20 अक्टूबर 2026
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पंकजा मुंडे का जेन-जी को संदेश: 'देशभक्त बनो, आत्म-विनाश से दूर रहो' — बीड दशहरा रैली 2026

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पंकजा मुंडे का जेन-जी को संदेश: 'देशभक्त बनो, आत्म-विनाश से दूर रहो' — बीड दशहरा रैली 2026

सारांश

बीड के भगवानगढ़ में दशहरा रैली के मंच से पंकजा मुंडे ने जेन-जी को देशभक्त बनने और आत्म-विनाश से दूर रहने की नसीहत दी। जाति-राजनीति को नकारते हुए उन्होंने अंतरवाली गाँव को गोद लेने का ऐलान किया — एक ऐसा प्रतीकात्मक कदम जो मराठा आरक्षण आंदोलन की आग में जले उस गाँव की ओर पहुँचने की कोशिश है।

मुख्य बातें

पंकजा मुंडे ने 20 अक्टूबर 2026 को बीड के भगवानगढ़ में दशहरा रैली को संबोधित किया।
उन्होंने जेन-जी पीढ़ी को देशभक्त बनने और आत्म-विनाशकारी प्रवृत्तियों से बचने का आह्वान किया।
जाति-आधारित राजनीति को खारिज करते हुए कहा — 'जो नेता जाति की राजनीति करेंगे उनका कोई भविष्य नहीं।' मराठा आरक्षण आंदोलन से चर्चित जालना के अंतरवाली गाँव को गोद लेने की घोषणा।
सूखाग्रस्त किसानों के लिए सीएसआर फंड और चारे की अनुदान राशि उपयोग करने का वादा।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।

महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन और पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने 20 अक्टूबर 2026 को बीड के भगवानगढ़ में आयोजित पारंपरिक दशहरा रैली में युवा पीढ़ी को कड़ा संदेश दिया — देशभक्ति अपनाओ और आत्म-विनाशकारी प्रवृत्तियों से बचो। भारी भीड़ के सामने दिए गए इस भाषण में मुंडे ने सामाजिक एकता, जातिगत भेदभाव के उन्मूलन और बीड क्षेत्र में सूखे से राहत के लिए अपना विजन भी रखा।

वैश्विक उथल-पुथल के बीच युवाओं को संदेश

वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की पुत्री पंकजा मुंडे ने फ्रांस, रूस-यूक्रेन और ईरान जैसे देशों में जारी अस्थिरता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता नहीं है जो देश का अनादर करते हों या खुद को नुकसान पहुँचाने वाले कार्यों में लिप्त हों। उन्होंने 'जेन-जी' पीढ़ी को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आज के युवाओं के लिए सच्चा नेतृत्व ताकत या आक्रामकता में नहीं, बल्कि बुद्धि और ठोस मुद्दों में निहित है।

मुंडे ने जयप्रकाश नारायण और अपने दिवंगत पिता गोपीनाथ मुंडे जैसे नेताओं को आदर्श सिपाही बताया और कहा कि ऐसे ही नेताओं के पदचिह्नों पर चलकर युवा पीढ़ी देश को नई दिशा दे सकती है।

जाति-आधारित राजनीति पर कड़ा रुख

सूखे की विकट परिस्थितियों के बावजूद उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुंडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जाति पर आधारित राजनीति का कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने भगवान बाबा की आध्यात्मिक विरासत का स्मरण करते हुए कहा, 'हमें जाति और बंटवारे की दीवारों को गिराना होगा। जो नेता जाति के आधार पर राजनीति करके आगे बढ़ना चाहते हैं, उनका कोई भविष्य नहीं है।'

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल शिक्षित और प्रशिक्षित लोग ही देश को सही दिशा में ले जा सकते हैं। सामाजिक सद्भाव और युवाओं के सशक्तीकरण को उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताया।

