ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी: ओडिशा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से 56 वर्षीय आरोपी को दबोचा, 2.06 करोड़ की ठगी

Click to start listening
ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी: ओडिशा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से 56 वर्षीय आरोपी को दबोचा, 2.06 करोड़ की ठगी

सारांश

ओडिशा क्राइम ब्रांच ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए 2.06 करोड़ रुपए की ऑनलाइन निवेश ठगी में दिल्ली के जनकपुरी निवासी विनय कुमार शर्मा को 22 अप्रैल को गिरफ्तार किया। व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई इस ठगी में 54 लेन-देन किए गए। बिहार से भी एक आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुका है।

Key Takeaways

ओडिशा क्राइम ब्रांच ने 22 अप्रैल, 2025 की रात दिल्ली से विनय कुमार शर्मा (56 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपी ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भुवनेश्वर के एक व्यवसायी से 2,06,07,500 रुपए ठगे। ठगी की शुरुआत 23 दिसंबर, 2024 को व्हाट्सएप से हुई और 54 लेन-देन में पांच अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर हुई। पीड़ित ने 28 मार्च, 2025 को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में एक अन्य आरोपी को फरवरी 2025 में बिहार से पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी को शुक्रवार को भुवनेश्वर एसडीजेएम अदालत में पेश किया जाएगा, जांच जारी है।

भुवनेश्वर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक सुनियोजित ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी निवासी 56 वर्षीय विनय कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि शर्मा और उसके साथियों ने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुवनेश्वर के एक व्यवसायी से 2 करोड़ 6 लाख 7 हजार 500 रुपए की ठगी को अंजाम दिया।

कैसे रचा गया धोखाधड़ी का जाल?

क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, साइबर ठगों ने 23 दिसंबर, 2024 को सबसे पहले व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित व्यवसायी से संपर्क साधा और उन्हें एक विशेष ग्रुप में जोड़ा। इस ग्रुप में ठगों ने खुद को वित्तीय विशेषज्ञ और एक प्रतिष्ठित कंपनी का फंड मैनेजर बताकर मोटे मुनाफे का प्रलोभन दिया।

विश्वास जीतने के लिए साइबर अपराधियों ने ग्रुप में नियमित रूप से शेयर बाजार के मुफ्त टिप्स और निफ्टी का दैनिक तकनीकी विश्लेषण साझा किया। इस तरह की पेशेवर प्रस्तुति ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया।

54 लेन-देन में गई 2.06 करोड़ की रकम

क्राइम ब्रांच की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ठगों के निर्देशों पर भरोसा करते हुए पीड़ित व्यवसायी ने 23 दिसंबर, 2024 से 24 मार्च, 2025 के बीच अपने तीन अलग-अलग बैंक खातों से पांच अलग-अलग लाभार्थी खातों में 54 लेन-देन के माध्यम से कुल 2,06,07,500 रुपए की राशि स्थानांतरित कर दी।

जब पीड़ित ने वादे के अनुसार निवेश लाभ निकालने का प्रयास किया, तो ठगों ने 'रिस्क कंट्रोल टीम' का रूप धारण कर विभिन्न झूठे बहानों से धनराशि जारी करने से बार-बार मना कर दिया। तब जाकर व्यवसायी को ठगी का एहसास हुआ।

एफआईआर और गिरफ्तारी

ठगी का शिकार होने का अहसास होते ही व्यवसायी ने 28 मार्च, 2025 को क्राइम ब्रांच के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई। वित्तीय लेन-देन के साक्ष्यों और अन्य डिजिटल सुरागों के आधार पर जांच टीम ने आरोपी का पता लगाया।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने 22 अप्रैल, 2025 की रात दिल्ली में दबिश देकर विनय कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया। शर्मा दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाता है। संदेह है कि उसने ठगी की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त किया था। उसे ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाया जा रहा है और शुक्रवार को भुवनेश्वर की एसडीजेएम अदालत में पेश किया जाएगा।

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

उल्लेखनीय है कि इस मामले में एक अन्य आरोपी को क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने फरवरी 2025 में बिहार से पहले ही गिरफ्तार किया था। इस प्रकार यह गिरोह एक से अधिक राज्यों में सक्रिय था, जो इस साइबर अपराध नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है।

बढ़ते साइबर अपराध और निवेशकों के लिए चेतावनी

यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें साइबर ठग व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और नकली वित्तीय विशेषज्ञों के माध्यम से आम निवेशकों को निशाना बना रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, निवेश धोखाधड़ी भारत में सबसे तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में शामिल है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ठग आमतौर पर पहले छोटे मुनाफे दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीतते हैं, फिर बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। ओडिशा क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई अन्य राज्यों के लिए भी एक संदेश है कि अंतर-राज्यीय साइबर अपराध गिरोहों पर शिकंजा कसा जा रहा है।

इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश भी की जा रही है। भुवनेश्वर की एसडीजेएम अदालत में शुक्रवार को पेशी के बाद रिमांड की अवधि और जांच की दिशा स्पष्ट होगी।

Point of View

बल्कि उस व्यापक साइबर अपराध पारिस्थितिकी तंत्र की एक झलक है जो दिल्ली, बिहार और ओडिशा जैसे कई राज्यों में एक साथ जड़ें जमाए हुए है। चिंताजनक यह है कि ठगी की शुरुआत से लेकर एफआईआर तक तीन महीने और एफआईआर से गिरफ्तारी तक लगभग एक महीना बीत गया — इस दौरान करोड़ों रुपए की रकम कहां गई, यह अभी भी अनुत्तरित है। मुख्यधारा की रिपोर्टिंग केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि इन फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को होस्ट करने वाले सर्वर, इनकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कब होगी। बिना डिजिटल साक्षरता और सख्त वित्तीय प्लेटफॉर्म नियमन के यह समस्या थमने वाली नहीं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

ओडिशा क्राइम ब्रांच ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
ओडिशा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के जनकपुरी निवासी विनय कुमार शर्मा (56 वर्ष) को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भुवनेश्वर के एक व्यवसायी से 2.06 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
इस ऑनलाइन निवेश ठगी में पीड़ित से कैसे पैसे ऐंठे गए?
ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से खुद को वित्तीय विशेषज्ञ बताकर पीड़ित का विश्वास जीता और शेयर बाजार टिप्स दिए। इसके बाद 23 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025 के बीच 54 लेन-देन में 2.06 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए।
क्या इस मामले में कोई और गिरफ्तारी हुई है?
हां, इस मामले में एक अन्य आरोपी को फरवरी 2025 में बिहार से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। यह गिरोह एकाधिक राज्यों में सक्रिय था।
ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से कैसे बचें?
किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर बाजार टिप्स या ऊंचे मुनाफे के वादों पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर दें।
आरोपी विनय कुमार शर्मा को अदालत में कब पेश किया जाएगा?
आरोपी विनय कुमार शर्मा को ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाया जा रहा है। उन्हें शुक्रवार को भुवनेश्वर की एसडीजेएम अदालत में पेश किया जाएगा।
Nation Press