ओणम साध्या 2025: केले के पत्ते पर 26 पकवानों की अटूट परंपरा, ₹300 से ₹1,000 तक उपलब्ध
सारांश
मुख्य बातें
केरल के तिरुवनंतपुरम सहित पूरे राज्य में ओणम साध्या की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी दशकों पहले थी। बदलते समय और सिकुड़ते संयुक्त परिवारों के बावजूद, केले के पत्ते पर 26 पकवान परोसने की यह रीत केरल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। 25 अगस्त 2025 के आसपास मनाए जा रहे ओणम पर्व के अवसर पर राज्यभर की रसोइयों में साध्या की तैयारियाँ जोरों पर हैं।
साध्या की थाली में क्या-क्या होता है
ओणम साध्या केरल की पारंपरिक रसोई का सबसे समृद्ध रूप है। केले के बड़े पत्ते पर एक तय क्रम में करीब 26 व्यंजन सजाए जाते हैं। इनमें चावल, दाल, घी, सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, कलान, एरिसेरी, अचार, पचड़ी, खिचड़ी, पापड़, केले और केले के चिप्स प्रमुख हैं। भोजन के अंत में विभिन्न प्रकार की पायसम परोसी जाती है। एक ही पत्ते पर मीठे, खट्टे, नमकीन और मसालेदार — चारों स्वाद एक साथ मिलते हैं। खास बात यह है कि हर व्यंजन को परोसने का भी एक निश्चित क्रम और परंपरा होती है।
ओणम और राजा महाबली की कथा
ओणम केरल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और इसे विभिन्न जाति, धर्म तथा सामाजिक वर्गों के लोग मिलकर मनाते हैं। इस पर्व के पीछे राजा महाबली के उस स्वर्णिम युग की कथा जुड़ी है, जिसमें समानता, खुशहाली और सुख-समृद्धि की भावना निहित मानी जाती है। यह त्योहार कई दिनों तक चलता है, लेकिन वह दिन सबसे विशेष होता है जब परिवार एक साथ बैठकर साध्या का आनंद लेते हैं।
बदलते परिवार, अटूट परंपरा
केरल की पारिवारिक संरचना में पिछले कुछ दशकों में बड़ा बदलाव आया है। पहले बड़े पुश्तैनी घरों में कई पीढ़ियाँ एक साथ रहती थीं और ओणम पर लंबी कतार में बैठकर साध्या खाई जाती थी। अब नौकरी और पढ़ाई के कारण परिवार के सदस्य देश-विदेश के अलग-अलग शहरों में बिखर गए हैं। इसके बावजूद, ओणम परिवारों को एक बार फिर एकजुट करने का अवसर बनता है — कई लोग इस त्योहार पर अपने घर लौटते हैं और साध्या की परंपरा को जीवित रखते हैं।
घर से रेस्टोरेंट तक: साध्या का बदलता स्वरूप
जहाँ पहले साध्या विशेष रूप से घर में सामूहिक रूप से बनाई जाती थी, वहीं अब छोटे कैटरर, रेस्टोरेंट और होटल इस मौसम में बड़ी संख्या में साध्या तैयार करते हैं। जिन परिवारों के लिए घर पर इतने पकवान बनाना संभव नहीं होता, वे तैयार साध्या का पैकेट मँगवा लेते हैं। कीमत जगह और परिमाण के अनुसार भिन्न होती है — एक सामान्य साध्या लगभग ₹300 से शुरू होती है, जबकि बड़े होटलों में यह ₹1,000 से भी अधिक हो सकती है।
साध्या: ओणम की आत्मा
चाहे साध्या किसी पुराने पुश्तैनी घर में केले के पत्ते पर परोसी जाए, छोटे फ्लैट में परिवार के साथ खाई जाए, या पैक होकर दरवाजे तक पहुँचे — इसकी भावना और सार एक ही रहता है। ओणम के इन विशेष दिनों में केरल के लोग एक साथ बैठकर खाना खाने, परिवार से मिलने और पुरानी यादों को फिर से जीने को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि 26 पकवानों वाली यह साध्या आज भी ओणम की जान बनी हुई है और आने वाली पीढ़ियों तक इसे संजोए रखने का संकल्प केरल के लोगों में दिखता है।