अंतरवाली गाँव को गोद लेने की घोषणा

सामाजिक एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुंडे ने घोषणा की कि उन्होंने जालना जिले के अंतरवाली गाँव को गोद लिया है। गौरतलब है कि यह गाँव हाल के महीनों में मराठा आरक्षण समर्थक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल के विरोध-प्रदर्शनों के कारण राज्यभर में चर्चा में रहा है। मुंडे ने वादा किया कि वे इस गाँव के विकास के लिए उतनी ही लगन से काम करेंगी जितनी उन्होंने बीड के लिए दिखाई है।

सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राहत का भरोसा

राज्य में जारी सूखे की स्थिति को लेकर मुंडे ने समर्थकों को आश्वस्त किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर किसानों की मदद के लिए काम करेंगी। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौर में किसानों की सहायता के लिए सीएसआर फंड और चारे के लिए मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूखा किसी धर्म या आर्थिक हैसियत का भेद नहीं करता — यह सभी को समान रूप से प्रभावित करता है।

समर्थकों से भावनात्मक जुड़ाव

अपने समर्थकों के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए मुंडे ने एक शेर पढ़ा — 'लग चुकी है तलब जीत की, अब खुद को आग में झोंक देते हैं।' उन्होंने अपने समर्थकों की ताकत की तुलना मधुमक्खियों के उस झुंड से की जो अपने छत्ते की रक्षा के लिए आक्रामक हो जाते हैं। बीड की यह रैली आगामी चुनावी मौसम की दृष्टि से मुंडे के राजनीतिक पुनरुत्थान का संकेत भी मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना मनोज जरांगे पाटिल का नाम लिए। जाति-राजनीति की निंदा और सामाजिक सद्भाव का आह्वान सुनने में प्रगतिशील लगता है, लेकिन बीड जैसे जाति-संवेदनशील जिले में इसे क्रियान्वित करने की असली चुनौती बड़ी है। युवाओं को दिया गया 'देशभक्ति' का संदेश तब और अर्थपूर्ण बनेगा जब उसके साथ ठोस रोजगार और शिक्षा का रोडमैप भी सामने आए।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकजा मुंडे ने बीड दशहरा रैली में क्या कहा?
पंकजा मुंडे ने 20 अक्टूबर 2026 को बीड के भगवानगढ़ में दशहरा रैली के दौरान जेन-जी पीढ़ी को देशभक्त बनने और आत्म-विनाशकारी कार्यों से बचने का संदेश दिया। उन्होंने जाति-आधारित राजनीति को नकारते हुए सामाजिक सद्भाव और युवाओं के सशक्तीकरण का आह्वान किया।
पंकजा मुंडे ने अंतरवाली गाँव को गोद क्यों लिया?
पंकजा मुंडे ने जालना जिले के अंतरवाली गाँव को गोद लेने की घोषणा सामाजिक एकता की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में की। यह गाँव हाल के महीनों में मराठा आरक्षण समर्थक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल के विरोध-प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहा है।
मुंडे ने सूखाग्रस्त किसानों के लिए क्या वादा किया?
मुंडे ने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ मिलकर किसानों की सहायता के लिए सीएसआर फंड और चारे की अनुदान राशि का उपयोग करेंगी। उन्होंने जोर दिया कि सूखा किसी धर्म या आर्थिक स्थिति का भेद नहीं करता।
पंकजा मुंडे ने जेन-जी के लिए किस तरह के नेतृत्व की बात की?
मुंडे ने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए सच्चा नेतृत्व ताकत या आक्रामकता से नहीं, बल्कि बुद्धि और ठोस मुद्दों से आना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण और अपने दिवंगत पिता गोपीनाथ मुंडे को आदर्श सिपाही बताया।
पंकजा मुंडे ने जाति-राजनीति पर क्या रुख अपनाया?
मुंडे ने स्पष्ट कहा कि जाति पर आधारित राजनीति का कोई भविष्य नहीं है और जो नेता इसी रास्ते से आगे बढ़ना चाहते हैं, वे गलत दिशा में हैं। उन्होंने भगवान बाबा की विरासत का स्मरण करते हुए जाति और बंटवारे की दीवारें गिराने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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