्च शिक्षा से जोड़ने और NSQF अनुपालन का प्रावधान सही दिशा में है, मगर 'स्किल्ड-इन-ओडिशा डिजिटल हब' की निगरानी पारदर्शिता और नियोजन डेटा की स्वतंत्र सत्यापन व्यवस्था बिना, यह योजना भी कागजी आँकड़ों की भीड़ में खो सकती है। विदेशी भाषा प्रशिक्षण और वीज़ा सहायता का प्रावधान नवीन है, लेकिन यह देखना होगा कि वास्तव में कितने युवा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जगह बना पाते हैं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा की 'दक्ष्यता विकास योजना' क्या है?
यह ओडिशा सरकार की ₹450 करोड़ की तीन वर्षीय (2026-27 से 2028-29) कौशल विकास योजना है, जिसे 13 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसका उद्देश्य 4.2 लाख युवाओं को रोजगारोन्मुखी, डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण देकर देश-विदेश में रोजगार के योग्य बनाना है।
योजना से कितने और किन युवाओं को लाभ मिलेगा?
कुल 4.2 लाख युवाओं को लाभ मिलेगा — इनमें से 1.17 लाख को अल्पकालिक रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और 3 लाख को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स व साइबर सुरक्षा में डिजिटल कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर समुदाय, जेल बंदी और कमजोर जनजातीय समूहों के लिए अलग से विशेष परियोजनाएँ भी शामिल हैं।
क्या इस योजना में विदेश में रोजगार के लिए भी प्रावधान है?
हाँ, पात्र छात्रों को जर्मन और जापानी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ सांस्कृतिक प्रशिक्षण, प्रमाणन सहायता, वीज़ा सहायता, यात्रा सहायता और नौकरी मिलने के बाद का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना की निगरानी कैसे की जाएगी?
'स्किल्ड-इन-ओडिशा डिजिटल हब' के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की प्रगति और रोजगार परिणामों की निगरानी की जाएगी। इसके अतिरिक्त 40 कौशल विकास फेलो विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे, जो कौशल माँग का आकलन और उद्योगों से समन्वय करेंगे।
13 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में और क्या प्रमुख निर्णय लिए गए?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई 48वीं कैबिनेट बैठक में 11 विभागों — राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, उद्योग, वित्त, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा, कृषि एवं किसान सशक्तिकरण सहित — से जुड़े 16 प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। अन्य विभागों के प्रस्तावों का विवरण सरकार द्वारा अलग से जारी किया जाना अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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