क्या एमनेस्टी ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन पर सवाल उठाए हैं?

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क्या एमनेस्टी ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन पर सवाल उठाए हैं?

सारांश

पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन ने न्यायिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस पर समीक्षा की मांग की है। क्या यह बदलाव नागरिकों की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा? जानिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में।

Key Takeaways

  • संविधान में बदलाव से न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल ने समीक्षा की मांग की है।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
  • राजनीतिक नियुक्तियों से निष्पक्षता पर असर पड़ता है।
  • पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए।

इस्लामाबाद, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में हाल के दिनों में संविधान में 27वां संशोधन किया गया है, जिसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। इस संशोधन के तहत असीम मुनीर की शक्तियों को बढ़ाया गया और प्रधानमंत्री से लेकर न्यायपालिका तक की शक्तियों को कम किया गया है।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के संविधान के 27वें संशोधन की समीक्षा की मांग की है। एमनेस्टी का कहना है कि यह संशोधन यह दर्शाता है कि शर्तों पर आधारित कानून का राज वास्तव में एक सच्चा कानून का राज नहीं होता।

पाकिस्तानी समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, एमनेस्टी इंटरनेशनल की समीक्षा की मांग यह याद दिलाती है कि संवैधानिक वैधता का नियंत्रण सत्ता के केंद्रीकरण से नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया से आता है।

लेख में कहा गया है कि यदि न्यायिक स्वतंत्रता को कम किया जाता है, तो कानून का राज शर्तों पर आधारित हो जाता है और ऐसा कानून का राज कोई राज नहीं होता।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक लेख में बताया गया, "एमनेस्टी इंटरनेशनल की चेतावनी है कि यह बदलाव न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर लगातार हमला कर रहा है।" इसलिए इसे उतनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितनी यह हकदार है। चिंता का केंद्र एक फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (एपीसीसी) की स्थापना है। एफसीसी के निर्णय बाकी सभी अदालतों को बाध्य करते हैं, जबकि एफसीसी खुद सुप्रीम कोर्ट से बंधी नहीं है।

लेख में कहा गया है कि संवैधानिक कानून निरंतरता और मिसाल पर निर्भर करता है। उस निरंतरता को खोने से कानूनी अनिश्चितता और कानून की विभिन्न व्याख्याएं होती हैं। यह किसी अच्छे न्याय प्रणाली की पहचान नहीं है। राष्ट्रपति द्वारा पीएम की सलाह पर और पाकिस्तान के न्यायिक आयोग को दरकिनार करते हुए इसके चीफ जस्टिस और जजों की नियुक्ति सीधे तौर पर शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत पर हमला करती है।

पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि जब भी नियुक्तियाँ राजनीतिक रूप से प्रभावित होती हैं, तो लोगों का निष्पक्ष फैसले लेने पर भरोसा कम हो जाता है। पाकिस्तान का संवैधानिक इतिहास गंभीर सबक देता है। हर बार जब सुविधा के नाम पर न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता किया गया, तब इसकी कीमत नागरिकों को चुकानी पड़ी।

इस हफ्ते की शुरुआत में, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन को न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा और लगातार हमला बताया। इसने पाकिस्तानी अधिकारियों से जजों की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया रीजनल ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में कहा, "नवंबर 2025 में पास हुआ संविधान का 27वां संशोधन एक बड़ी गिरावट है और यह पाकिस्तान में न्यायिक निर्भरता, निष्पक्ष परीक्षण के अधिकार और कानून के राज पर सीधा और लगातार हमला है।"

बयान में आगे कहा गया, "एमनेस्टी ने संविधान में बदलाव की तुरंत समीक्षा करने की मांग की है और पाकिस्तानी अधिकारियों से जजों की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।"

पाकिस्तानी अधिकारियों को अपनी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए, न्याय और प्रभावी उपायों तक पहुंच की गारंटी देनी चाहिए और शक्तियों के बंटवारे और कानून के राज का सम्मान करना चाहिए।

Point of View

हमारा मानना है कि संविधान में बदलाव आवश्यक है, लेकिन यह नागरिकों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का आघात नहीं कर सकता। न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखना हमारे लोकतंत्र की बुनियाद है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

27वें संविधान संशोधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य असीम मुनीर की शक्तियों को बढ़ाना और प्रधानमंत्री और न्यायपालिका की शक्तियों को कम करना है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस संशोधन पर क्या कहा है?
उन्होंने इस पर समीक्षा की मांग की है और इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
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